प्रद्युम्न मर्डर केस: पिंटो फैमिली की जमानत पर 11 दिसंबर को फैसला

प्रद्युम्न मर्डर केस में पिंटो फैमिली की जमानत रद्द करने संबंधी याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट 11 दिसंबर को इस पर फैसला सुनाएगा.

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बढ़ सकती हैं पिंटो फैमिली की मुश्किलें बढ़ सकती हैं पिंटो फैमिली की मुश्किलें

मुकेश कुमार

  • नई दिल्ली,
  • 06 दिसंबर 2017,
  • अपडेटेड 1:07 PM IST

प्रद्युम्न मर्डर केस में पिंटो फैमिली की जमानत रद्द करने संबंधी याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट 11 दिसंबर को इस पर फैसला सुनाएगा. मृतक प्रद्युम्न के पिता वरुण ठाकुर ने पंजाब और हरियाणा होईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. इस सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की है.

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर और डी वाई चंद्रचूड की पीठ ने वरुण चंद्र ठाकुर की याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित कर लिया. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने रेयान ग्रुप के मालिक ऑगस्टाई पिंटो, ग्रेसी पिंटो और रेयान पिंटो की अग्रिम जमानत याचिका को मंजूर कर लिया था.

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वरुण के वकील सुशील टेकरीवाल के मुताबिक, इस मर्डर केस की जांच अभी भी चल रही है. लिहाजा आरोपी अपने प्रभाव से जांच प्रभावित करने में सक्षम हैं. आरोपियों ने घटना स्थल के अलावा भी कई सबूत मिटाए हैं. आरोपियों की ओर से सबूतों से छेड़छाड़ और गवाहों पर दबाव की आशंका है. इसलिए इनको जेल में रहना चाहिए.

इससे पहले गुरुग्राम पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए बस कंडक्टर अशोक कुमार को कोर्ट से जमानत मिल गई थी. 76 दिनों तक हिरासत में रहने के बाद अशोक घर पहुंचा था. रिहाई के बाद अशोक कुमार ने कहा था, 'मैं भगवान का शुक्रगुजार हूं कि उसने मुझे न्याय दिया. हमें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है.'

बस कंडक्टर ने बताया था, 'मुझे हिरासत में टॉर्चर किया गया. बिजली के करंट के झटके दिए गए. पुलिस ने थर्ड डिग्री देकर जुर्म कबूल करने के लिए मजबूर किया. यहां तक की नशा भी दिया जाता था.' परिजनों ने कहा था, 'हमें शुरू से ही पता था कि वह निर्दोष हैं. उसने कभी अपने बच्चों पर हाथ नहीं उठाया.'

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हरियाणा सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय टीम ने अपनी जांच में रेयान स्कूल में भयंकर कमियां पाई थी. जांच रिपोर्ट के मुताबिक, रेयान इंटरनेशनल स्कूल के सीसीटीवी कैमरे खराब पाए गए थे. ड्राइवर और कंडक्टर छात्रों के टॉयलेट का ही इस्तेमाल किया करते थे. स्कूल की बाउंड्री वॉल टूटी हुई थी.

स्कूल में काम करने वाले कर्मचारियों का किसी भी तरह का कोई पुलिस वैरिफेकेशन नहीं हुआ था. बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी टीम भेजकर स्कूल में जांच कराई, जिसमें कई गड़बड़ियां सामने आई. सीबीएसई ने भी कहा था कि स्कूल ने अपनी जिम्मेदारी सही तरह से निभाई होती तो छात्र की हत्या नहीं होती.

बताते चलें कि रेयान स्कूल में पढ़ने वाले छात्र की गला रेतकर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. इस मामले में बस कंडक्टर अशोक समेत तीन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था. इसके बाद सीबीआई ने 11वीं के एक छात्र को गिरफ्तारी किया. फिर अब अशोक कुमार को जमानत मिल गई है.

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