बिना हथियार वाले कंबोडिया पर थाईलैंड ने की एयरस्ट्राइक... जानिए दोनों देशों की सेना कितनी ताकतवर

थाईलैंड और कंबोडिया की सैन्य ताकत में ज़मीन-आसमान का अंतर है. थाईलैंड की 3.60 लाख सैनिकों, F-16 जेट्स और 5.5 बिलियन डॉलर के बजट वाली सेना कंबोडिया की 1.70 लाख सैनिकों और 720 मिलियन डॉलर की सेना से कहीं आगे है. कंबोडिया के पास न तो आधुनिक जेट्स हैं. न ही मजबूत नौसेना. प्रीह विहार मंदिर विवाद और ड्रोन के दावों ने इस तनाव को बढ़ाया, जिसमें थाईलैंड ने अपनी हवाई ताकत दिखाई.

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कंबोडियाई सैनिक मार्च पास्ट करते हुए. (File Photo: AP) कंबोडियाई सैनिक मार्च पास्ट करते हुए. (File Photo: AP)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 24 जुलाई 2025,
  • अपडेटेड 1:10 PM IST

24 जुलाई 2025 को थाईलैंड ने कंबोडिया के सैन्य ठिकानों पर F-16 फाइटर जेट्स से हवाई हमले किए, जिसने दोनों देशों के बीच तनाव को बढ़ा दिया. ये हमला सीमा पर विवादित मंदिरों के पास हुआ, जहां कंबोडिया ने ड्रोन इस्तेमाल करने का दावा किया था. 

कंबोडिया ने जवाब में रॉकेट और आर्टिलरी फायर किए. इस घटना से 40,000 लोग विस्थापित हुए. दोनों तरफ हताहत हुए. नौ लोग मारे गए हैं. 14 जख्मी हैं. सवाल ये है कि थाईलैंड और कंबोडिया की सेनाएं कितनी ताकतवर हैं? क्यों थाईलैंड ने ऐसा हमला किया? आइए, दोनों देशों की सैन्य ताकत को समझते हैं, ग्लोबल फायरपावर 2025 की ताजा रैंकिंग के आधार पर.

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क्या हुआ: थाईलैंड-कंबोडिया तनाव

थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद पुराना है, खासकर प्रीह विहार मंदिर को लेकर, जो UNESCO विश्व धरोहर स्थल है. X पोस्ट्स के मुताबिक, थाईलैंड ने दावा किया कि कंबोडिया ने उनके खिलाफ ड्रोन का इस्तेमाल किया. इसके जवाब में थाईलैंड ने छह F-16 जेट्स से कंबोडिया के सैन्य मुख्यालयों पर हमला किया.

कंबोडिया ने इसे आत्मरक्षा बताते हुए MLRS (मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम) से थाईलैंड की ओर फायरिंग की. इस घटना ने क्षेत्रीय तनाव को बढ़ा दिया है. दोनों देशों की सैन्य ताकत अब चर्चा का विषय है.

थाईलैंड और कंबोडिया की सैन्य ताकत: तुलना

ग्लोबल फायरपावर 2025 रैंकिंग के अनुसार, थाईलैंड और कंबोडिया की सैन्य ताकत में बड़ा अंतर है. थाईलैंड विश्व रैंकिंग में 24वें स्थान पर है, जबकि कंबोडिया 83वें स्थान पर. 

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1. सैन्य कर्मचारी (Manpower) 

थाईलैंड

सक्रिय सैनिक: लगभग 3,60,000   
रिजर्व सैनिक: लगभग 2,00,000  
कुल जनसंख्या: 7.2 करोड़, जिसमें से 5 करोड़ लोग सैन्य सेवा के लिए उपलब्ध हैं.  
विश्लेषण: थाईलैंड की सेना बड़ी और अच्छी तरह प्रशिक्षित है. उनके पास रॉयल थाई आर्मी, नेवी और एयर फोर्स में अच्छा तालमेल है.

कंबोडिया

सक्रिय सैनिक: लगभग 1,70,000  
रिजर्व सैनिक: लगभग 1,00,000  
कुल जनसंख्या: 1.7 करोड़, जिसमें से 1.2 करोड़ लोग सैन्य सेवा के लिए उपलब्ध हैं.  
विश्लेषण: कंबोडिया की सेना छोटी है. उनके पास आधुनिक प्रशिक्षण की कमी है. 

2. रक्षा बजट (Defense Budget)

थाईलैंड: 5.5 बिलियन डॉलर (लगभग 4.6 लाख करोड़ रुपये)

थाईलैंड का रक्षा बजट कंबोडिया से 7 गुना ज्यादा है, जिससे वो आधुनिक हथियार और तकनीक खरीद सकता है.

कंबोडिया: 720 मिलियन डॉलर (लगभग 60,000 करोड़ रुपये)

कंबोडिया का बजट सीमित है, जिससे वो ज्यादातर पुराने या सस्ते हथियारों पर निर्भर है.

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3. वायु सेना (Air Force)

थाईलैंड

फाइटर जेट्स: 40-50 F-16 और SAAB ग्रिपेन जेट्स.  
हेलिकॉप्टर: 100+ हेलिकॉप्टर, जिनमें AH-1 कोबरा जैसे अटैक हेलिकॉप्टर शामिल हैं.  
ड्रोन: कुछ आधुनिक ड्रोन, जैसे RQ-21 ब्लैकजैक.  
विश्लेषण: थाईलैंड की वायु सेना क्षेत्र में मजबूत है. F-16 जैसे जेट्स ने हाल के हमले में अपनी ताकत दिखाई.

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कंबोडिया

फाइटर जेट्स: कोई भी आधुनिक फाइटर जेट नहीं.  
हेलिकॉप्टर: पुराने Mi-8 और Z-9 हेलिकॉप्टर (चीन से खरीदे गए).  
ड्रोन: कुछ सस्ते ड्रोन, जिनका इस्तेमाल जासूसी के लिए हो सकता है.  
विश्लेषण: कंबोडिया की वायु सेना बहुत कमजोर है. उनके पास हवाई हमले का जवाब देने की क्षमता नहीं है.

4. थल सेना (Army)

थाईलैंड

टैंक: 200+ टैंक, जिनमें M60 और VT-4 (चीन से खरीदे गए) शामिल हैं.  
आर्टिलरी: 1,000+ आर्टिलरी सिस्टम, जैसे M777 हॉवित्जर.  
रॉकेट सिस्टम: HIMARS जैसे आधुनिक MLRS सिस्टम.  
विश्लेषण: थाईलैंड की थल सेना अच्छी तरह सुसज्जित है. क्षेत्रीय युद्ध में प्रभावी हो सकती है.

कंबोडिया

टैंक: 200+ पुराने T-55 और टाइप 59 टैंक (सोवियत और चीनी मूल के).  
आर्टिलरी: 400+ आर्टिलरी, ज्यादातर पुराने मॉडल.  
रॉकेट सिस्टम: सीमित MLRS, जैसे BM-21 ग्रैड.  
विश्लेषण: कंबोडिया की थल सेना पुरानी तकनीक पर निर्भर है और थाईलैंड से मुकाबला करने में कमजोर है.

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5. नौसेना (Navy)

थाईलैंड

युद्धपोत: 1 एयरक्राफ्ट कैरियर (HTMS Chakri Naruebet, हालांकि सीमित इस्तेमाल), 7 फ्रिगेट्स, और 20+ कोरवेट्स.  
पनडुब्बियां: 1 नई S26T पनडुब्बी (चीन से खरीदी गई).  
विश्लेषण: थाईलैंड की नौसेना दक्षिण-पूर्व एशिया में मध्यम स्तर की है.

कंबोडिया

युद्धपोत: 10+ छोटे गश्ती जहाज, कोई बड़ा युद्धपोत नहीं.  
पनडुब्बियां: कोई नहीं.  
विश्लेषण: कंबोडिया की नौसेना बहुत कमजोर है. समुद्री युद्ध में कोई खास ताकत नहीं रखती.

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क्यों हुआ हमला?

सीमा विवाद

प्रीह विहार मंदिर और आसपास का 4.6 वर्ग किमी क्षेत्र दोनों देशों के बीच विवाद का कारण है. 1962 में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने मंदिर को कंबोडिया को दिया, लेकिन आसपास का क्षेत्र अभी भी विवादित है.   2008 और 2011 में भी इस इलाके में दोनों देशों के बीच झड़पें हुई थीं. 

ड्रोन का दावा: थाईलैंड ने कहा कि कंबोडिया ने उनके क्षेत्र में ड्रोन भेजे, जिसे वो उकसावे की कार्रवाई मानते हैं. कंबोडिया ने इसे आत्मरक्षा बताया.

सैन्य असंतुलन: थाईलैंड की ताकतवर वायु सेना (F-16 और SAAB ग्रिपेन) ने उन्हें हमला करने का भरोसा दिया. कंबोडिया के पास ऐसी कोई हवाई ताकत नहीं है.

क्षेत्रीय प्रभाव: थाईलैंड दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी ताकत दिखाना चाहता है. कंबोडिया, जो चीन का करीबी सहयोगी है, पर हमला करके थाईलैंड ने क्षेत्रीय समीकरण को प्रभावित करने की कोशिश की.

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तकनीक का रोल

F-16 जेट्स: थाईलैंड के F-16 जेट्स में रडार, प्रेसिजन-गाइडेड मिसाइल्स और नाइट विजन जैसी आधुनिक तकनीक है. ये जेट्स 500 किमी/घंटा की रफ्तार से हमला कर सकते हैं.  इन जेट्स में AESAR रडार और लेजर-गाइडेड बम होते हैं, जो सटीक निशाना लगाते हैं.

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MLRS (कंबोडिया): कंबोडिया ने जवाब में BM-21 ग्रैड जैसे रॉकेट सिस्टम इस्तेमाल किए, जो 20-40 किमी की रेंज में फायर कर सकते हैं. लेकिन ये पुराने हैं और सटीकता में कमी है. MLRS में मल्टीपल रॉकेट ट्यूब्स होते हैं, जो एक साथ कई रॉकेट दाग सकते हैं.

ड्रोन का इस्तेमाल: कंबोडिया के ड्रोन सस्ते और जासूसी के लिए इस्तेमाल होने वाले चीनी ड्रोन (जैसे DJI मॉडल) हो सकते हैं. इनमें कैमरे और GPS होते हैं. ड्रोन में AI और सेंसर का इस्तेमाल होता है, जो रियल-टाइम जानकारी देता है.

भारत के लिए क्या मायने?

क्षेत्रीय स्थिरता: थाईलैंड और कंबोडिया ASEAN के सदस्य हैं. इस तनाव से दक्षिण-पूर्व एशिया में अस्थिरता बढ़ सकती है, जो भारत की Act East Policy को प्रभावित कर सकती है.  भारत का कंबोडिया के साथ सांस्कृतिक और डिफेंस रिश्ता है (जैसे अंगकोर वाट) और थाईलैंड के साथ भी मजबूत व्यापारिक रिश्ते हैं.

चीन का प्रभाव: कंबोडिया चीन का करीबी सहयोगी है. उससे हथियार खरीदता है. इस हमले से चीन की क्षेत्रीय रणनीति पर सवाल उठ सकते हैं. भारत को अपनी इंडो-पैसिफिक रणनीति में ASEAN देशों के साथ और मजबूत रिश्ते बनाने होंगे.

सैन्य सबक: भारत की सेना (विश्व रैंकिंग: 4) दोनों देशों से कहीं ज्यादा ताकतवर है. लेकिन ड्रोन और हवाई हमलों की भूमिका (जैसा थाईलैंड ने दिखाया) भारत के लिए भी सबक है. भारत को FPV ड्रोन और AI-आधारित युद्ध तकनीक में और निवेश करना चाहिए.

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