ट्व‍िशा केस में क्यों हुई CBI की एंट्री? जान‍िए- सीबीआई अफसर कैसे बनते हैं, क्यों होता है इन पर ज्यादा फेथ

चर्चित ट्विशा शर्मा केस में अब CBI की एंट्री हो गई है. सीबीआई ने भोपाल के कटारा हिल्स थाने में पहले से दर्ज केस को रीरजिस्टर किया है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर पुलिस के पास ये केस होने के बाद भी इसे CBI को क्यों सौंपा गया है? आखिर क्यों CBI पर इतना भरोसा किया जाता है. 

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How To Became Officer In CBI  How To Became Officer In CBI

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 26 मई 2026,
  • अपडेटेड 12:27 PM IST

देश की सबसे बड़ी और विश्वसनीय जांच एजेंसी सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) एक बार फिर सुर्खियों में है. इन दिनों मॉडल और एक्टर ट्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत के हाई-प्रोफाइल मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई को सौंप दी गई है. आखिर इस केस में ऐसा क्या हुआ कि राज्य पुलिस से केस छीनकर इसे देश की सर्वोच्च एजेंसी को देना पड़ा? इसके साथ ही आम जनता के मन में यह सवाल भी उठता है कि आखिर CBI अफसर कैसे बनते हैं और क्यों मुश्किल से मुश्किल मामलों में लोग राज्य पुलिस के बजाय सीबीआई जांच की मांग करते हैं?

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क्यों हुई CBI की एंट्री?

33 साल की मॉडल और पूर्व मिस पुणे ट्विषा शर्मा 12 मई 2026 को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं. ट्विषा की शादी दिसंबर 2025 में भोपाल के एक वकील समर्थ सिंह से हुई थी. मौत के बाद ट्विषा के परिवार ने उनके पति और सास पर दहेज उत्पीड़न, प्रताड़ना और हत्या के गंभीर आरोप लगाए. इस मामले में आए दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं. इस केस में CBI की एंट्री कई सवाल खड़ी कर रही है. 

संस्थागत पूर्वाग्रह (Institutional Bias) का डर: ट्विषा के पति भोपाल में एक प्रैक्टिस करने वाले वकील हैं और उनकी सास गिरिबाला सिंह एक रिटायर्ड एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज (पूर्व जज) हैं. आरोपी पक्ष का दबदबा होने के कारण पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस पर दबाव बनाया जा रहा है और जांच निष्पक्ष नहीं हो रही है. 

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सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप: परिवार का आरोप था कि घटना के तुरंत बाद पूर्व जज ने कई वरिष्ठ अधिकारियों, जजों और सीसीटीवी तकनीशियनों को फोन किए. घर के सीसीटीवी कैमरों के टाइमस्टैम्प में भी गड़बड़ी पाई गई. पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस ने घटना स्थल को समय पर सील नहीं किया, जिससे सबूत नष्ट होने का खतरा बढ़ गया 

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख

इस घटनाओं को देखते हुए, बढ़ते विवाद और मीडिया ट्रायल को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया. चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि उन्हें राज्य पुलिस की निष्पक्षता पर संदेह नहीं है, लेकिन जनता का भरोसा बनाए रखने और फेयर ट्रायल के लिए इस केस की जांच CBI से कराना जरूरी है. मध्य प्रदेश सरकार की सिफारिश के बाद सीबीआई की स्पेशल क्राइम यूनिट ने केस डायरी अपने हाथ में ले ली है. 

CBI पर क्यों होता है आम जनता का सबसे ज्यादा फेथ 

जब भी देश में कोई पेचीदा, हाई प्रोफाइल या राजनितिक मामले सामने आते हैं, तो पीड़ित परिवार और जनता सीबीआई जांच की मांग करने लगती है जिसके पीछे कई कारण होते हैं. 

स्थानीय दबाव और राजनीति से मुक्ति: राज्य की पुलिस अक्सर स्थानीय नेताओं, अपराधियों या ब्यूरोक्रेसी के दबाव में आ सकती है. इसके विपरीत, सीबीआई एक केंद्रीय स्वायत्त संस्था है, जिस पर इसका कोई असर नहीं होता है. 

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आधुनिक तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर: सीबीआई के पास देश की सबसे बेहतरीन फॉरेंसिक लैब्स (CFSL), साइबर एक्सपर्ट्स, और साइकोलॉजिकल प्रोफाइलिंग टूल्स मौजूद हैं. वे डेटा रिकवरी और वैज्ञानिक जांच में राज्य पुलिस से कहीं आगे हैं. 

बेहतरीन ट्रैक रिकॉर्ड और क्रेडिबिलिटी: सीबीआई के पास चुनिंदा और बेहद काबिल अफसरों की टीम होती है. कठिन से कठिन मर्डर मिस्ट्री या बड़े वित्तीय घोटालों को सुलझाने में सीबीआई का सफलता दर काफी हाई रहा है. 

CBI अफसर कैसे बनते हैं? 

सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन(CBI) में शामिल होने और अधिकारी बनने के मुख्य रूप से दो रास्ते हैं. पहले तो सीधी भर्ती होती है और दूसरा डेपुटेशन. 

SSC CGL परीक्षा के जरिए 

अगर आप सीधे सीबीआई में प्रवेश करना चाहते हैं, तो कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की ओर से आयोजित की जाने वाली कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (CGL) परीक्षा सबसे लोकप्रिय है. इसके जरिए सीबीआई में सब-इंस्पेक्टर (SI) के पद पर सीधी भर्ती होती है. पद पर आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए. इसमें कंप्यूटर आधारित परीक्षा (टियर-1 और टियर-2) के साथ-साथ कड़े शारीरिक और मेडिकल टेस्ट से गुजरना पड़ता है. 

UPSC सिविल सेवा परीक्षा के जरिए 

वहीं, अगर इसके दूसरे तरीके की बात करें तो, सीबीआई के शीर्ष पदों (जैसे- SP, DIG, IG और Director) पर बैठने वाले अधिकारी सीधे यूपीएससी (UPSC) के जरिए आते हैं. जो उम्मीदवार UPSC सिविल सर्विस परीक्षा पास करके भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए चुने जाते हैं, उन्हें कुछ साल राज्य कैडर में सेवा देने के बाद डेपुटेशन (प्रतिनियुक्ति) पर सीबीआई में भेजा जाता है. 

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अन्य पुलिस बलों से डेपुटेशन 

राज्य पुलिस, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (जैसे- BSF, CRPF, CISF) या बैंक फ्रॉड से जुड़े विभागों के काबिल और ईमानदार इंस्पेक्टर या अधिकारियों को भी उनके रिकॉर्ड के आधार पर कुछ सालों के लिए सीबीआई में डेपुटेशन पर ट्रांसफर किया जाता है.

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