भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा है कि सैन्य शक्ति राष्ट्रीय ताकत का अंतिम फैसला करने वाला तत्व है, लेकिन उसकी असली प्रभावशीलता राजनीतिक और रणनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करती है. उन्होंने वेनेजुएला और इराक को हाल के उदाहरण बताते हुए कहा कि इन देशों में मजबूत सेना होने के बावजूद इच्छाशक्ति की कमी के कारण वे दूसरे देशों के सामने झुक गए.
यह बात उन्होंने दिल्ली में 22वें सुब्रतो मुखर्जी सेमिनार में कही. यह सेमिनार सेंटर फॉर एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज (CAPSS) द्वारा आयोजित किया गया था. एयर चीफ ने जोर दिया कि आर्थिक, कूटनीतिक और तकनीकी ताकत बहुत महत्वपूर्ण हैं, लेकिन मजबूत सेना के बिना कोई भी देश सुरक्षित नहीं रह सकता. अगर मजबूत सेना नहीं है, तो कोई भी आपको अधीन बना सकता है. वेनेजुएला और इराक सबसे हाल के उदाहरण हैं.
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इच्छाशक्ति क्यों जरूरी है?
एयर चीफ ने स्पष्ट किया कि सिर्फ हथियार और सेना रखना काफी नहीं है. सैन्य ताकत महत्वपूर्ण है, लेकिन उसका इस्तेमाल करने की इच्छाशक्ति उससे ज्यादा जरूरी है. अगर आप लगातार संयम दिखाते रहेंगे, तो वह कमजोरी मानी जाएगी. मजबूत होने पर ही संयम दिखाना असली क्षमता माना जाता है. उन्होंने कहा कि कमजोर इच्छाशक्ति वाले देश आसानी से दबाव में आ जाते हैं या हमला सहते हैं.
वायु शक्ति की निर्णायक भूमिका
एयर चीफ ने वायु शक्ति को आधुनिक युद्ध में सबसे प्रभावी बताया. उन्होंने कहा कि वायुसेना ने कई बार तेज और सटीक कार्रवाई करके जरूरी परिणाम दिए हैं — जैसे संघर्ष क्षेत्रों से लोगों को निकालना, आतंकी ठिकानों पर हमला करना. उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र किया, जो मई 2025 में पाकिस्तान के आतंकी कैंपों के खिलाफ हुआ था. ऑपरेशन सिंदूर में वायु शक्ति ने कमाल किया. इससे संदेश गया कि अब काफी हो गया. उन्हें घुटनों पर ला दिया. वायु शक्ति ने ही चमत्कार किया. पाकिस्तान को सीजफायर की गुहार लगानी पड़ी.
सुब्रतो मुखर्जी को श्रद्धांजलि
एयर चीफ ने भारतीय वायुसेना के संस्थापक एयर मार्शल सुब्रतो मुखर्जी को याद किया. उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों और अनिश्चितता के दौर में भी उनकी दूरदर्शिता ने वायुसेना को सही दिशा दी. आज वायुसेना मजबूत हो रही है. संसाधन बढ़ रहे हैं, लेकिन अतीत की महिमा पर नहीं सोना चाहि. भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहना जरूरी है.
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भारत की सैन्य आधुनिकीकरण की दिशा
यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत सैन्य आधुनिकीकरण, स्वदेशी हथियार (मेक इन इंडिया) और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के सामने तैयारियों को तेज कर रहा है. एयर चीफ का संदेश साफ है — मजबूत सेना और उसका इस्तेमाल करने की इच्छाशक्ति ही देश को सुरक्षित और सम्मानित रख सकती है. वेनेजुएला (जहां हाल में अमेरिकी दबाव और सैन्य कार्रवाई के बाद स्थिति बिगड़ी) और इराक (2003 में अमेरिकी हमले से सद्दाम का तख्ता पलट) जैसे उदाहरण दुनिया को सिखाते हैं कि बिना इच्छाशक्ति के बड़ी सेना भी बेकार हो जाती है.
शिवानी शर्मा