क्या US-इजरायल ने ऑपरेशन सिंदूर से सीखा... ईरान पर कर रहा डोरमैन स्ट्राइक

भारत के 2025 ऑपरेशन सिंदूर में किराना हिल्स के प्रवेश द्वार बंद करके पाकिस्तान के परमाणु हथियार दबाए दिए थे. अमेरिका-इजरायल ने 2026 में ईरान की भूमिगत मिसाइल शहरों पर यही रणनीति अपनाई. बंकर के मुंह, वेंट और रास्ते पर हमला कर मिसाइलें अंदर फंसा दीं. ईरान के मिसाइल हमले 80-90% कम हो गए हैं. यह दिखाता है कि बंकर अब मौत का जाल बन गए हैं.

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ईरान के अंडरग्राउंड मिसाइल और ड्रोन सिटी पर अमेरिका-इजरायल वैसे ही हमला कर रहे हैं जैसे ऑपरेशन सिंदूर में किराना हिल्स पर किया था. (File Photo: AFP) ईरान के अंडरग्राउंड मिसाइल और ड्रोन सिटी पर अमेरिका-इजरायल वैसे ही हमला कर रहे हैं जैसे ऑपरेशन सिंदूर में किराना हिल्स पर किया था. (File Photo: AFP)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 07 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 3:35 PM IST

मई 2025 में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ 4 दिन के ऑपरेशन सिंदूर चलाया था. इस ऑपरेशन में भारत ने पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों को पूरी तरह तबाह करने की बजाय किराना हिल्स के प्रवेश द्वारों पर सटीक मिसाइल हमले किए. ब्रह्मोस मिसाइलों और ड्रोन से गुफाओं के मुंह पर हमला करके उन्हें बंद कर दिया गया. 

इससे पाकिस्तान के परमाणु हथियार भूमिगत दब गए और इस्तेमाल से बाहर हो गए. इसे प्रभावी रूप से नष्ट करना ही कहा जाता है. भारतीय सेना ने गहरे घुसने वाली मिसाइलों की जरूरत नहीं पड़ी, सिर्फ दरवाजे बंद करके खतरा खत्म कर दिया.

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ऑपरेशन सिंदूर में क्या हुआ और सबक क्या मिला

ऑपरेशन सिंदूर एक नई रणनीति का उदाहरण था. किराना हिल्स पाकिस्तान का बड़ा परमाणु भंडारण स्थल माना जाता है जहां गुफाओं में हथियार रखे जाते हैं. भारत ने केव माउथ (गुफा के मुंह) पर हमला किया जिससे पूरा सिस्टम बंद हो गया. यह हमला बहुत सटीक था और रडार, एयर डिफेंस को पहले निशाना बनाकर किया गया.

भारतीय अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर किराना हिल्स पर हमले से इनकार किया लेकिन कुछ विशेषज्ञों और सैटेलाइट तस्वीरों से दावा किया गया कि तगड़ा प्रभाव पड़ा. इस रणनीति से पता चला कि भूमिगत ठिकानों को पूरी तरह खोलने की बजाय उनके प्रवेश द्वार, वेंटिलेशन और रास्ते बंद करना ज्यादा आसान और सुरक्षित है. इससे परमाणु खतरा बिना बड़े नुकसान या रेडिएशन के खत्म हो जाता है.

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ईरान की मिसाइल सिटी पर अमेरिका-इजरायल की रणनीति

अब 2026 में ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध में अमेरिका और इजरायल ने इसी सबक को अपनाया है. ईरान ने दशकों से भूमिगत मिसाइल शहर बनाए हैं जहां हजारों छोटी-मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें छिपी हैं. ये बंकर बहुत मजबूत हैं लेकिन अमेरिका-इजरायल की सेना अब इन्हें सीधे तोड़ने की बजाय डोरमैन स्ट्राइक्स कर रही है. 

यानी प्रवेश द्वारों पर हमला करके मिसाइलों को अंदर दबा दिया जा रहा है. अमेरिकी B-2 और B-52 बॉम्बर भारी बम गिराकर बंकर के मुंह बंद कर रहे हैं. ड्रोन और जेट लगातार उड़ान भरकर लॉन्चर को बाहर निकलते ही नष्ट कर रहे हैं. सैटेलाइट तस्वीरों में ईरानी मिसाइलों के जले हुए टुकड़े और लॉन्चर बंकर के बाहर बिखरे दिख रहे हैं.

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ईरान की मिसाइल हमलों में भारी कमी क्यों आई

युद्ध शुरू होने के बाद ईरान के मिसाइल हमलों में 80-90 प्रतिशत तक कमी आ गई है. पहले ईरान बड़े सैल्वो (एक साथ कई मिसाइल) दागता था लेकिन अब अमेरिका-इजरायल की हवाई श्रेष्ठता से हर लॉन्च को पहले ही रोक दिया जा रहा है. 

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भूमिगत बेस से मिसाइल बाहर निकालना मुश्किल हो गया क्योंकि बाहर आते ही हमला हो जाता है. बंकर के प्रवेश द्वार बंद होने से बाकी मिसाइल अंदर फंस गई हैं. विश्लेषक सैम लेयर कहते हैं कि जो मिसाइल पहले मोबाइल और छिपी रहती थीं अब वे फिक्स्ड हो गई हैं. आसानी से निशाना बन रही हैं. ईरान का फिक्स्ड बंकर बनाने का दांव उल्टा पड़ गया.

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इराक के स्कड मिसाइलों से तुलना और बड़ा सबक

1991 के गल्फ वॉर में इराक के सद्दाम हुसैन ने स्कड मिसाइलों को रेगिस्तान में फैलाकर महीनों तक अमेरिकी सेना को परेशान किया क्योंकि वे मोबाइल थीं. लेकिन ईरान ने फिक्स्ड भूमिगत शहर बनाए जो अब मौत के जाल बन गए हैं. अमेरिका को सबक मिला कि गहरे बंकर तोड़ने की बजाय चोक पॉइंट्स (प्रवेश द्वार, वेंट, रोड) पर हमला करें. इससे क्षमता कम हो जाती है बिना परमाणु फैलाव या बड़े नुकसान के. भारत के 2025 हमलों ने यह साबित किया कि डोरमैन स्ट्राइक्स काम करते हैं. अमेरिका-इजरायल ने इसे बड़े पैमाने पर अपनाया है.

भविष्य में भूमिगत ठिकानों का क्या होगा

यह रणनीति भूमिगत डिटरेंस को उलट रही है. ईरान, उत्तर कोरिया, चीन जैसे देश जो अरबों रुपये बंकरों में लगा रहे हैं अब सोच रहे हैं. स्थिर बंकर अब आसान निशाना बन जाते हैं. पहले सुरंगें सुरक्षित लगती थीं लेकिन अब वे मौत का जाल हैं. युद्ध तेजी से बदल रहा है. भारत के किराना हिल्स हमले ने नई राह दिखाई और अमेरिका-इजरायल ने इसे ईरान पर सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया. 

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