ईरानी नेवी पर कहर बनकर टूटा अमेरिका, बम गिराकर 30 जंगी जहाज डुबो दिए

अमेरिकी सेना ने बताया कि ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध में अब तक 30 से अधिक ईरानी जहाज डुबो दिए गए हैं. इनमें एक ड्रोन जहाज भी शामिल है जो अभी आग में जल रहा है. सेंट्रल कमांड प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि युद्ध के पहले दिन से ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में 90 प्रतिशत की कमी आ गई है. अमेरिका-इजरायल की सेना ईरान की समुद्री ताकत को तेजी से नष्ट कर रही है.

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ये है ईरान को वो ड्रोन कैरियर जिसे अमेरिका ने हमला करके बर्बाद कर दिया. (Photo:X/@EGYOSINT) ये है ईरान को वो ड्रोन कैरियर जिसे अमेरिका ने हमला करके बर्बाद कर दिया. (Photo:X/@EGYOSINT)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 06 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 1:55 PM IST

अमेरिकी सेना ने 6 मार्च 2026 को बड़ा खुलासा किया है कि अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे ईरान के खिलाफ युद्ध में अब तक ईरान के 30 से ज्यादा जहाज डुबो दिए गए हैं. इनमें एक ईरानी ड्रोन जहाज भी शामिल है. यह जानकारी अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने दी.

उन्होंने बताया कि युद्ध के पहले दिन से अब तक ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में 90 प्रतिशत की भारी कमी आ गई है. यह युद्ध ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद शुरू हुआ था और अब पूरे मध्य पूर्व में फैल चुका है.

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कितने ईरानी जहाज डुबाए गए और कैसे

एडमिरल ब्रैड कूपर ने स्पष्ट कहा कि अमेरिकी नौसेना ने अब तक ईरान के 30 से ज्यादा जहाजों को पूरी तरह डुबो दिया है. इनमें बड़े-बड़े युद्धपोत, छोटे जहाज और खासतौर पर एक ड्रोन जहाज शामिल है जो ईरान इस्तेमाल कर रहा था. यह ड्रोन जहाज अभी भी आग में जल रहा है. समुद्र में लहरें उसे डुबोने की कोशिश कर रही हैं. 

अमेरिकी सेना का कहना है कि ये जहाज ईरान को हथियार पहुंचाने, हमले करने और समुद्र में घुसपैठ करने के लिए इस्तेमाल हो रहे थे. अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सेना ने इन जहाजों को लक्ष्य बनाकर हमले किए जिससे ईरान की समुद्री ताकत बहुत कमजोर हो गई है.

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ईरान के मिसाइल हमले क्यों 90 प्रतिशत कम हो गए

युद्ध के पहले दिन ईरान ने इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर भारी बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं. लेकिन एडमिरल ब्रैड कूपर ने बताया कि अब इन हमलों में 90 प्रतिशत की कमी आ गई है. इसका मुख्य कारण है कि अमेरिकी और इजरायली सेना ने ईरान के मिसाइल ठिकानों और जहाजों पर लगातार हमले किए हैं. 

ईरान के पास अब कम मिसाइलें बची हैं. उसकी सप्लाई लाइन भी टूट चुकी है. अमेरिकी सेना ने ईरान की समुद्री राहों को बंद कर दिया है जिससे नई मिसाइलें लाना मुश्किल हो गया है. इससे ईरान की हमले करने की क्षमता बहुत कम हो गई है और पूरा क्षेत्र थोड़ा शांत होने लगा है.

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एडमिरल ब्रैड कूपर कौन हैं और उन्होंने क्या कहा

एडमिरल ब्रैड कूपर अमेरिका की सेंट्रल कमांड के प्रमुख हैं जो मध्य पूर्व में अमेरिकी सेनाओं का नेतृत्व करते हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ईरान की हर गतिविधि पर नजर रखे हुए है. उन्होंने जोर देकर कहा कि यह युद्ध ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल खतरे को खत्म करने के लिए है. 

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कूपर ने बताया कि ईरान के जहाज डुबोने से न सिर्फ समुद्र में सुरक्षा बढ़ी है बल्कि ईरान की सेना भी कमजोर पड़ रही है. उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध अभी जारी है. अमेरिका अपने सहयोगी इजरायल के साथ मिलकर ईरान को पूरी तरह रोकने का काम कर रहा है.

इस युद्ध का मध्य पूर्व पर क्या असर पड़ रहा है

यह अमेरिका-इजरायल का संयुक्त अभियान अब एक हफ्ते से ज्यादा चल चुका है. ईरान के जहाज डुबोने और मिसाइल हमलों में कमी आने से गल्फ देशों में तेल की सप्लाई थोड़ी सुरक्षित हुई है लेकिन पूरा क्षेत्र अभी भी तनाव में है. ईरान ने जवाब में कुछ हमले किए हैं लेकिन उसकी ताकत कम होती जा रही है. 

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अमेरिकी सेना का मानना है कि जल्द ही ईरान मजबूर होकर बातचीत की तरफ आ सकता है. या फिर उसका शासन और कमजोर हो जाएगा. अमेरिका का यह बयान दिखाता है कि युद्ध में अमेरिका और इजरायल की सेना मजबूत स्थिति में है.

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