आमतौर पर माना जाता है कि अगर आपकी डिग्री अच्छी है, तो आपको न केवल अच्छी नौकरी मिलती है बल्कि अच्छी सैलरी भी मिलती है. लेकिन क्या ये सही है? डॉ. ई तिरुमलई राजा के पास अंग्रेजी साहित्य में पीएचडी, कई पोस्टग्रेजुएट डिग्रियां, सालों का पढ़ाने का अनुभव और कई शोध पत्र प्रकाशित होने के बावजूद एक अच्छी नौकरी नहीं मिल पाई है. वह चेन्नई के प्रेसिडेंसी कॉलेज में कॉन्ट्रैक्ट पर लेक्चरर हैं. कम सैलरी के कारण परिवार का खर्च चलाना मुश्किल होता है, इसलिए कॉलेज के बाद वह टैक्सी चलाकर अतिरिक्त कमाई करते हैं. उनकी ये कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई है. लोग पूछ रहे हैं कि क्या केवल अच्छी और हायर डिग्री हासिल करना ही सफलता का रास्ता है?
कॉन्ट्रैक्ट लेक्चरर की नौकरी
इंग्लिश लिटरेचर में PhD होने के बाद भी उन्हें एक स्थायी नौकरी नहीं मिली है. उनके पास केवल PhD की ही नहीं बल्कि कई पोस्टग्रेजुएट और प्रोफेशनल डिग्री भी है. लेकिन भी कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर काम करना पड़ रहा है. वह कॉन्ट्रैक्ट पर प्रेसिडेंसी कॉलेज, चेन्नई में काम करते हैं जहां उन्हें 30,000 रुपये प्रति माह की सैलरी मिलती है. इसके बाद वह कैब चलाते हैं.
किसने शेयर की स्टोरी?
डॉ. राजा की कहानी तब लोगों के सामने आई, जब भारतीय रेलवे लेखा सेवा (IRAS) के वरिष्ठ अधिकारी अनंत रूपनागुडी ने एक्स पर उनकी पढ़ाई और उपलब्धियों की जानकारी शेयर की. उन्होंने लोगों और शिक्षा जगत से अपील की कि डॉ. राजा को स्थायी शिक्षक की नौकरी दिलाने में मदद की जाए. यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई. कई लोगों ने हैरानी जताई कि इतनी अच्छी पढ़ाई और लंबे अनुभव के बावजूद उन्हें परिवार का खर्च चलाने के लिए कॉलेज में पढ़ाने के साथ-साथ टैक्सी भी चलानी पड़ रही है.
एजुकेशन जर्नी
बता दें कि डॉ. राजा ने पढ़ाई में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं. उनके पास अंग्रेजी साहित्य में पीएचडी, एमफिल और एमए की डिग्री है. इसके अलावा उन्होंने मनोविज्ञान में एमएससी, बीएड और शिक्षक शिक्षा में डिप्लोमा (डीटीईडी) भी किया है. उनकी ये सभी डिग्रियां उच्च शिक्षा के प्रति उनके लंबे समर्पण को दिखाती है. खास बात यह है कि उन्होंने अपनी पीएचडी का शोध "इंडो-एंग्लियन लेखन में ब्लैक ह्यूमर" विषय पर किया था.
उन्होंने कई शोध पत्र लिखे हैं, जो यूजीसी की मान्यता प्राप्त पत्रिकाओं में पब्लिश हो चुके हैं. इसके अलावा, उन्होंने देश-विदेश के कई सेमिनारों में अपने शोध प्रस्तुत किए हैं और तमिलनाडु के कई कॉलेजों व सम्मेलनों में अतिथि वक्ता के रूप में भी व्याख्यान दिए हैं.
पढ़ाने के अलावा डॉ. राजा ने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में कई जिम्मेदारियां भी संभाली हैं. उन्होंने आईक्यूएसी, परीक्षा, शिकायत निवारण, वेबसाइट समिति और प्रश्न पत्र तैयार करने जैसे कामों में योगदान दिया है.
आजतक एजुकेशन डेस्क