लंदन में हाल ही में हुए आतंकी हमले के बाद ब्रिटेन और ईरान के बीच तनाव बढ़ गया है. ईरान के दूतावास ने ब्रिटेन पर आरोप लगाया है कि वहां कुछ लोग फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन की तैयारी कर रहे हैं. फॉल्स फ्लैग का मतलब होता है – खुद को नुकसान पहुंचाकर किसी और देश पर आरोप लगाना, ताकि युद्ध या कार्रवाई का बहाना बन सके. ईरान ने साफ कहा है कि लंदन में हो रही हिंसा से उसका कोई लेना-देना नहीं है.
29 अप्रैल 2026 को लंदन के उत्तर में गोल्डर्स ग्रीन इलाके में दो यहूदी पुरुषों पर चाकू से हमला किया गया. एक 76 साल का बुजुर्ग और एक 34 साल का युवक घायल हो गए. दोनों की हालत स्थिर बताई जा रही है. पुलिस ने इस घटना को आतंकी घटना घोषित कर दिया है.
यह भी पढ़ें: ईरान से जंग की नई तैयारी, अमेरिका तैनात करेगा अपना सबसे खतरनाक हथियार!
हमलावर एक 45 साल का सोमालिया मूल का ब्रिटिश नागरिक है, जिसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया. उस पर हत्या के प्रयास और पुलिस अधिकारियों पर चाकू चलाने का आरोप है.
पुलिस कमिश्नर मार्क राउली ने कहा कि हमलावर के पास हिंसा का लंबा इतिहास है. मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं भी हैं. जांचकर्ता यह देख रहे हैं कि क्या यह हमला जानबूझकर यहूदी समुदाय को निशाना बनाकर किया गया था.
ईरान दूतावास का जवाब
ईरान के लंदन दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर विस्तृत बयान जारी किया. दूतावास ने ब्रिटेन में फैल रहे नकारात्मक और झूठे मीडिया माहौल को खारिज किया. ईरान ने कहा कि उसके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं और कोई ठोस सबूत नहीं है.
यह भी पढ़ें: स्माइलिंग बुद्धा- दुनिया को भारत का न्यूक्लियर मैसेज, शांति के लिए शक्ति
दूतावास ने दावा किया कि ईरान खुद कई दशकों से आतंकवाद का मुख्य शिकार रहा है. वहां निर्दोष नागरिकों, उच्च अधिकारियों और वैज्ञानिकों की हत्याएं हुई हैं. ईरान का कहना है कि वह आतंकवाद और हिंसक अतिवाद के खिलाफ वैश्विक संघर्ष में सबसे आगे है.
ईरान ने यह भी बताया कि उसने पहले ब्रिटिश अधिकारियों को कुछ संदिग्ध गतिविधियों के बारे में चेतावनी दी थी. फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन के खतरे से आगाह किया था. दूतावास का कहना है कि ऐसे आरोप राजनीतिक एजेंडे को पूरा करने और असली समस्या से ध्यान भटकाने के लिए लगाए जा रहे हैं.
ब्रिटेन में बढ़ रही चिंता
यह हमला लंदन के यहूदी समुदाय में पहले से मौजूद डर को और बढ़ा गया है. गोल्डर्स ग्रीन इलाका यहूदियों की बड़ी आबादी वाला क्षेत्र है. हाल के महीनों में यहां कई एंटी-सेमिटिक (यहूदियों विरोधी) हमले हो चुके हैं, जिनमें आगजनी की घटनाएं भी शामिल हैं.
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने संसद में इस हमले को पूरी तरह निंदनीय बताया और कहा कि सरकार ऐसे अपराधों से सख्ती से निपटेगी.पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है. इजरायल के राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग ने भी इस हमले की निंदा की और ब्रिटिश सरकार से तुरंत कार्रवाई करने की अपील की.
यह भी पढ़ें: चीन का डर... ट्रंप अपने नाम पर बनवा रहे बैटलशिप, महंगे युद्धपोत और भारी खर्च पर छिड़ी बहस
क्या ब्रिटेन जंग में शामिल होने वाला है?
वर्तमान में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच तनाव बहुत ज्यादा है. ऐसे में कुछ लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या ब्रिटेन भी मध्य पूर्व के संघर्ष में कूद पड़ेगा. ईरान के आरोप और ब्रिटेन में बढ़ रही सुरक्षा चिंताएं इस सवाल को और मजबूत कर रही हैं.
ब्रिटेन सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है कि वह किसी बड़े युद्ध में शामिल होने जा रही है. लेकिन पुलिस प्रमुख ने चेतावनी दी है कि कुछ विदेशी संगठन और शत्रुतापूर्ण देश ब्रिटेन में लोगों को हिंसा के लिए उकसा या भुगतान कर सकते हैं.
लंदन के गोल्डर्स ग्रीन हमले ने ब्रिटेन में यहूदी समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. ईरान ने इन घटनाओं से खुद को अलग करते हुए फॉल्स फ्लैग की आशंका जताई है, जबकि ब्रिटेन की पुलिस और सरकार आतंकवाद और बढ़ते घृणा अपराधों से निपटने के लिए कदम उठा रही है.
यह भी पढ़ें: अग्नि-6 मिसाइल पर DRDO चीफ का बड़ा बयान, बोले- सरकार दे ग्रीन सिग्नल, हम तैयार हैं
यह पूरा मामला दिखाता है कि मध्य पूर्व का तनाव अब यूरोप की सड़कों तक पहुंच रहा है. ब्रिटेन की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं. देश में आतंकवाद की धमकी का स्तर बढ़ा दिया गया है.
ऋचीक मिश्रा