ड्रोन जंग में नया मोड़, ब्रिटेन-यूक्रेन की कंपनी ने अमेरिका को उसी के मैदान में हराया

अमेरिका के पेंटागन के ड्रोन मुकाबले में ब्रिटेन की छोटी कंपनी स्काईकटर ने अमेरिकी कंपनियों को अपने ही मैदान में हरा दिया. यूक्रेन युद्ध का अनुभव रखने वाली इस कंपनी ने 99.3 अंक हासिल कर पहला स्थान जीता. उसका फाइबर ऑप्टिक ड्रोन श्राइक 10-F सबसे बेहतर रहा. अब 2500 से ज्यादा ड्रोनों का ऑर्डर मिल चुका है.

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ये है FPV ड्रोन जो यूक्रेन का सैनिक उड़ा रहा है. (Photo: Representative/Reuters) ये है FPV ड्रोन जो यूक्रेन का सैनिक उड़ा रहा है. (Photo: Representative/Reuters)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 16 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:16 AM IST

अमेरिका के पेंटागन ने फरवरी में एक बड़ा मुकाबला शुरू किया था. इसमें दुनिया की सबसे घातक हमला ड्रोन बनाने वाली कंपनियों को आमंत्रित किया गया था. मकसद था कि अमेरिकी सेना को सस्ते और प्रभावी ड्रोन की विशाल फौज तैयार की जाए. लेकिन इस मुकाबले का नतीजा सबको चौंका गया. 

अमेरिका की बड़ी-बड़ी कंपनियों को हराकर एक छोटी ब्रिटिश कंपनी स्काईकटर ने पहला स्थान हासिल कर लिया. यह कंपनी यूक्रेन की जंग का सीधा अनुभव रखती है. उसका एक छोटा उत्पादन प्लांट अटलांटा में भी है. स्काईकटर ने जॉर्जिया के फोर्ट बेनिंग में हुए पहले गॉन्टलेट मुकाबले में 99.3 अंक हासिल किए, जबकि कैलिफोर्निया की स्टार्टअप नेरोस दूसरे नंबर पर रही, जिसे सिर्फ 87.5 अंक मिले.

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स्काईकटर की इस जीत का सबसे बड़ा कारण उसका 10 इंच का श्राइक 10-एफ ड्रोन था. यह ड्रोन फाइबर ऑप्टिक केबल से नियंत्रित होता है, जिससे दुश्मन के जैमिंग और स्पूफिंग सिग्नल बिल्कुल बेअसर हो जाते हैं. यह ड्रोन यूक्रेन की कंपनी स्काईफॉल के साथ मिलकर बनाया गया है. 

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स्काईफॉल हर 23 सेकंड में एक ड्रोन बनाती है यानी महीने में 1 लाख 23 हजार ड्रोन. दोनों कंपनियों ने मिलकर इस ड्रोन को पूरी तरह चीनी पार्ट्स से मुक्त बनाया, क्योंकि अमेरिकी कार्यक्रम में यही शर्त थी. स्काईकटर के ऑपरेशंस डायरेक्टर विंसेंट गार्डनर ने कहा कि हम थोड़े घबराए हुए थे, लेकिन हमने हर मिशन में बाकी कंपनियों से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया. हमने लंबी दूरी और शहरी इलाकों दोनों में हमले के सभी टेस्ट पास कर लिए हैं.

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यह जीत सिर्फ एक कंपनी की सफलता नहीं है. यह तीन बड़ी बातें साफ करती है...

  • पहला, चमक-दमक वाली बड़ी कंपनियां हमेशा बेहतर नहीं होतीं. 
  • दूसरा, सिलिकॉन वैली और वॉशिंगटन के बाहर भी असली इनोवेशन हो रहा है. 
  • तीसरा, रूस-यूक्रेन युद्ध आज की और कल के जंग की तकनीक को पूरी तरह बदल रहा है. यूक्रेन युद्ध में 75 प्रतिशत हताहत ड्रोनों की वजह से हो रहे हैं.  

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इसी सबक को देखते हुए अमेरिका अब जल्दी से जल्दी हजारों सस्ते और एक बार इस्तेमाल होने वाले ड्रोनों की फौज तैयार करना चाहता है. स्काईकटर अब 2500 से ज्यादा ड्रोनों का ऑर्डर ले चुकी है. जल्द ही अमेरिका में अपना उत्पादन बढ़ाने वाली है.

स्काईकटर के इस प्रदर्शन से अमेरिकी रक्षा विभाग का ड्रोन डोमिनेंस कार्यक्रम नई दिशा पा गया है. पहले 24 से ज्यादा कंपनियां इसमें शामिल थीं, जिनमें ऑटेरियन, फायरस्टॉर्म लैब्स, परफॉर्मेंस ड्रोन वर्क्स और टीएल ड्रोन्स जैसी नामी कंपनियां भी थीं. 

स्काईकटर और स्काईफॉल की जोड़ी ने साबित कर दिया कि साधारण दिखने वाला ड्रोन ही असली खेल बदल सकता है. गार्डनर ने कहा कि हम इस मौके का फायदा उठाकर पश्चिमी बाजार में ड्रोन उद्योग में अपनी ताकत स्थापित करना चाहते हैं. यह हमारे लिए बहुत सारे नए दरवाजे खोल रहा है. 

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अमेरिका अब समझ रहा है कि रूस-यूक्रेन जंग ने जो सबक दिए हैं, उन्हें जल्दी अपनाना जरूरी है. स्काईकटर की इस जीत से साफ है कि भविष्य की जंग में छोटी-छोटी कंपनियां और युद्ध का सीधा अनुभव ही सबसे बड़ा हथियार बन सकता है. 

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