ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ रहा है. हाल के दिनों में, ईरान के पूर्व क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की खबरें आईं. इसके अलावा, अमेरिका ने ईरान के आसपास बड़ा नौसैनिक बेड़ा तैनात किया है. रूस, चीन और ईरान संयुक्त सैन्य अभ्यास करने वाले हैं. ईरान ने भी अपनी मिसाइलें तैनात कर दी हैं. क्या ये सब संकेत हैं कि ईरान में जल्दी युद्ध शुरू हो सकता है?
रजा पहलवी और ट्रंप की मुलाकात: क्या हुआ वास्तव में?
ईरान के पूर्व शाही परिवार के सदस्य रजा पहलवी ईरान की मौजूदा सरकार के खिलाफ हैं. वे अमेरिका में रहते हैं. ईरान में विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करते हैं. हाल की रिपोर्ट्स के मुताबिक, जनवरी 2026 में पहलवी ने ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से गुप्त मुलाकात की. यह मुलाकात ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर चर्चा के लिए हुई थी.
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ट्रंप ने खुद कहा कि वे पहलवी से मिलने की योजना नहीं बना रहे हैं और पहलवी की ईरान में लोकप्रियता पर सवाल उठाया। पहलवी ने ट्रंप से ईरान के लोगों की मदद मांगी है, लेकिन ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कोई वादा नहीं किया. ईरान की सरकार इसे अमेरिका की साजिश मानती है, जबकि पहलवी इसे ईरान में बदलाव की कोशिश बताते हैं.
अमेरिका का बड़ा नौसैनिक बेड़ा: ईरान के चारों ओर तैनाती क्यों?
अमेरिका ने ईरान के पास अपनी सेना बढ़ा दी है. यूएसएस अब्राहम लिंकन विमानवाहक जहाज, तीन विध्वंसक जहाज और कई लड़ाकू विमान मध्य पूर्व में तैनात हैं. अमेरिका का कहना है कि यह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए है, लेकिन ईरान इसे युद्ध की तैयारी मानता है.
ईरान ने जवाब में कहा कि उनके सैनिक ट्रिगर पर उंगली रखकर तैयार हैं. यह तैनाती जनवरी 2026 के अंत में हुई, जब ईरान में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल विकास रोके, वरना हमला हो सकता है.
रूस-चीन-ईरान का संयुक्त सैन्य अभ्यास: क्या है योजना?
रूस, चीन और ईरान फरवरी 2026 के मध्य में उत्तरी हिंद महासागर में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास करने वाले हैं. इसे मैरिटाइम सिक्योरिटी बेल्ट कहा जाता है, जो 2019 से हर साल होता है. इस बार ईरान की नियमित नौसेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स दोनों शामिल होंगे.
ईरान का कहना है कि यह शांति और सुरक्षा के लिए है, लेकिन अमेरिका इसे चुनौती मानता है. कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं कि अमेरिकी चेतावनी के कारण अभ्यास टाला जा सकता है. यह अभ्यास अमेरिकी तैनाती के बीच हो रहा है, जो तनाव बढ़ा सकता है.
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ईरान की मिसाइल तैनाती: रक्षा की तैयारी या धमकी?
ईरान ने अमेरिकी तैनाती के जवाब में अपनी मिसाइलें और फास्ट बोट्स तैनात की हैं. वे होर्मुज जलडमरूमध्य में लाइव-फायर अभ्यास करने वाले हैं, जो 1 और 2 फरवरी 2026 को होगा. ईरान कहता है कि यह रक्षा के लिए है, लेकिन अगर अमेरिका हमला करेगा तो जवाब देगा. ईरान के पास हजारों मिसाइलें और ड्रोन हैं, जो अमेरिकी ठिकानों पर हमला कर सकते हैं. चीन से मदद मिल रही है, जिससे ईरान अपनी सेना मजबूत कर रहा है.
क्या ईरान में जल्दी युद्ध शुरू होगा? विशेषज्ञ क्या कहते हैं
तनाव बहुत ज्यादा है, लेकिन युद्ध निश्चित नहीं. अमेरिका ईरान से मांग कर रहा है कि वह अपना परमाणु कार्यक्रम, मिसाइलें और क्षेत्रीय सहयोगी रोक दे. ईरान ने इन मांगों को ठुकरा दिया है. ट्रंप ने कहा है कि अगर बातचीत नहीं हुई तो हमला होगा, लेकिन वे शांति भी चाहते हैं.
ईरान तैयार है, लेकिन युद्ध से बचना चाहता है. विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर अमेरिका हमला करेगा तो यह सीमित रहेगा, लेकिन ईरान जवाब दे सकता है, जिससे बड़ा युद्ध हो सकता है. 2025 में इजराइल-ईरान युद्ध छोटा था, लेकिन अब स्थिति अलग है. तुर्की और यूरोपीय देश मध्यस्थता कर रहे हैं.
अगर कोई दुर्घटना हुई तो युद्ध शुरू हो सकता है, लेकिन अभी बातचीत का मौका है. ईरान की स्थिति जटिल है. अमेरिका दबाव बना रहा है. ईरान अपनी रक्षा कर रहा है. रूस और चीन ईरान के साथ हैं, जो अमेरिका के लिए चुनौती है. अगर बातचीत सफल हुई तो युद्ध टल सकता है, वरना खतरा बढ़ेगा.
ऋचीक मिश्रा