पेंटागन ने 82nd एयरबोर्न डिविजन के हजारों पैराट्रूपर्स को मिडिल ईस्ट भेजने की तैयारी शुरू कर दी है. इस डिविजन के 2000 से 4000 सैनिक जल्द ही क्षेत्र में पहुंच सकते हैं. 82nd एयरबोर्न अमेरिका की सबसे तेज रैपिड रिस्पॉन्स फोर्स है, जो 18 घंटे के अंदर दुनिया के किसी भी कोने में पैराशूट से उतर सकती है.
यह खबर ईरान युद्ध के बीच आई है. इससे साफ संकेत मिल रहा है कि अमेरिका अब जमीनी हमले का विकल्प भी खुला रख रहा है. मिडिल ईस्ट में पहले से ही करीब 4500 मरीन्स तैनात हैं. इनमें USS Tripoli और USS Boxer जैसे अम्फीबियस असॉल्ट शिप पर सवार मरीन्स शामिल हैं.
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इसके अलावा अमेरिका के दो पूरे एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप (USS Abraham Lincoln और USS Gerald R. Ford) भी फारस की खाड़ी में हैं. इन जहाजों पर F-35 जेट्स, हेलीकॉप्टर और हजारों सैनिक हैं.
कुल मिलाकर मिडिल ईस्ट में अमेरिका के लगभग 50 हजार सैनिक पहले से मौजूद हैं. पैराट्रूपर्स के आने के बाद यह संख्या 52 से 54 हजार तक पहुंच जाएगी.
क्या अमेरिका ईरान पर जमीनी हमला करने की तैयारी कर रहा है?
एक्सपर्ट्स और रक्षा विश्लेषक इस तैनाती को बहुत गंभीर मान रहे हैं. रिटायर्ड अमेरिकी जनरल जॉन एलन कहते हैं कि 82nd एयरबोर्न को भेजना सिर्फ डिफेंस के लिए नहीं है. यह बूट्स ऑन ग्राउंड यानी जमीनी हमले की तैयारी का साफ संकेत है.
रक्षा विशेषज्ञ कर्नल (रिटायर्ड) पीके गौतम का कहना है कि पहले अमेरिका हवाई और नौसेना हमले कर रहा था, लेकिन पैराट्रूपर्स की तैनाती से खार्ग आइलैंड या ईरान के अन्य इलाकों पर जमीनी ऑपरेशन की संभावना बढ़ गई है. ट्रंप प्रशासन ने अभी तक ग्राउंड इनवेशन से इनकार नहीं किया है.
मिडिल ईस्ट में कितने युद्धपोत तैनात हैं?
वर्तमान में अमेरिका के कम से कम 16 युद्धपोत मिडिल ईस्ट में तैनात हैं. इनमें दो फुल कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, कई अम्फीबियस असॉल्ट शिप (Tripoli, Boxer, Portland, Comstock) और क्रूजर शामिल हैं. ये जहाज F-35 जेट्स, मिसाइलें, हेलीकॉप्टर और मरीन्स को सपोर्ट करने के लिए हैं. इतनी बड़ी नौसेना की मौजूदगी ईरान को बहुत दबाव में डाल रही है.
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ग्राउंड इनवेशन कहां से हो सकता है?
अगर अमेरिका जमीनी हमला करता है तो मुख्य संभावित लॉन्च पॉइंट्स ये हैं...
चाबहार पोर्ट: ईरान का एकमात्र ओपन ओशन पोर्ट, पाकिस्तान बॉर्डर से सिर्फ 150 किलोमीटर दूर है. अमेरिका यहां से कब्जा करके होर्मुज की तरफ बढ़ सकता है. रक्षा विशेषज्ञ कर्नल गौतम कहते हैं कि चाबहार सबसे चर्चित और संभावित जगह है क्योंकि यहां से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तक पहुंच आसान है.
पाकिस्तान से: पाकिस्तान अमेरिका का पुराना सहयोगी है, लेकिन पाकिस्तान सरकार कभी भी अपने क्षेत्र से ईरान पर हमला करने की अनुमति नहीं देगी. इसलिए इस विकल्प की बहुत कम संभावना है.
खाड़ी देशों (सऊदी अरब, UAE) से: इन देशों के बंदरगाहों और बेस से लॉजिस्टिक सपोर्ट मिल सकता है.
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इराक या अन्य पड़ोसी: इराक में अमेरिका के कई बेस हैं, लेकिन पूर्ण जमीनी इनवेशन के लिए बहुत बड़ी फोर्स चाहिए.
82nd एयरबोर्न डिविजन के हजारों पैराट्रूपर्स को भेजना अमेरिका की ताकत बढ़ाने का सबसे बड़ा संकेत है. पहले से 4500 मरीन्स और 50,000 सैनिक मिलाकर कुल संख्या बहुत बढ़ जाएगी. चाबहार सबसे संभावित लॉन्च पॉइंट है, जबकि पाकिस्तान का रोल बहुत सीमित रहेगा. एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि यह तैनाती हवाई-नौसेना हमलों से आगे बढ़कर जमीनी इनवेशन की तैयारी दिखाती है.
ऋचीक मिश्रा