अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपना अगला बड़ा प्लान तैयार कर लिया है. इस प्लान में 50 हजार अमेरिकी सैनिक, 200 फाइटर जेट, 2 एयरक्राफ्ट कैरियर और 1000 कमांडो शामिल हैं. ये प्लान ईरान युद्ध के चौथे हफ्ते में आया है जब अमेरिका और इजरायल ईरान पर लगातार हमले कर रहे हैं.
ट्रंप सरकार का कहना है कि यह प्लान ईरान को मजबूर करने के लिए है ताकि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोल दे. अपने मिसाइल प्रोग्राम को रोक दे. लेकिन साथ ही अमेरिका ने ईरान को 15 सूत्री युद्धविराम प्रस्ताव भी भेज दिया है यानी ट्रंप सैन्य दबाव और बातचीत दोनों रास्ते एक साथ चला रहे हैं.
यह भी पढ़ें: ईरान जंग के बीच इजरायल ने गाजा में मचाई तबाही, बम के कहर की डराने वाली Photos
ट्रंप का प्लान दो हिस्सों में बंटा हुआ है
पहला हिस्सा सैन्य है जिसमें पहले से मध्य पूर्व में मौजूद 50 हजार सैनिकों को और मजबूत किया जा रहा है. इनमें 200 फाइटर जेट और 2 एयरक्राफ्ट कैरियर शामिल हैं जो लगातार ईरान के ठिकानों पर हमले कर रहे हैं.
दूसरा हिस्सा कूटनीतिक है जिसमें अमेरिका ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को 15 सूत्री शांति प्रस्ताव भेजा है. इसमें ईरान से मांग की गई है कि वह अपना न्यूक्लियर कार्यक्रम बंद करे. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोल दे. क्षेत्रीय आतंकवादियों को सपोर्ट करना बंद करे. अगर ईरान मानता है तो युद्ध रुक सकता है लेकिन फिलहाल ईरान ने इसे ठुकरा दिया है.
50 हजार सैनिकों की भूमिका
अमेरिका के पास पहले से ही मध्य पूर्व में करीब 50 हजार सैनिक तैनात हैं. इनमें ज्यादातर थल सेना, नौसेना और वायुसेना के जवान शामिल हैं. ट्रंप अब इनकी संख्या बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं. पेंटागन ने 82वीं एयरबोर्न डिवीजन से 2000 से 4000 अतिरिक्त सैनिक भेजने का आदेश दे दिया है. ये सैनिक जल्द ही मिडिल ईस्ट पहुंच जाएंगे.
यह भी पढ़ें: होर्मुज किसका? समंदर पर ईरान का दावा क्या मानेगी दुनिया, कौन-कौन से देश हैं दावेदार
इन सैनिकों का काम ईरान की सीमा के पास तैनात रहना. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित रखना. अगर जरूरत पड़ी तो ईरान के तेल एक्सपोर्ट सेंटर खार्ग द्वीप पर कार्रवाई करना है. अमेरिकी सेना का कहना है कि ये सैनिक युद्ध को तेज करने या शांति सुनिश्चित करने दोनों के लिए तैयार हैं.
200 फाइटर जेट और 2 एयरक्राफ्ट कैरियर
ट्रंप के प्लान में 200 फाइटर जेट बहुत महत्वपूर्ण हैं. ये जेट ईरान के मिसाइल ठिकानों, रिफाइनरियों और सैन्य अड्डों पर लगातार हमले कर रहे हैं. साथ ही 2 एयरक्राफ्ट कैरियर फारस की खाड़ी में तैनात हैं.
इन कैरियरों पर सैकड़ों विमान और हेलीकॉप्टर हैं जो 24 घंटे हमले के लिए तैयार रहते हैं. इनकी वजह से अमेरिका ईरान के आसमान पर पूरा नियंत्रण रख रहा है. अमेरिकी सेना का कहना है कि ये जेट और कैरियर ईरान को यह संदेश दे रहे हैं कि अगर बातचीत नहीं हुई तो हमले और तेज हो जाएंगे.
यह भी पढ़ें: साल भर में जितना फैलता है प्रदूषण... उतना ईरान वॉर के 14 दिन में निकला, अगर 1 साल युद्ध चला तो...
1000 कमांडो की खास टुकड़ी
प्लान का सबसे खास हिस्सा 1000 कमांडो है. ये अमेरिकी मरीन और स्पेशल फोर्सेस के जवान हैं जो तेजी से किसी भी जगह पर हमला कर सकते हैं. ये कमांडो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा, ईरान के तेल टैंकरों पर नजर रखने और अगर जरूरत पड़ी तो ईरान की जमीन पर छोटे-छोटे ऑपरेशन करने के लिए तैनात किए जा रहे हैं.
मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट्स के 5000 से ज्यादा जवान भी इनके साथ पहुंच रहे हैं. कमांडो की यह टुकड़ी युद्ध को सीमित रखते हुए ईरान पर दबाव बनाने का काम करेगी.
ईरान की प्रतिक्रिया और युद्धविराम की कोशिश
ईरान ने ट्रंप के 15 सूत्री प्रस्ताव को धोखा बताया है और उसे ठुकरा दिया है. ईरान कहता है कि अमेरिका पहले युद्ध बंद करे और मुआवजा दे. लेकिन ट्रंप का प्लान साफ है – सैन्य दबाव बढ़ाओ और बातचीत का रास्ता भी खुला रखो. अमेरिकी अधिकारी कह रहे हैं कि अगर ईरान होर्मुज खोल देता है तो युद्ध जल्द खत्म हो सकता है.
यह भी पढ़ें: इधर ईरान सीजफायर का 'चौधरी' बनने में बिजी है पाकिस्तान, उधर 3 पोस्ट तबाह कर गया तालिबान
ट्रंप का यह प्लान सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है. अगर सैनिकों की संख्या बढ़ी तो युद्ध लंबा खिंच सकता है. इससे तेल की सप्लाई प्रभावित होगी और दुनिया भर की अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा. कई देश ट्रंप से कह रहे हैं कि बातचीत बढ़ाओ और युद्ध मत बढ़ाओ. अमेरिका में भी लोग इस युद्ध के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं.
ट्रंप का कहना है कि यह प्लान ईरान को कमजोर करने और क्षेत्र में शांति लाने के लिए है लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर ईरान ने जवाबी हमले किए तो स्थिति और बिगड़ सकती है.
ऋचीक मिश्रा