मंदिर से पैसे चुराने के शक में दलित बच्चे को मिली ऐसी सजा, तपते टाइल्स पर नंगे बैठाया

आठ साल का बच्चा खडसे जोगना माता मंदिर परिसर में रोज खेलता था. वह शनिवार को भी मंदिर में खेल रहा था, तभी 32 वर्षीय अमोल डोरे ने बच्चे को दंड देने का फैसला किया. आरोपी अमोल डोरे बच्चे को पकड़कर मंदिर परिसर ले गया और उसकी पैंट उतरवाकर उसे गर्म टाइल्स पर बैठा दिया.

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प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

कमलेश सुतार

  • नई दिल्ली,
  • 18 जून 2019,
  • अपडेटेड 10:56 AM IST

महाराष्ट्र के वर्धा से एक नाबालिक दलित बच्चे के साथ अत्याचार का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. वर्धा में आठ साल के एक बच्चे को नंगा करके घंटों गर्म टाइल्स पर बैठाए रखा गया, जिससे उसके पीछे का पूरा शरीर झुलस गया. फिलहाल बच्चे को अरवी जनरल हॉस्पिटल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है. पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.

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पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित बच्चा जोगना माता मंदिर परिसर में रोज खेलता था. वह शनिवार को भी मंदिर में खेल रहा था, तभी 32 वर्षीय अमोल डोरे ने बच्चे को दंड देने का फैसला किया. आरोपी अमोल डोरे को शक था कि आर्यन मंदिर में चढ़ाए गए रुपये चोरी कर लेता था, यही सोचकर आरोपी ने बच्चे को पकड़कर मंदिर परिसर ले गया और उसकी पैंट उतरवाकर उसे गर्म टाइल्स पर बैठा दिया.

बच्चे ने बताया कि मैं पानी पीने गया तो उसने मेरे हाथ-पांव को बांधकर पीटना शुरू कर दिया, उसके बाद मुझे गर्म फर्श पर नंगे बैठा दिया. जब मैं जलने के बाद दर्द से तड़पने लगा तो उसने मुझे वहां से भगा दिया. आर्यन अपने घर पहुंचा तो रात में दर्द सहन न हो पाने पर उसने अपने पिता को बताया. उसके बाद पिता ने थाने में अमोल डोरे के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई.

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पुलिस ने बताया कि अमोल के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है. पीड़ित दलित है, ऐसे में पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं बच्चे को दलित होने के कारण मंदिर जाने पर सजा तो नहीं दी गई. फिलहाल अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है.

महिला और बाल कल्याण मंत्री पंकजा मुंडे ने कहा कि राज्य सरकार ने घटना को गंभीरता से लिया है और कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं ही समाज में वास्तविकता को सामने लाती हैं. उन्होंने कहा कि सरकार ने कार्रवाई की है, लेकिन इसे लेकर अभी भी हमें आत्मनिरीक्षण करने की जरूरत है. गौरतलब है कि यह घटना वर्धा में हुई थी, जो बापू महात्मा गांधी के आश्रम के कारण प्रसिद्ध है.

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