महीनों का इंतजार, सटीक इंटेल... खामेनेई पर तब किया हमला, जब एक साथ बैठे थे सारे बड़े नेता

इजरायल-अमेरिका ने ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई, राष्ट्रपति पेजेश्कियन और शीर्ष सैन्य कमांडरों की बैठक के दौरान 8:15 बजे सुबह सटीक हमला किया. महीनों की गहन जासूसी के बाद दिन के उजाले में किया गया यह हमला ईरान की कमान व्यवस्था को बुरी तरह हिला गया है. हमले से तेहरान में नेतृत्व पर भरोसा पूरी तरह टूट गया. ईरान ने 8 देशों पर मिसाइलें दागीं, लेकिन ज्यादातर रोक ली गईं.

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इसी इमारत में बैठे थे खामेनेई और अन्य बड़े नेता जिसे पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया. (Photo: ITG) इसी इमारत में बैठे थे खामेनेई और अन्य बड़े नेता जिसे पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया. (Photo: ITG)

ऋचीक मिश्रा / सुमित चौधरी

  • नई दिल्ली,
  • 01 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:08 AM IST

ईरान पर इजरायल-अमेरिका का हमला कोई सामान्य बमबारी नहीं थी. उन्होंने महीनों तक इंतजार किया. हजारों घंटे की जासूसी और सिग्नल इंटरसेप्ट किया. सिर्फ एक चीज का इंतजार था – जब ईरान का सुप्रीम लीडर खामेनेई, राष्ट्रपति पेजेश्कियन और सारे सीनियर मिलिट्री कमांडर एक ही जगह एक ही कमरे में बैठे हों.

इस बार हमला दिन में... जिसकी उम्मीद ही नहीं थी

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28 फरवरी 2026 को वह पल आ गया. स्थानीय समयानुसार 8:15 बजे सुबह स्ट्राइक. वो भी दिन की रोशनी में. पहले इजरायल ने ईरान पर सारे हमले रात में किए थे. जून 2025 में अंधेरे में. अक्टूबर 2024 में आधी रात के बाद. ईरान ने सोचा भी नहीं था कि इस बार हमला दिन में होगा. 

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ईरान की पूरी एयर डिफेंस व्यवस्था इस बात पर टिकी थी कि इजरायल रात में ही हमला करेगा. लेकिन इस बार इजरायल ने दिन के उजाले में हमला किया क्योंकि निशाना इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं था. निशाना था एक मीटिंग. हमले में खामेनेई और पेजेश्कियन को निशाना बनाया गया.

अमेरिका और इजरायल ने कई महीनों से साथ मिलकर प्लानिंग की थी. इजरायल के अधिकारियों ने कहा कि हमला ठीक उसी जगह पर हुआ जहां ईरान के सबसे बड़े नेता इकट्ठे हुए थे. इसका मतलब तेहरान में अंदरखाने कोई ऐसा है जिसने इजरायल-अमेरिका को सटीक सूचना दी.  

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इजरायल की तैयारी कैसे हुई

इजरायल ओवदा एयरबेस पर F-22 लड़ाकू विमान, बेन गुरियन पर टैंकर, अल उदेद बेस खाली, 270 ट्रांसपोर्ट फ्लाइट्स – सब कुछ एक ही चीज के लिए था. सिर्फ एक सटीक हमले के लिए. सिर्फ एक मीटिंग को निशाना बनाने के लिए. इजरायल ने रात का इंतजार नहीं किया. उन्होंने दिन में हमला किया क्योंकि उन्हें पता था कि मीटिंग हो रही है. 

ईरान अब जान गया है कि इजराइयल को तीन बातें मालूम थीं – मीटिंग कहां हो रही है, कब हो रही है और कौन-कौन लोग वहां होंगे.

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ईरान की सेना में भरोसा टूट गया

अब ईरान के हर बड़े जनरल को ये सोचना पड़ेगा कि कल इजरायल को इस मीटिंग की खबर कैसे लग गई. हर आईआरजीसी कमांडर जब मीटिंग का बुलावा आएगा तो सोचेगा कि जाना कर्तव्य है या मौत का निमंत्रण. तेहरान की हर सुरक्षित जगह अब असुरक्षित साबित हो गई है. जून 2025 में इजरायल ने 30 जनरलों को अलग-अलग जगहों पर मार गिराया था. वह ब्रूट फोर्स था. इस बार एक स्केलपल था. एक मीटिंग. एक पल. महीनों का धैर्य.

ईरान ने बदला कैसे लिया

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ईरान ने गुस्से में 8 देशों पर मिसाइलें दाग दीं. ज्यादातर मिसाइलें रोक ली गईं. सऊदी अरब ने कहा कि वह अब ईरान के खिलाफ अपनी सारी ताकत लगाएगा. कल तक गल्फ में जो गठबंधन नहीं था, वह आज बन गया क्योंकि ईरान ने सब पर एक साथ हमला कर दिया. इजरायल ने एक सुबह के सटीक हमलों से ईरान की कमांड व्यवस्था को हमेशा के लिए तोड़ दिया.

अमेरिका को खबर थी, वॉल स्ट्रीट जर्नल का खुलासा

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने इजरायल और अमेरिका की संयुक्त योजना पर विस्तार से रिपोर्ट दी है. रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों की खुफिया एजेंसियां लंबे समय से इंतजार कर रही थीं कि ईरान के सीनियर राजनीतिक और मिलिट्री लीडर्स की एक साथ बैठक हो, ताकि उन्हें एक साथ निशाना बनाया जा सके.

शनिवार को तीन मीटिंग्स की जानकारी मिली और खामेनेई की लोकेशन भी पता चल गई. इसे अनोखा अवसर मानकर दिन के उजाले में हमला किया गया. इजरायली फाइटर जेट्स ने खामेनेई के कॉम्प्लेक्स पर 30 बम गिराए.  ट्रंप को ईरान द्वारा अमेरिकी टारगेट्स पर हमले की खुफिया जानकारी मिली थी, जिससे हमले का फैसला जल्दी हो गया.

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आगे क्या होगा

अब ईरान के हर बड़े नेता की हर मीटिंग में एक सवाल उठेगा – क्या इजरायल को इसकी भी खबर है? यह कोई साधारण मिलिट्री ऑपरेशन नहीं था. यह ईरान की सरकार के अंदर भरोसे को पूरी तरह खत्म करना था. हर जनरल अब सोचेगा कि उसके साथ बैठने वाला कौन इजरायल को बता रहा है.

हर कमांडर सोचेगा कि क्या मीटिंग में जाना सही है. ईरान की पूरी व्यवस्था अब हिल गई है. दुनिया देख रही है कि इस घटना से मिडिल ईस्ट का भविष्य कैसे बदल जाएगा. ईरान की सरकार को अब हर कदम बहुत सावधानी से उठाना होगा क्योंकि उन्हें पता है कि इजरायल हर जगह देख रहा है.

यह हमला सिर्फ बमों का नहीं था. यह ईरान की पूरी लीडरशिप के मन में डर पैदा करने का था. अब वे कभी भी पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे. इजरायल ने दिखा दिया कि उनकी जासूसी कितनी गहरी है. उनका धैर्य कितना लंबा है. यह एक नया चैप्टर है मिडिल ईस्ट के इतिहास में.

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