स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान खुद नहीं खोज पा रहा अपने बारूदी सुरंग, अमेरिका का दावा

अमेरिका का दावा है कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अपनी बिछाई गई बारूदी सुरंगें ढूंढ नहीं पा रहा है और उन्हें हटाने की क्षमता भी नहीं है. इसलिए ईरान समुद्री रास्ते को पूरी तरह नहीं खोल पा रहा है. ट्रंप ने सीजफायर की शर्त रखी है कि होर्मुज को तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलना होगा. इस मुद्दे पर पाकिस्तान में शांति वार्ता चल रही है.

Advertisement
समुद्र के अंदर बारूदी सुरंग जहाजों और पनडुब्बियों के लिए मौत होती है. (Photo: US Naval Institute) समुद्र के अंदर बारूदी सुरंग जहाजों और पनडुब्बियों के लिए मौत होती है. (Photo: US Naval Institute)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 11 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 10:01 AM IST

ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलने में असमर्थ है क्योंकि उसने जो बारूदी सुरंगें (Sea Mines) बिछाई थीं, उन्हें अब ढूंढ नहीं पा रहा है और उन्हें हटाने की क्षमता भी नहीं है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यह मुख्य वजह है कि ईरान ट्रंप प्रशासन की मांग को जल्दी पूरा नहीं कर पा रहा है. अमेरिका चाहता है कि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से ज्यादा से ज्यादा जहाजों का आवागमन शुरू हो जाए. 

Advertisement

यह समस्या शांति वार्ता के लिए भी मुश्किल पैदा कर रही है. इस सप्ताहांत पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरानी वार्ताकारों और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल के बीच शांति वार्ता हो रही है. दोनों पक्ष युद्ध रोकने और स्थायी शांति बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन होर्मुज का मुद्दा बड़ा अड़चन बन गया है.

यह भी पढ़ें: हर टारगेट पर 'साढ़े चार बम', इजरायल ने 40 दिन में ईरान-लेबनान को दी कितनी चोट

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग है. दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है. अगर यह बंद हो जाए या जहाजों का आवागमन कम हो जाए तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छूने लगती हैं. ईरान ने पिछले महीने अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में छोटी नावों से इस समुद्री रास्ते में बारूदी सुरंगें बिछाईं. 

Advertisement

इसके साथ ही ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमलों की धमकी भी दी. नतीजा यह हुआ कि तेल के टैंकर और दूसरे जहाजों का आवागमन लगभग रुक गया. इससे दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतें बहुत बढ़ गईं. ईरान को युद्ध में यह सबसे बड़ा हथियार मिल गया. ईरान ने कुछ जहाजों को टोल (फीस) देकर एक संकरा रास्ता खुला रखा था, लेकिन पूरा समुद्री रास्ता सुरक्षित नहीं था.

ईरान ने खदानें कैसे बिछाईं और समस्या क्या है?

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ईरान ने समुद्री बारूदी सुरंगें बिना सोचे-समझे और अनियमित तरीके से बिछाईं. कई बारूदी सुरंगों का रिकॉर्ड भी नहीं रखा गया. जहां रिकॉर्ड था, वहां भी कुछ बारूदी सुरंगें बह गईं या अपनी जगह से हिल गईं. अब ईरान को पता नहीं है कि कितनी बारूदी सुरंगें कहां हैं.

यह भी पढ़ें: Artemis 2 Splashdown: चांद का सफर.. 10 दिन बाद धरती पर लौटे चंद्रयात्री, प्रशांत महासागर में उतरा NASA का यान

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने चेतावनी जारी की है कि जहाज बारूदी सुरंगों से टकरा सकते हैं. उन्होंने कुछ सुरक्षित रास्तों के नक्शे भी जारी किए, लेकिन ये रास्ते बहुत सीमित हैं. खदानें हटाना उनको बिछाने से कहीं ज्यादा मुश्किल काम है. अमेरिका की सेना के पास भी तेजी से बारूदी सुरंगें साफ करने की पूरी क्षमता नहीं है. ईरान के पास तो और भी कम सुविधाएं हैं. 

Advertisement

ईरान के पास सैकड़ों छोटी नावें हैं जो जहाजों को परेशान कर सकती हैं या नई बारूदी सुरंगें बिछा सकती हैं. अमेरिका ने ईरान की नौसेना के कई जहाज डुबो दिए और नौसैनिक ठिकानों पर हमले किए, लेकिन छोटी नावों को पूरी तरह नष्ट करना असंभव रहा.

ट्रंप की मांग और ईरान का जवाब

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि दो हफ्ते का सीजफायर तभी संभव है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित रूप से खोल दिया जाए. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तकनीकी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए खोला जाएगा. 

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी सीमाओं का मतलब ही बारूदी सुरंगें ढूंढने और हटाने में ईरान की असमर्थता है. अब इस्लामाबाद में चल रही वार्ता में यह मुद्दा मुख्य चर्चा का विषय होगा. अमेरिका ज्यादा जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने की मांग कर रहा है, जबकि ईरान अपनी तकनीकी समस्याएं बता रहा है.

यह भी पढ़ें: इमरजेंसी कोड 7700! फारस की खाड़ी में गिरा अमेरिका का सबसे महंगा ड्रोन MQ-4C Triton, क्या ईरान ने गिराया?

यह सब फरवरी-मार्च 2026 में शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध का नतीजा है. ईरान ने युद्ध शुरू होते ही होर्मुज को लगभग बंद कर दिया. इससे पहले ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि अगर कोई जहाज अंदर आएगा तो उसे आग लगा दी जाएगी. 

Advertisement

अभी दो हफ्ते का सीजफायर चल रहा है, लेकिन दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. अमेरिका कह रहा है कि ईरान सीजफायर की शर्तें पूरी नहीं कर रहा है. ईरान कह रहा है कि इजरायल लेबनान में हमले जारी रखे हुए है. होर्मुज का मुद्दा सुलझाना आसान नहीं है क्योंकि खदानें बिखरी हुई हैं. दोनों तरफ खदानें साफ करने की क्षमता सीमित है. अगर जल्दी सुरक्षित रास्ता नहीं खुला तो तेल की कीमतें फिर बढ़ सकती हैं. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement