भारत ने अपनी हवाई सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाया है. DRDO ने स्वदेशी लंबी दूरी की एयर डिफेंस सिस्टम प्रोजेक्ट कुशा के पहले विकास परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब पश्चिम एशिया में युद्ध चल रहा है और भारत अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना चाहता है.
प्रोजेक्ट कुशा को आधिकारिक रूप से ‘एक्सटेंडेड रेंज एयर डिफेंस सिस्टम’ (ERADS) कहा जाता है. यह भारत का अपना लंबी दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम है. इसे रूस के S-400 और S-500 जैसा माना जा रहा है. इस परियोजना पर करीब 21,700 करोड़ रुपये खर्च होने हैं. इसका मुख्य उद्देश्य देश के प्रमुख सैन्य और नागरिक ठिकानों को मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करना है.
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तीन स्तर की मिसाइलें
प्रोजेक्ट कुशा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें तीन स्तर की इंटरसेप्टर मिसाइलें होंगी...
ये तीनों स्तर मिलकर एक मजबूत डिफेंस नेटवर्क बनाएंगे जो दुश्मन के हवाई हमलों को कई स्तरों पर रोक सकेंगे. इस सिस्टम से स्टेल्थ फाइटर, ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल जैसी सभी हवाई धमकियों को पहचानकर नष्ट किया जा सकेगा.
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भारतीय वायुसेना ने पहले ही कई स्क्वाड्रनों की जरूरत को मंजूरी दे दी है, जो इस प्रोजेक्ट पर भरोसा दिखाता है.
मिशन सुदर्शन चक्र का हिस्सा
प्रोजेक्ट कुशा ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इस मिशन का लक्ष्य 2035 तक पूरे देश में मजबूत एयर और मिसाइल डिफेंस नेटवर्क तैयार करना है. कुशा अकाश-NG और अन्य बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम के साथ मिलकर काम करेगा.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को पश्चिम एशिया की स्थिति और भारत की रक्षा तैयारियों की समीक्षा बैठक की. बैठक में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, तीनों सेना प्रमुख, डिफेंस सेक्रेटरी, डिफेंस प्रोडक्शन सेक्रेटरी और DRDO चेयरमैन मौजूद थे. बैठक में वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति, युद्ध के बढ़ने से भारत पर पड़ने वाले प्रभाव, चुनौतियां और अवसरों पर चर्चा हुई.
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रक्षा मंत्री ने निर्देश दिया कि चल रहे संघर्ष के ऑपरेशनल और तकनीकी सबकों को लगातार अध्ययन किया जाए ताकि भारत की तैयारियां और मजबूत हों. उन्होंने कहा कि हमें अगले दशक के लिए एक व्यापक एकीकृत रोडमैप तैयार करना चाहिए जिसमें आत्मनिर्भरता और सभी मोर्चों पर ऑपरेशनल तैयारियां सुनिश्चित हों.
DRDO द्वारा प्रोजेक्ट कुशा के पहले चरण का सफल परीक्षण भारत की एयर डिफेंस क्षमता में एक बड़ा कदम है. यह सिस्टम रूस के S-400 जैसा होगा और तीन स्तर की मिसाइलों से दुश्मन के हवाई हमलों को रोक सकेगा.
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को देखते हुए यह विकास भारत की सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. 2030 तक पूर्ण तैनाती के लक्ष्य के साथ भारत अपना स्वदेशी एयर डिफेंस शील्ड मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.
शिवानी शर्मा