मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में 25 को आरोप तय करेगा कोर्ट

साकेत कोर्ट सभी आरोपियों पर अगली सुनवाई में आरोप तय करेगा. कोर्ट ने आरोप तय करने के लिए 25 मार्च की तारीख तय की है.

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मुजफ्फरपुर शेल्टर होम (File Photo:aajtak) मुजफ्फरपुर शेल्टर होम (File Photo:aajtak)

पूनम शर्मा

  • पटना,
  • 18 मार्च 2019,
  • अपडेटेड 7:00 PM IST

बिहार के चर्चित मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में दिल्ली का साकेत कोर्ट सभी आरोपियों पर अगली सुनवाई में आरोप तय करेगा. कोर्ट ने आरोप तय करने के लिए 25 मार्च की तारीख तय की है. सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कहा कि मामला काफी गंभीर है.

सीबीआई ने कहा कि कई पीड़ित लड़कियों के बयान हमने दर्ज किए हैं लेकिन कुछ लड़कियों ने डर के कारण बयान नहीं दर्ज करवाया. मामले की सुनवाई के दौरान साकेत कोर्ट ने सीबीआई से कहा कि सभी पीड़ितों द्वारा लगाए आरोपों की रिपोर्ट भी सीबीआई पेश करे. सीबीआई को इस रिपोर्ट में बताना होगा कि मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कितनी लड़कियों के साथ यौन शोषण की पुष्टि हुई है.

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कोर्ट ने कहा कि कई लड़कियों ने कहा तो है कि हमारे साथ गलत हुआ है लेकिन उन्होंने किसी पर सीधा आरोप नहीं लगाया है. सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि इसका कारण है कि ज्यादातर लडकियां डरी हुई थीं. कोर्ट में इस बात को लेकर भी बहस हुई कि लड़कियों ने जो बयान दर्ज कराया है उनमें उनके साथ आख़िर किया क्या गया.

सीबीआई ने कहा कि ज्यादातर लड़कियों के साथ यौन शोषण उनको ड्रग्स देने के बाद किया गया. इसलिए जज ने कहा कि जब बिहार से इस मामले का ट्रायल दिल्ली ट्रांसफर किया गया है तो सभी लड़कियों को कोर्ट में लाकर उनका बयान दर्ज कराना बेहद जरूरी है.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कर दिया गया कि 12 से 14 साल की उम्र की पीड़ित लड़कियों के साथ जो कुछ भी मुजफ्फरपूर शेल्टर होम में हुआ है, उसमें प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन फ्राम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट (पोस्को) एक्ट के तहत आरोप तय करके ट्रायल चलाया जाएगा. जबकि 16 साल से ऊपर की पीड़ित लड़कियों के मामले में धारा 354 के तहत आरोप तय करके मामला चलाया जाएगा.

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इस मामले में कोर्ट की तरफ से नियुक्त किए गए वकील ने कहा सभी लड़कियों को फ्लाइट से दिल्ली लाने की जरूरत है, जिससे उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके. हालांकि इस मामले में बिहार सरकार इन लड़कियों के कोर्ट में होने वाले बयान को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दर्ज कराना चाहती थी. जज ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा, ऐसे में लड़कियों के दर्ज होने वाले बयान बिना किसी दबाव के कितनी सच्चाई से दिए जाएंगे इसमें उन्हें संदेह है. इसलिए उन्हें दिल्ली में लाकर बयान दर्ज कराना ही बेहतर होगा. कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि बिहार से पीड़ित लड़कियों को दिल्ली लाए जाने के दौरान, इस खबर को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा.

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