फिर 40 दिन के लिए जेल से बाहर आया रेप-मर्डर का दोषी राम रहीम, बार-बार कैसे मिल रही रिहाई?

रेप और मर्डर के दोषी बाबा राम रहीम एक बार फिर 40 दिन की पैरोल पर जेल से बाहर आ गया है. पिछले 8 सालों में वो 375 दिन जेल से बाहर रह चुका है. यानी करीब एक साल से भी ज्यादा वक्त वो आजाद घूमता रहा. जानिए कैसे पैरोल और फरलो के नाम पर कानून का मज़ाक बना रहा है ये 'खास' कैदी.

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राम रहीम ने अपनी सजा को मजाक बनाकर रख दिया है (फोटो-ITG) राम रहीम ने अपनी सजा को मजाक बनाकर रख दिया है (फोटो-ITG)

aajtak.in

  • चंडीगढ़,
  • 06 अगस्त 2025,
  • अपडेटेड 9:01 AM IST

Rape Murder Guilty Gurmeet Ram Rahim Singh Parole: रेप और मर्डर के दोषी बाबा राम रहीम एक बार फिर जेल से बाहर आ गया है. इस बार उसे 40 दिनों की पैरोल मिली है. अब आप पूछेंगे भला इसमें नया क्या है? पैरोल पर तो वो अक्सर यूं ही जेल से बाहर आता-जाता रहता है. लेकिन जिस तरह से बाबा बार-बार पैरोल और फरलो पर रह-रह कर बाहर आता जा रहा है, वो अपने-आप में एक अनोखा और अनब्रेकेबेल रिकॉर्ड तो बनाता ही जा रहा है. एक ऐसा रिकॉर्ड, जो हर रिहाई के साथ कुछ इतना मजबूत हो रहा है कि आने वाले वक्त में शायद ही हरियाणा का कोई बड़े से बड़ा कैदी उस रिकॉर्ड की बराबरी कर पाए.

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पिछले तीन महीनों में ये दूसरा मौका है, जब राम रहीम फिर से पैरोल पर बाहर आ गया है. इससे पहले वो इसी साल यानी 9 अप्रैल 2025 को डेरा सच्चा सौदा के स्थापना दिवस के मौके पर 21 दिनों के लिए बाहर निकला था. अप्रैल खत्म होते-होते वो रोहतक की सुनारिया जेल में वापस चला गया और कमाल देखिए कि अगस्त शुरू होते-होते वो फिर से जेल से बाहर आ गया. सच में इतनी जल्दी-जल्दी तो लोगों को अपनी-अपनी नौकरियों से भी छुट्टी नहीं मिलती है, जितनी जल्दी-जल्दी राम रहीम पैरोल ले लेता है.

अब आइए एक-एक कर बाबा के पैरोल लेने की इस पूरी एनोटॉमी को सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं, जिसे जान कर आपकी आंखें खुल जाएंगी और आप ये सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि आखिर कैसे ताकतवर और प्रभावशाली लोग तमाम दावों और वादों के बावजूद कानून को अपनी जेब में रखने में कामयाब हो जाते हैं.

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राम रहीम को 25 अगस्त 2017 को पहली बार अपने ही आश्रम की दो साध्वियों के रेप के मामले में गुनहगार करार दिया गया था और यही वो दिन था, जब वो पहली बार जेल गया. तब उसे 10-10 साल की सजा हुई थी. इसके दो साल बाद 11 जनवरी 2019 को वो पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के इल्जाम में दोषी पाया गया. और उसे आजीवन कारावास की सजा हुई. अगर उसके जेल जाने के पहले दिन यानी 25 अगस्त 2017 से आज के दिन 5 अगस्त 2025 तक का हिसाब लगाया जाए, तो उसने करीब 8 साल यानी 2,902 दिनों की सजा काटी है. मगर कमाल ये है कि पैरोल और फरलो की छुट्टियों की बदौलत इन 8 सालों में से वो करीब 1 साल से भी ज्यादा वक्त जेल से बाहर खुली हवा में मौज काट चुका है.

उसे जेल गए कुल 2902 दिन हुए हैं, जबकि अगर इस बार मिले पैरोल के 40 दिनों को जोड़ लिया जाए, तो उसे जेल से बाहर रहे हुए 375 दिन हो जाएंगे. इस हिसाब से देखा जाए तो इन 8 सालों में 1 साल से भी ज्यादा वक्त तक तो वो बाहर ही रहा है. वैसे ऐसा नहीं है कि राम-रहीम पहले भी पैरोल के ऐसे ही मजे लूट रहा था. जेल जाने के बाद करीब 5 सालों तक तो उसे भी दूसरे कैदियों की तरह ही इक्का-दुक्का ही पैरोल मिलती रही, लेकिन साल 2022 में हरियाणा सरकार ने 'हरियाणा गुड कंडक्ट टेंपोररी प्रिज़नर्स एक्ट' में अमेंडमेंट यानी सुधार क्या किया, राम रहीम की तो मानों लॉटरी ही खुल ही खुल गई.

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सबसे पहले जानिए कि राम रहीम को साल 2017 में जेल जाने के बाद से साल 2021 तक कानून में तब्दीली होने तक कब-कब और कितने-कितने दिनों की पैरोल मिली? फिर आपको बताएंगे कि कानून बदलने के बाद कैसे राम रहीम के लिए पैरोल की बाढ़ सी आ गई? 

  • 20 अक्टूबर 2020 - मां से मिलने के लिए एक दिन की पैरोल 
  • 12 मई 2021 - बीपी चेक कराने के लिए एक दिन की पैरोल 
  • 17 मई 2021 - मां से दोबारा मिलने के लिए एक दिन की पैरोल 
  • 3 जून 2021 - पेट दर्द उठा, तो सात दिन की पैरोल 
  • 13 जुलाई 2021 - एम्स में दिखाने के लिए पैरोल

जबकि साल 2022 में हरियाणा सरकार ने अपने पैरोल संबंधी कानून में बदलाव कर दिया. इसके बाद राम-रहीम की तो मानों निकल पड़ी. वो हर साल बिना नागा किस्तों में पूरे 91 दिनों की पैरोल और फरलो के मजे लेने लगा. इस सिलसिले की शुरुआत 7 फरवरी 2022 से हुई.

  • 7 फरवरी 2022 - 21 दिन की फरलो 
  • 17 जून 2022 - 30 दिन की पैरोल 
  • अक्टूबर 2022 - 40 दिन की पैरोल 
  • 21 जनवरी 2023- 40 दिन की पैरोल 
  • 20 जुलाई 2023 - 30 दिन की पैरोल 
  • 20 नवंबर 2023 - 21 दिन की पैरोल 
  • 19 जनवरी 2024 - पूरे 50 दिन की पैरोल 
  • 13 अगस्त 2024 - 21 दिन की फरलो 
  • 1 अक्टूबर 2024 - 20 दिन की फरलो 
  • 28 जनवरी 2025- 30 दिन की पैरोल 
  • 9 अप्रैल 2025- 21 दिन की फरलो 

और अब उसे 5 अगस्त 2025- को फिर से 40 दिनों की पैरोल मिली है.

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इन सारे दिनों का हिसाब लगा लिया जाए, तो हर साल वो विदाउट फेल 91-91 दिनों की पैरोल लेता जा रहा है. वो इसी देश में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 75 हजार 629 आजीवन कारावास के कैदियों में से ज्यादातर के लिए एक ख्वाब ही है. अकेले हरियाणा में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 2 हजार 824 कैदी हैं, लेकिन ज्यादातर के लिए इतना पैरोल और फरलो आज भी एक ख्वाब ही है. ये और बात है कि हरियाणा सरकार ने कोर्ट में ये बताया है कि कानून की तब्दीली का फायदा राम रहीम की तरह बाकी के कैदी भी उठा रहे हैं. वैसे खुद राम रहीम के पैरोल पर उसके वकील क्या कहते हैं, आपको वो भी सुनना चाहिए.

वैसे बिल्किस बानो केस को छोड़ दें, तो पैरोल पर बाहर रहने का बाबा राम रहीम का रिकॉर्ड की अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड माना जा सकता है. दिसंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट में बिल्किस बानो की ओर से दिए गए एक हलफमाने में ये बताया गया था कि उसके गुनहगार 11 लोगों में से 10 लोग सजा पाने के बाद 1 हजार दिनों का पैरोल और फरलो ले चुके हैं. इसके अलावा पैरोल और फरलो को लेकर जिन कैदियों की चर्चा होती रही, उनमें फिल्म स्टार संजय दत्त और कांग्रेस नेता विनोद शर्मा के बेटे मनु शर्मा का नाम शामिल है.

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देश की अलग अलग जेलों में बंद मौजूदा या पहले का कोई भी दूसरा ऐसा कैदी नहीं है, जिसे इतने कम वक्त में पैरोल और फरलो के नाम पर इतनी लंबी लंबी छुट्टियां दी गई हो. राम रहीम से पहले फिल्म स्टार संजय दत्त को भी फऱलो या पैरोल पर रिहाई को लेकर सवाल उठे थे. अपनी पूरी सजा के दौरान संजय दत्त फिर भी 160 दिन की ही पैरोल या फरलो की आजादी हासिल कर चुके थे. संजय दत्त की इस आजादी को लेकर जब मीडिया में शोर उठा तो बाद में पैरोल या फरलो के नाम पर उनकी आजादी पर ब्रेक लगा दी गई थी.

दिल्ली के चर्चित जेसिका लाल मर्डर केस के मुजरिम मनु शर्मा को भी अपने वक्त में पैरोल और फरलो पर बार-बार रिहाई देने को लेकर सवाल उठे थे. पैरोल पर रिहाई के दौरान एक बार मनु शर्मा को अपने दोस्तों के साथ एक नाइट क्लब में डांस करते पाया गया था. तब ये खबर मीडिया में काफी सुर्खियां बनी थी. इसके बाद से मनु शर्मा की रिहाई पर भी ब्रेक लगा दी गई थी. हालांकि बरसों जेल में रहने के बावजूद मनु शर्मा भी राम रहीम के 7, 8 सालों का भी रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाए. क्योंकि राम रहीम ने 7, 8 सालों में ही पैरोल और फरलो पर इतनी आजादी हासिल कर ली जो मनु शर्मा के हिस्से में आई ही नहीं.

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अब जाहिर है, जब शख्सियत देख कर पैरोल और फरलो का इस तरह मजाक बनेगा तो लोग सवाल तो पूछेंगे ही. लिहाजा, लोग राम रहीम को पैरोल देने के हरियाणा सरकार के फैसले पर भी सवाल उठाने लगे हैं. एक तरफ जेल में बेशुमार कैदी अपनी सजा पूरी होने के बावजूद बाहर नहीं निकल पा रहे हैं. दूसरी तरफ सरकार बार-बार राम रहीम को पैरोल देती जा रही है. सवाल यही है कि अगर सरकार को इससे कोई फायदा नहीं है तो राम रहीम पर इतनी मेहरबानी क्यों? हालांकि हरियाणा सरकार ने इसे एक रुटीन अफेयर करार दिया है. सरकार का कहना है कि पैरोल हर मुजरिम का हक है और राम रहीम भी दूसरे मुजरिमों से अलग नहीं है.

(सिरसा से बलजीत सिंह के साथ चंडीगढ़ से अमन भारद्वाज का इनपुट)

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