पाकिस्तान इन दिनों अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में चौधरी यानी मध्यस्थ बनने की कोशिश कर रहा है. पाकिस्तानी सरकार और सेना के अधिकारी ईरान और दूसरे पक्षों से संपर्क कर शांति स्थापित करने की बात कर रहे थे.
ठीक उसी समय अफगानिस्तान में सत्ता में बैठे तालिबान ने पाकिस्तान की सीमा पर तीन सैन्य पोस्ट तबाह कर दिए. यह घटना पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका है. इससे साफ हो गया है कि पाकिस्तान खुद अपनी सीमा पर नियंत्रण नहीं रख पा रहा है.
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पाकिस्तान ने ईरान युद्ध में खुद को मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश की. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय और सेना के अधिकारी ईरान के साथ संपर्क में थे. दोनों पक्षों को बातचीत के लिए तैयार करने की कोशिश कर रहे थे.
पाकिस्तान का मानना है कि अगर वह इस युद्ध में शांति का दूत बन गया तो उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि सुधरेगी और क्षेत्रीय प्रभाव भी बढ़ेगा. खासकर सऊदी अरब और अमेरिका से उसके संबंधों को देखते हुए पाकिस्तान को लगा कि वह दोनों तरफ बैलेंस कर सकता है. लेकिन तालिबान के हमले ने इस कोशिश को बीच में ही झटका दे दिया.
तालिबान ने तीन पोस्ट क्यों तबाह किए?
तालिबान ने पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर तीन पाकिस्तानी सैन्य पोस्ट पूरी तरह नष्ट कर दिए. तालिबान का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान के अंदर घुसकर हमले किए थे, इसलिए उन्होंने जवाबी कार्रवाई की. पाकिस्तानी सेना ने इसे तालिबान की घुसपैठ और आतंकवादी कार्रवाई बताया है.
इन हमलों में पाकिस्तानी सैनिकों को नुकसान हुआ है. पोस्ट पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं. यह घटना ऐसे समय में हुई जब पाकिस्तान ईरान युद्ध में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा था.
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पाकिस्तान और तालिबान (अफगानिस्तान) के बीच तनाव कई सालों से चला आ रहा है. पाकिस्तान का मुख्य आरोप है कि तालिबान TTP (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) आतंकियों को पनाह दे रहा है. TTP पाकिस्तान में हमले करता है.
इसी वजह से पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में कई एयर स्ट्राइक किए थे. तालिबान इन हमलों को आक्रामक बता रहा है. बदला लेने की धमकी दे रहा है. तीन पोस्ट तबाह करने की यह घटना उसी पुराने तनाव का नया रूप है.
ईरान युद्ध में पाकिस्तान की भूमिका
पाकिस्तान ईरान युद्ध में खुलकर किसी एक पक्ष का साथ नहीं ले रहा था. वह सऊदी अरब और अमेरिका के साथ संबंध बनाए रखते हुए ईरान से भी बातचीत कर रहा था. पाकिस्तान की कोशिश थी कि वह युद्धविराम का मध्यस्थ बने और क्षेत्र में अपनी अहमियत बढ़ाए.
तालिबान के हमले ने पाकिस्तान को अंदरूनी सुरक्षा की चिंता में डाल दिया है. अब पाकिस्तान को अपनी सीमा पर ध्यान देना पड़ रहा है, जिससे ईरान युद्ध में मध्यस्थ की भूमिका कमजोर पड़ गई है.
यह पूरा घटनाक्रम भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है. पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों भारत की पड़ोसी सीमाएं हैं. अगर यहां अस्थिरता बढ़ी तो भारत की सीमा सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है. तालिबान की बढ़ती गतिविधि और पाकिस्तान की कमजोर स्थिति भारत के लिए चिंता का विषय है.
ऋचीक मिश्रा