ईरान का बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट देश के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में, फारस की खाड़ी के किनारे मौजूद है. यह बुशहर प्रांत में है, जो ईरान की मुख्य तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक है. प्लांट समुद्र तट से बहुत करीब है, जिससे इसे ठंडा रखने के लिए समुद्री पानी का इस्तेमाल किया जाता है.
यह ईरान का एकमात्र ऑपरेशनल न्यूक्लियर पावर प्लांट है. हाल ही में इसके कैंपस के बहुत पास एक प्रोजेक्टाइल (मिसाइल या बम) गिरा, जिससे खलबली मच गई. हमला प्लांट के मेट्रोलॉजी सर्विस बिल्डिंग के पास हुआ, लेकिन रिएक्टर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा.
प्लांट किसने बनाया और कौन चलाता है?
बुशहर प्लांट की कहानी काफी पुरानी है. 1970 के दशक में जर्मनी की कंपनी Siemens ने इसका निर्माण शुरू किया था, लेकिन 1979 की ईरानी क्रांति के बाद जर्मन कंपनी काम छोड़कर चली गई. उसके बाद 1995 में ईरान ने रूस के साथ समझौता किया. रूस की कंपनी Rosatom (Atomstroyexport) ने प्लांट को पूरा किया.
यह भी पढ़ें: 90 सेकंड की लाइफलाइन... ईरानी मिसाइल चलते ही इजरायलियों को ऐसे मिलता है 'रेड अलर्ट'
प्लांट क्या करता है?
बुशहर प्लांट मुख्य रूप से बिजली उत्पादन के लिए है. यह 1,000 मेगावाट बिजली पैदा करता है, जो ईरान के कई लाख घरों और उद्योगों को बिजली देता है. यह सिविलियन न्यूक्लियर प्लांट है, लेकिन दुनिया इसलिए नजर रखती है क्योंकि ईरान का परमाणु कार्यक्रम संदिग्ध रहा है.
IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) इसकी निगरानी करती है. प्लांट से कोई हथियार ग्रेड सामग्री नहीं बनाई जाती, लेकिन रूस के विशेषज्ञों की मौजूदगी इसे संवेदनशील बनाती है.
रूस का कनेक्शन क्या है?
रूस का बुशहर प्लांट से बहुत गहरा कनेक्शन है...
यह भी पढ़ें: ईरान ने इजरायल की राजधानी में किया मिसाइल अटैक, नहीं रोक पाया डिफेंस सिस्टम, देखिए Photos
हाल के हमले के बाद Rosatom के CEO एलेक्सी लिखाचेव ने हमले की निंदा की और कहा कि यह खतरनाक मिसाल है. रूस ने प्लांट के आसपास सिक्योरिटी की मांग की है. हमले में रूसी कर्मचारियों को कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन Rosatom ने कुछ स्टाफ को निकालने की तैयारी कर ली है.
रूस ईरान का महत्वपूर्ण साझेदार है और बुशहर प्लांट दोनों देशों के बीच परमाणु सहयोग का सबसे बड़ा प्रतीक है. हमले के बाद रूस ने अमेरिका और इजरायल से अपनी चिंता जताई है.
हमला क्यों हुआ और इसका क्या मतलब है?
ईरान युद्ध के दौरान अमेरिका-इजरायल ने ईरान की कई न्यूक्लियर साइट्स (नतांज, फोर्डो आदि) पर हमले किए. बुशहर पर सीधा हमला नहीं हुआ, लेकिन कैंपस के बहुत पास एक प्रोजेक्टाइल गिरा. ईरान और रूस ने इसे जानबूझकर हमला बताया.
यह भी पढ़ें: ईरान पर अमेरिका-इजरायल का डबल गेम? ट्रंप का 'हाफ सीजफायर' क्यों नहीं टिका
IAEA ने पुष्टि की कि रिएक्टर को कोई नुकसान नहीं हुआ और रेडिएशन लेवल नॉर्मल है. हाल का हमला प्लांट के कैंपस के पास हुआ, जिससे न्यूक्लियर सिक्योरिटी का खतरा बढ़ गया है. यह घटना ईरान युद्ध को और जटिल बना रही है क्योंकि रूस भी अब सीधे प्रभावित महसूस कर रहा है.
ऋचीक मिश्रा