वो कानूनी लूपहोल जिसकी वजह से जेल के बाहर आई सोनम, राजा रघुवंशी मर्डर केस में पुलिस ने किया बड़ा खेल!

राजा रघुवंशी मर्डर केस में आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत मिलने के पीछे मेघालय पुलिस की एक बड़ी कानूनी गलती सामने आई है. इस मामले में BNS की गैरमौजूद धारा 403 का जिक्र कोर्ट के सामने आया. और यही अंजान धारा सोनम की रिहाई की वजह बन गई. पढ़ें इनसाइड स्टोरी.

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सोनम की आजादी के पीछे पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है (फोटो-ITG) सोनम की आजादी के पीछे पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है (फोटो-ITG)

aajtak.in

  • शिलांग,
  • 01 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:15 PM IST

पिछले एक हफ्ते से सभी की निगाहें पुणे के केतन अग्रवाल मर्डर केस और आरोपी सिया पर टिकी थी. सिया और उसकी खाई वाली कहानी में सभी डूबे थे. इसी बीच बड़ी ख़ामोशी से मेघालय से एक ख़बर आई और किसी का ध्यान भी उस तरफ नहीं गया. असल में ये ख़बर इंदौर की उस सोनम की थी, जिसकी कहानी असल में हूबहू पुणे की सिया ने दोहराई थी. सिया तो अभी पुणे पुलिस की कस्टडी में है लेकिन उधर सोनम ज़मानती ज़िंदगी पर आज़ाद है. 

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मर्डर जैसे संगीन जुर्म में 11 महीने के अंदर अंदर कोई आरोपी क़ातिल ज़मानत पर रिहा हो जाए अमूमन ऐसी मिसाले कम ही मिलती हैं. फिर सोनम ने तो जो किया उसके बाद इतनी आसानी से और इतनी जल्दी वो ज़मान पर बाहर आ जाए लोग यक़ीन ही नहीं कर पा रहे. कमाल ये कि ऐसा भी नहीं है कि कोर्ट सोनम को बेकसूर मानती है. मग़र फिर भी कोर्ट ने सोनम को ज़मानत पर क्यों रिहा कर दिया, तो इसका जवाब जब आप जानेंगे तो हैरान रह जाएंगे.

शायद.. जी हां शायद ये देश का पहला ऐसा मामला होगा, जिसमें क़ानून की एक ग़लत धारा और मेघालय पुलिस की एक मामूली सी चूक ने सोनम को जेल से बाहर निकाल दिया. दरअसल, मेघालय पुलिस ने सोनम की गिरफ़्तारी के बाद क़त्ल से जुड़े मामले में नए-नए जन्मे भारतीय न्यायिक संहिता यानि बीएनएस की जो धारा लगाई थी वो क़ानून की किताब में तो छोड़िए किसी अदालत या पुलिस स्टेशन के पन्नों में भी दर्ज नहीं है. 

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मतलब मेघालय पुलिस ने राजा रघुवंशी के क़त्ल के मामले में सोनम पर जो धारा लगाई उस धारा का कोई वजूद ही नहीं है. अब जब वो धारा ही नहीं है तो अदालत को कैसे पता चलेगा कि पुलिस ने सोनम को किस जुर्म में पकड़ा है. और जब पुलिस को ही पता नहीं तो पुलिस सोनम को कैसे बताएगी कि उसे किस जुर्म में गिरफ्तार किया गया. ये लाइनें हमारी नहीं है. ये मेघालय हाईकोर्ट ने कहा है सोनम को ज़मानत देते हुए. अगर अब भी आप पूरी कहानी नहीं समझ पाए तो चलिए आसान लफ़्ज़ों में समझाते हैं.

पिछले साल मई में राजा रघुवंशी के क़त्ल के बाद मेघालय पुलिस ने सोनम समेत कुल 5 लोगों को गिरफ़्तार किया था. इनमें तीन किराए के क़ातिल थे और एक सोनम का प्रेमी. बाद में मेघालय पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की और सोनम को अपने ही पति के क़त्ल के इल्ज़ाम में आरोपी नंबर 1 बनाया गया. चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत में मुक़दमा शुरु हो गया. मुक़दमा शुरु होते ही सोनम ने शिलांग की निचली अदालत में ज़मानत की अर्ज़ी लगा दी. यहीं से खेल शुरु हुआ.

असल में 1 जुलाई 2024 से देश में अंग्रेज़ों के ज़माने से चले आ रहे सीआरपीसी और आईपीसी में बड़े बदलाव करते हुए ना सिर्फ इनके नाम बदल दिए गए बल्कि बहुत सी धाराएं या तो हटा दी गई या फिर कई धाराओं को एक साथ जोड़ दी गईं. अब आईपीसी यानि इंडियन पीनल कोड या भारतीय दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता यानि बीएनएस का जन्म हो चुका था. इस बीएनएस के तहत देश में होने वाले तमाम जुर्मों को 358 धाराओं में लपेट दिया गया.

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बीएनएस के तहत देश में होने वाले हर तरह के जुर्म के लिए कुल 358 धाराएं ही हैं. अब ज़ाहिर है आज़ादी के बाद से चली आ रही आईपीसी की धाराओं की जगह जब बीएनएस और उसकी नई धाराएं आईं तो आम लोगों को छोड़िए ख़ुद पुलिस और क़ानून के रखवालों को इसे समझने और याद करने में मुश्किलें आने लगीं. मसलन पहले लोगों की ज़ुबान पर रटा हुआ था कि आईपीसी की धारा 300 यानि केस मर्डर का है और धारा 302 यानि कितनी सज़ा मिलेगी. बीएनएस में धारा 300 की जगह 101 हो गया है. 101 मतलब केस मर्डर का है। जबकि बीएनएस में 302 की जगह 103 नई धारा बनी है. 103 ये बताती है कि मर्डर के लिए क्या सज़ा मिलेगी.

सोनम के केस में ग़लती ये हुई की मेघालय पुलिस ने बीएनएस की धारा 103 यानि मर्डर के केस की जगह 403 लिख दिया. अब चूंकि बीएनएस की धारा 358 पर आकर ख़त्म हो जाती हैं तो ज़ाहिर है क़ानून की किताब में 403 नंबर की धारा हो ही नहीं सकती. बस इसी एक ग़लती को शिलांग की निचली अदालत ने पकड़ लिया. कोर्ट का कहना था कि जब धारा 403 है ही नहीं तो उन्हें कैसे पता चलेगा कि सोनम को किस जुर्म में पकड़ा गया है. यानि इस हिसाब से सोनम का भी उसका जुर्म पुलिस ने नहीं बताया होगा. इसीलिए निचली अदालत ने इसी साल 27 अप्रैल को सोनम को ज़मान पर रिहा कर दिया.

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ज़ाहिर है सोनम को ज़मानत मिल जाना हर किसी के लिए हैरान करने वाला था. मेघालय पुलिस भी हैरान थी. इसी के बाद मेघालय पुलिस ने सोनम को ज़मानत देने के निचली अदालत के फैसले को मेघालय हाईकोर्ट में चुनौती दी. मेघालय हाईकोर्ट में इसपर लंबी बहस हुई. उम्मीद यही थी कि हाईकोर्ट निचली अदालत के फ़ैसले को पलटते हुए सोनम की ज़मानत ख़ारिज कर देगी. लेकिन मेघालय हाई कोर्ट ने भी चौंका दिया.

दरअसल मेघालय हाईकोर्ट ने भी सोनम के केस में बीएनएस की वही 403 वाली धारा पकड़ ली जो कहीं क़ानूम में है ही नहीं. हाईकोर्ट का कहना था कि बीएनएस की धारा 403 जो वजूद में ही नहीं है उससे कैसे पता चलेगा कि सोनम पर आरोप क्या हैं. हाईकोर्ट का ये भी कहना था कि ग़लत धारा लगाने से ये भी पता चलता है कि ख़ुद सोनम को भी पता नहीं होगा या पुलिस ने उसे बताया ही नहीं होगा कि उसे किस जुर्म में पकड़ा गया है. 

इसीलिए निचली अदालत का फ़ैसला सही है और सोनम ज़मानत की हक़दार. मेघायल हाई कोर्ट ने 29 जून को इसी बिनाह पर मेघालय पुलिस कि उस अर्जी को खा़रिज कर दिया जिसमें सोनम की ज़मानत ख़ारिज करने की गुज़ारिश की गई थी. अब सोचिए क़ानून की एक छोटी से ग़लती ने सोनम को वो आज़ादी दिला दी जो आने वाले कई बरसों तक शायद ही उसके हिस्से आने वाली थी. सोनम ज़मानत पर बाहर आने के बाद से ही शिलांग में रह रही है. सोनम को ज़मानत मिलने पर राजा रघुवंशी के मां-बाप भी हैरान हैं.

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हांलाकि मेघालय पुलिस ने ऐलान किया है कि अब वो हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी. मेघालय पुलिस का ये भी कहना है कि धारा लिखने के दौरान उनसे ग़लती ज़रूर हुई और बाद में उन्होंने कोर्ट के सामने अपनी इस ग़लती को माना भी था. मग़र इस एक ग़लती के लिए सोनम के ज़मानत पर बाहर आने को मेघालय पुलिस ग़लत मानती है.

(आजतक ब्यूरो)

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