ऑपरेशन सिंदूर: भारत न कुछ भूलता है, न माफ करता है- वायुसेना का दुश्मन को कड़ा संदेश

ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी पर वायुसेना ने 'न भूलने, न माफ करने' का संकल्प दोहराया. प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय संकल्प के साथ, सेना ने स्पष्ट किया कि आतंकियों और उनके मददगारों को ट्रैक कर पाताल से भी ढूंढ निकाला जाएगा.

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भारतीय वायु सेना के वीडियो से लिए गए स्क्रीनग्रैब में तीन पाकिस्तानी इलाकों में तबाही दिख रही है. (Photo: IAF) भारतीय वायु सेना के वीडियो से लिए गए स्क्रीनग्रैब में तीन पाकिस्तानी इलाकों में तबाही दिख रही है. (Photo: IAF)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 07 मई 2026,
  • अपडेटेड 8:24 AM IST

मई 2025 में सीमा पार आतंकी ठिकानों पर की गई ऐतिहासिक सैन्य कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर को आज एक साल पूरा हो गया है. इस खास मौके पर भारतीय वायु सेना और भारतीय सेना ने एक वीडियो जारी कर दुनिया और विशेष रूप से दुश्मन देशों को यह साफ कर दिया है कि नया भारत अपनी सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगा. 

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वायुसेना ने अपने आधिकारिक संदेश में सख्त लहजे में कहा- भारत न कुछ भूलता है और न ही किसी को माफ करता है. यह बयान उस संकल्प को दोहराता है, जिसके तहत भारत ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है.

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प्रधानमंत्री का राष्ट्रीय संकल्प: पहचानेंगे भी और मारेंगे भी

भारतीय सेना द्वारा जारी किए गए इस विशेष वीडियो की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस ऐतिहासिक संबोधन से होती है, जिसमें उन्होंने देश की इच्छाशक्ति को प्रकट किया था. वीडियो में प्रधानमंत्री को यह कहते सुना जा सकता है कि भारत आतंकियों और उनके मददगारों की पहचान करेगा, उन्हें ढूंढेगा और उनका खात्मा करेगा.

सरकार ने इसे केवल बयान नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकल्प करार दिया है. ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर यह वीडियो न केवल हमारे जवानों के साहस को नमन करता है, बल्कि यह भी याद दिलाता है कि भारत के पास अब दुश्मन के घर में घुसकर मारने की क्षमता और राजनीतिक इच्छाशक्ति दोनों मौजूद हैं.

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सटीक कार्रवाई: क्या था ऑपरेशन सिंदूर?

वायुसेना ने अपने पोस्ट में लिखा कि कार्रवाई में सटीक, यादों में शाश्वत- ऑपरेशन सिंदूर जारी है. पिछले साल मई में भारतीय जांबाजों ने खुफिया जानकारी के आधार पर सीमा पार चल रहे आतंकी लॉन्च पैड्स और उनके आकाओं के ठिकानों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया था. 

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इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी खासियत इसकी सर्जिकल प्रिसिजन यानी सटीकता थी, जिसमें बिना किसी अतिरिक्त नुकसान के केवल लक्ष्यों को निशाना बनाया गया. आज एक साल बाद भी, यह ऑपरेशन भारतीय सैन्य इतिहास में एक ऐसे अध्याय के रूप में दर्ज है, जिसने दक्षिण एशिया में सुरक्षा समीकरणों को हमेशा के लिए बदल दिया है.

आतंक के आकाओं को चेतावनी: सुरक्षित नहीं है ठिकाना

सेना और वायुसेना का यह साझा संदेश स्पष्ट रूप से उन ताकतों के लिए है जो सीमा पार से अस्थिरता फैलाने की कोशिश करते हैं. वीडियो के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि भारत अब केवल रक्षात्मक नहीं रहा, बल्कि वह अब 'प्रो-एक्टिव' होकर खतरे को उसकी जड़ में ही खत्म करने की रणनीति पर काम कर रहा है.

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित कर दिया कि भारत के पास अब ऐसी तकनीकी और सामरिक ताकत है, जिससे वह पलक झपकते ही किसी भी हिमाकत का करारा जवाब दे सकता है. यह वीडियो उन शहीदों को भी श्रद्धांजलि है, जिन्होंने देश की अखंडता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया.

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बदलते भारत की नई सैन्य कूटनीति

पिछले एक साल में भारत ने न केवल हथियारों का आधुनिकीकरण किया है, बल्कि अपनी सैन्य कूटनीति को भी आक्रामक बनाया है. ऑपरेशन सिंदूर की बरसी पर ऐसा संदेश जारी करना यह दर्शाता है कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह बताने से नहीं हिचकता कि वह अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है. 

यह नया भारत अपनी शांति का सम्मान करता है, लेकिन अगर शांति भंग करने की कोशिश की गई, तो उसका अंजाम ऑपरेशन सिंदूर जैसा ही होगा. आने वाले समय में, यह ऑपरेशन आने वाली पीढ़ियों के लिए शौर्य की एक मिसाल और दुश्मनों के लिए एक स्थायी डर बना रहेगा.

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