ईरान के सीक्रेट न्यूक्लियर अड्डे कहां-कहां हैं, जानिए किन जगहों पर यूएस-इजरायल उतार सकते हैं स्पेशल फोर्स

ईरान के सीक्रेट न्यूक्लियर अड्डे नतांज (इस्फहान), फोर्डो (कुम), इस्फहान न्यूक्लियर सेंटर, पार्चिन, मिनजादेई, लविसान-शियन और अराक में हैं. ये पहाड़ों के अंदर 80-100 मीटर गहरी सुरंगों और टनलों में छिपे हैं. अमेरिका-इजरायल की स्पेशल फोर्स जैसे डेल्टा फोर्स, सायरेट मटकल, SEAL टीम 6 और शायेतेट 13 यहां उतरकर सेंट्रीफ्यूज, यूरेनियम स्टोर और हथियार नष्ट कर सकती हैं. युद्ध में ये मुख्य टारगेट हैं.

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अमेरिका और इजरायल की स्पेशल फोर्स किसी भी समय ईरान के न्यूक्लियर साइट पर हमला कर सकती हैं. (Photo: Reuters) अमेरिका और इजरायल की स्पेशल फोर्स किसी भी समय ईरान के न्यूक्लियर साइट पर हमला कर सकती हैं. (Photo: Reuters)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 09 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 1:38 PM IST

ईरान का परमाणु कार्यक्रम दुनिया का सबसे बड़ा रहस्य है. अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद भी ईरान ने कुछ गुप्त जगहों पर काम जारी रखा है. ये अड्डे पहाड़ों के अंदर, गहरी सुरंगों में या सैन्य इलाकों में छिपे हैं. युद्ध के दौरान हवाई हमलों से कई जगहें क्षतिग्रस्त हो गईं लेकिन कुछ सीक्रेट साइट्स अभी भी सुरक्षित बताई जा रही हैं. ऐसे में अगर जमीन पर ऑपरेशन की जरूरत पड़ी तो अमेरिका-इजरायल की स्पेशल फोर्स उतर सकती है. 

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नतांज न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स – ईरान का सबसे बड़ा यूरेनियम एनरिचमेंट सेंटर

नतांज फैसिलिटी ईरान के इस्फहान प्रांत में नतांज शहर के पास है. यह ईरान का मुख्य यूरेनियम संवर्धन प्लांट है जहां हजारों सेंट्रीफ्यूज लगे हैं. यहां ऊपर-नीचे दोनों स्तरों पर सुविधाएं हैं. जून 2025 के अमेरिकी-इजरायली हमलों में यहां का ऊपरी प्लांट पूरी तरह नष्ट हो गया और भूमिगत हिस्से को भी गंभीर नुकसान पहुंचा. 

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पिक्सएक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain) नाम की नई गुप्त जगह नतांज के ठीक 1.6 किमी दक्षिण में बन रही है. यह 100 मीटर गहरी सुरंगों वाली साइट है जहां नए सेंट्रीफ्यूज लगाने का काम चल रहा है. अगर यहां स्पेशल फोर्स उतरनी पड़ी तो अमेरिका की डेल्टा फोर्स (1st SFOD-D) या इजरायल की सायरेट मटकल (Sayeret Matkal) का इस्तेमाल हो सकता है. ये दोनों यूनिट गहरी सुरंगों में घुसकर सटीक ऑपरेशन करने में माहिर हैं.

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फोर्डो फ्यूल एनरिचमेंट प्लांट – पहाड़ के अंदर छिपा सबसे सुरक्षित अड्डा

फोर्डो तेहरान से करीब 100 किमी दक्षिण-पश्चिम में कुम शहर के पास पहाड़ के अंदर बना है. यह 80 मीटर गहराई में है. बहुत मजबूत कंक्रीट से ढका हुआ है. यहां भी यूरेनियम संवर्धन होता है. 2025 के हमलों में यहां बड़े-बड़े गड्ढे हो गए लेकिन पूरी तरह नष्ट नहीं हुआ. IAEA ने कहा कि यहां का नुकसान बहुत ज्यादा है. 

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यह जगह इतनी गहरी है कि हवाई हमले से पूरा काम खत्म करना मुश्किल है. ऐसे में अमेरिका-इजरायल की स्पेशल फोर्स जैसे इजरायल की सायरेट मटकल या अमेरिका की सील टीम 6 (SEAL Team 6) को जमीन पर उतारकर अंदर घुसकर सेंट्रीफ्यूज या स्टोरेज नष्ट करने का प्लान हो सकता है. ये फोर्सेज रात में पैराशूट से उतरकर गुप्त ऑपरेशन करने में एक्सपर्ट हैं.

इस्फहान न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी सेंटर – यूरेनियम कन्वर्शन और स्टोरेज की जगह

इस्फहान शहर में यह बड़ा कॉम्प्लेक्स है जहां यूरेनियम को गैस में बदलने और मेटल बनाने का काम होता है. यहां भूमिगत टनल कॉम्प्लेक्स में ईरान का हाईली एनरिच्ड यूरेनियम स्टोर किया जाता है. 2025 के हमलों में 11 बिल्डिंग्स और टनल के मुंह नष्ट हो गए लेकिन कुछ हिस्से अभी भी बचे हैं. 

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IAEA की रिपोर्ट में कहा गया कि यहां का बड़ा स्टोरेज अभी सुरक्षित है. यह जगह तेहरान से करीब 220 किमी दूर है. अगर US-इजरायल को यहां स्पेशल ऑपरेशन करना पड़ा तो इजरायल की शायेतेट 13 (Shayetet 13) नौसेना स्पेशल फोर्स या अमेरिका की डेल्टा फोर्स को हेलीकॉप्टर से उतारा जा सकता है क्योंकि यहां जमीन पर पहुंचना आसान है. 

पार्चिन मिलिट्री कॉम्प्लेक्स – हाई एक्सप्लोसिव टेस्टिंग और संदिग्ध न्यूक्लियर वेपन साइट

पार्चिन तेहरान से 30 किमी दक्षिण-पूर्व में है. यह सैन्य इलाका है जहां हाई एक्सप्लोसिव टेस्टिंग होती है. IAEA को शक है कि यहां परमाणु बम बनाने से जुड़े टेस्ट किए गए. 2025 और 2026 के हमलों में यहां दो बार हमला हुआ. हाल ही में यहां कंक्रीट शील्ड और नई सुरंगें बनाई जा रही थी. यह जगह 52 वर्ग किलोमीटर में फैली है.

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यहां स्पेशल फोर्स उतारने की सबसे ज्यादा संभावना है क्योंकि यह सैन्य बेस है. इजरायल की सायरेट मटकल या अमेरिका की डेल्टा फोर्स यहां घुसकर सबूत इकट्ठा कर सकती है या महत्वपूर्ण उपकरण नष्ट कर सकती है.

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मिनजादेई (Minzadehei) और लविसान-शियन – सबसे गुप्त न्यूक्लियर वेपन डेवलपमेंट साइट्स

मिनजादेई तेहरान के उत्तर-पूर्व में है. इजरायल ने इसे हाल ही में नष्ट करने का दावा किया है. यहां परमाणु हथियार बनाने का काम हो रहा था. लविसान-शियन और लविसान-2 (मोजदेह) कॉम्प्लेक्स भी तेहरान के पास हैं जहां SPND (परमाणु हथियार प्रोग्राम का प्रशासनिक हिस्सा) का काम होता था. 

ये जगहें पूरी तरह गुप्त हैं. IAEA को कभी इंस्पेक्शन नहीं होने दिया गया. 2026 के हमलों में यहां लैब जैसी बिल्डिंग नष्ट हुई. अगर बाकी हिस्से बचे हैं तो यहां अमेरिका-इजरायल की जॉइंट स्पेशल फोर्स ऑपरेशन हो सकता है. डेल्टा फोर्स और सायरेट मटकल की टीम मिलकर रात में घुसकर पूरी साइट को कब्जे में ले सकती है.

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अराक हैवी वॉटर रिएक्टर और अन्य छोटे साइट्स

अराक (खोंडाब) तेहरान से 220 किमी दक्षिण-पश्चिम में है. यहां हैवी वॉटर रिएक्टर है जो प्लूटोनियम बना सकता है. यह प्लांट अभी बंद है लेकिन फिर से चालू करने की तैयारी हो रही है. टुरकुजाबाद, वरामिन और मरिवान जैसी अनडिक्लेयर्ड साइट्स भी संदिग्ध हैं. ये छोटी लेकिन खतरनाक हैं. इन पर स्पेशल फोर्स का इस्तेमाल आसान है क्योंकि ये खुले इलाकों में हैं.

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अमेरिका-इजरायल की स्पेशल फोर्स क्यों चुनिंदा जगहों पर उतर सकती है

अमेरिका की डेल्टा फोर्स और इजरायल की सायरेट मटकल दुनिया की सबसे खतरनाक यूनिट्स हैं. ये गहरी सुरंगों, पहाड़ों और शहरों में घुसकर ऑपरेशन करती हैं. सील टीम 6 समुद्र या हेलीकॉप्टर से उतरने में माहिर है. युद्ध में हवाई हमले से कई साइट्स नष्ट हो चुकी हैं लेकिन पूरी तरह खत्म करने या सबूत इकट्ठा करने के लिए स्पेशल फोर्स की जरूरत पड़ सकती है. ईरान की IRGC इन जगहों की कड़ी सुरक्षा करती है इसलिए ये ऑपरेशन बहुत जोखिम भरे होंगे.

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