इजरायल और अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक बड़ा संयुक्त हमला शुरू किया है. इसे इजरायल की तरफ से ऑपरेशन रोअरिंग लायन और अमेरिका की तरफ से ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नाम दिया गया है. यह हमला 28 फरवरी 2026 को सुबह शुरू हुआ. इसमें तेहरान, इस्फहान और शिराज जैसे शहरों में ईरान के मिलिट्री, न्यूक्लियर से जुड़े और सरकारी ठिकानों पर हमले किए गए.
इजरायली एयरफोर्स (IAF) के 200 लड़ाकू विमानों ने ईरान के पश्चिमी और मध्य इलाकों में IRGC के मिसाइल ऐरे और एयर डिफेंस सिस्टम पर बड़ा हमला किया. 1200 बम का इस्तेमाल कर 500 से ज्यादा टारगेट्स को निशाना बनाया गया, जिसमें कई जगहों पर एयर डिफेंस और मिसाइल लॉन्चर शामिल थे. सटीक खुफिया जानकारी और बेहतरीन प्लानिंग के साथ सैकड़ों जेट्स को एक साथ इस्तेमाल कर हमला किया गया, जिससे ईरानी हवाई क्षेत्र पर आईएएफ की वायु श्रेष्ठता बढ़ गई.
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यह हमला ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम और उसकी बढ़ती धमकी को रोकने के लिए किया गया. ईरान ने बदले में इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए और बहरीन, कुवैत, कतर में अमेरिकी बेस पर भी हमला किया. अब यह युद्ध सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे इलाके में फैल गया है.
टोमाहॉक क्रूज मिसाइलें
टोमाहॉक अमेरिकी नेवी की सबसे ताकतवर लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल है. यह जहाजों और पनडुब्बियों से लॉन्च की जाती है. यह बहुत कम ऊंचाई पर उड़ती है, सिर्फ 30-50 मीटर की ऊंचाई पर, जिससे रडार और एयर डिफेंस से बचना आसान हो जाता है. इसकी लंबाई लगभग 5.6 मीटर है. वजन 1600 किलो तक. स्पीड 880 किलोमीटर प्रति घंटा.
यह 1600 किलोमीटर से ज्यादा दूर के टारगेट को सटीक निशाना लगा सकती है. इस हमले में अमेरिका ने टोमाहॉक मिसाइलों से तेहरान और दूसरे शहरों में हाई-वैल्यू टारगेट्स पर हमला किया. यह मिसाइल हर मौसम में काम करती है और बहुत सटीक होती है.
F-35आई अदिर स्टेल्थ फाइटर जेट
F-35आई अदिर इजरायल का खास वर्जन है जो अमेरिका के F-35ए लाइटनिंग II का कस्टमाइज्ड मॉडल है. दुनिया में सिर्फ इजरायल को ही इस जेट में अपना खुद का सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर जोड़ने की इजाजत है. इसकी स्टेल्थ डिजाइन की वजह से यह दुश्मन के रडार में आसानी से नहीं पकड़ा जाता.
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इसमें सेंसर फ्यूजन और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम हैं जो पायलट को ईरान जैसे मजबूत एयर डिफेंस वाले इलाके में घुसने, जासूसी करने और सटीक हमला करने में मदद करते हैं. इस ऑपरेशन में F-35आई ने ईरान के एयरस्पेस में घुसकर कई टारगेट्स को निशाना बनाया.
F-15आई रा'म स्ट्राइक फाइटर
F-15आई रा'म इजरायल का लंबी दूरी का स्ट्राइक फाइटर है जो अमेरिका के एफ-15ई स्ट्राइक ईगल का वर्जन है. 1991 के गल्फ वॉर में इराक के स्कड मिसाइल हमलों के बाद इजरायल ने इसे बनवाया. 1998 से इस्तेमाल में आने वाला यह जेट बहुत भारी पेलोड ले जा सकता है, यानी ढेर सारे बम और मिसाइलें.
यह बहुत दूर तक जाकर मजबूत टारगेट्स पर हमला कर सकता है. इस हमले में एफ-15आई ने ईरान के बॉर्डर से दूर स्थित किले जैसी जगहों पर हमला किया.
डेलिला और रैंपेज स्टैंड-ऑफ क्रूज मिसाइलें
ये दोनों इजरायल की बनी स्टैंड-ऑफ क्रूज मिसाइलें हैं जो दुश्मन के एयर डिफेंस रेंज से बाहर से हमला करती हैं. डेलिला में लॉइटरिंग की खासियत है, यानी यह टारगेट ढूंढती है, कन्फर्म करती है और फिर मारती है. रैंपेज तेज स्पीड वाली लंबी दूरी की मिसाइल है जो हार्ड और टाइम-सेंसिटिव टारगेट्स के लिए बनी है. इनका इस्तेमाल इस ऑपरेशन में ईरान के महत्वपूर्ण ठिकानों पर किया गया.
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स्पाइस और जेडीएएम प्रेसिजन गाइडेड बम
स्पाइस (स्मार्ट, प्रेसिज, इम्पैक्ट, कॉस्ट-इफेक्टिव) राफेल कंपनी का बनाया किट है जो सामान्य बम को स्मार्ट बना देता है. यह जीपीएस जाम होने पर भी इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल गाइडेंस और पहले से स्टोर इमेज से टारगेट मारता है. जेडीएएम (जॉइंट डायरेक्ट अटैक मुनिशन) भी ऐसा ही किट है जो जीपीएस और इनर्शियल नेविगेशन से बम को सटीक बनाता है. ये सस्ते और हर मौसम में काम करते हैं. इनका इस्तेमाल इस हमले में कई जगहों पर किया गया.
जीबीयू-28 बंकर-बस्टर बम
जीबीयू-28 5000 पाउंड यानी 2268 किलो का लेजर गाइडेड पेनेट्रेटर बम है. यह गहरे बंकर, कमांड सेंटर और हार्ड न्यूक्लियर फैसिलिटी को नष्ट करने के लिए बना है. इसका वजन और हार्ड केसिंग इसे मजबूत कंक्रीट और जमीन को भेदने की ताकत देता है. फिर विस्फोट करता है. इस ऑपरेशन में ईरान के अंडरग्राउंड कमांड सेंटर और न्यूक्लियर साइट्स पर जीबीयू-28 का इस्तेमाल किया गया.
हेरॉन और एतान आर्म्ड लॉन्ग-रेंज ड्रोन
ये इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज के बनाए लंबे समय तक उड़ने वाले ड्रोन हैं. ये मीडियम ऊंचाई पर घंटों उड़ सकते हैं. इनका इस्तेमाल जासूसी, इंटेलिजेंस इकट्ठा करने और सटीक हमलों के लिए होता है. दुश्मन इलाके में गहराई तक जाकर काम करते हैं. इस युद्ध में इन ड्रोनों ने ईरान के अंदर सर्विलांस और स्ट्राइक मिशन किए.
ऋचीक मिश्रा