'धुरंधर' फिल्म देखकर 12 साल के बच्चे ने लिखा था बम ब्लास्ट की धमकीभरा लेटर, दाऊद और लश्कर के नाम से मचा था हड़कंप

अहमदाबाद के एक स्पोर्ट्स क्लब को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले लेटर का राज खुल गया है. पुलिस और एजेंसियों की जांच में पता चला कि सूरत में रहने वाले एक व्यापारी के 12 वर्षीय बेटे ने फिल्म 'धुरंधर' देखने के बाद मजाक में यह नोट लिखा था. पढ़ें ये दिलचस्प कहानी.

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बरामद नोट में दाऊद और लश्कर का नाम भी लिखा था (फोटो-ITG) बरामद नोट में दाऊद और लश्कर का नाम भी लिखा था (फोटो-ITG)

ब्रिजेश दोशी

  • अहमदाबाद,
  • 10 जून 2026,
  • अपडेटेड 6:13 PM IST

अहमदाबाद के सरदार पटेल स्टेडियम के पास मौजूद एक स्पोर्ट्स क्लब से बरामद बम धमाके की धमकी वाले नोट ने सनसनी फैला दी थी. उस नोट में दाऊद इब्राहिम और लश्कर-ए-तैयबा का नाम लिखकर क्लब को उड़ाने की धमकी दी गई थी. इस नोट के सामने आने के बाद पुलिस, बम निरोधक दस्ता और अन्य सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गई थीं. अब इस पूरे मामले का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है.

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अहमदाबाद की नारणपुरा पुलिस ने लंबी जांच के बाद पता लगाया कि यह कोई आतंकी साजिश नहीं थी. जांच में सामने आया कि धमकी भरा नोट सूरत के एक कपड़ा व्यापारी के 12 वर्षीय बेटे ने लिखा था. बच्चे ने यह पत्र मजाक में लिखा था, लेकिन इसके चलते सुरक्षा एजेंसियों को कई दिनों तक जांच करनी पड़ी. पुलिस ने तकनीकी और फॉरेंसिक जांच के आधार पर पूरे मामले का खुलासा किया.

पुलिस जांच में पता चला कि एक बड़े व्यापारी परिवार स्पोर्ट्स क्लब के एक कमरे में ठहरा हुआ था. इसी दौरान 12 वर्षीय बच्चे ने हाल ही में देखी फिल्म 'धुरंधर' से प्रभावित होकर अंग्रेजी में पेंसिल से एक धमकी भरा नोट लिख दिया. उसने नोट में दाऊद और लश्कर-ए-तैयबा का नाम इस्तेमाल करते हुए 21 जून को धमाके की चेतावनी लिखी थी. बच्चे ने इसे केवल मजाक समझकर लिखा था.

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नोट लिखने के बाद बच्चे ने उसे कमरे के डिजिटल लॉकर में रख दिया था. बाद में लॉकर बंद हो गया और वह नोट उसके अंदर ही रह गया. बच्चे को लॉकर का कोड याद नहीं रहा, इसलिए वह उसे दोबारा नहीं खोल सका. इस कारण नोट वहीं पड़ा रहा और किसी को इसकी जानकारी नहीं हुई. बच्चे के माता-पिता भी इस बात से पूरी तरह अनजान थे.

जब कमरे के मेहमान चेक-आउट कर चुके थे और सफाईकर्मी कमरे की सफाई कर रहे थे, तब उन्हें लॉकर के अंदर यह धमकी भरा नोट मिला. नोट मिलते ही क्लब प्रबंधन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी. पत्र में आतंकी संगठन और धमाके की बात लिखी होने के कारण पूरे इलाके में दहशत फैल गई थी. सुरक्षा एजेंसियों ने इसे गंभीर खतरे के रूप में लिया था.

धमकी की सूचना मिलते ही बम स्क्वाड, बीडीडीएस, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और डॉग स्क्वाड की टीम स्पोर्ट्स क्लब पहुंच गई थी. कई घंटों तक पूरे परिसर की गहन तलाशी ली गई. क्लब के कमरों, लॉकरों और आसपास के क्षेत्रों की जांच की गई. करीब दो घंटे तक चली जांच में किसी प्रकार का विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु नहीं मिली.

जिस कमरे से धमकी भरा नोट मिला था, वह पलक डॉक्टर के नाम पर बुक कराया गया था. उनके परिवार के कारोबारी संबंधों के चलते तीन तंजानियाई नागरिक वहां ठहरे हुए थे. उन्हें कमरा नंबर 117, 118 और 119 आवंटित किए गए थे. इनमें कपुफी डोनट्स डेविड नामक कारोबारी कमरा नंबर 119 में रुके थे. नोट मिलने के बाद शुरुआती जांच में इन विदेशी मेहमानों पर भी शक किया गया.

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पुलिस को पता चला कि तंजानियाई कारोबारी 29 मई को क्लब में आए थे और 30 मई को चेक-आउट कर चुके थे. इसके बाद वे अपने व्यापारिक कार्यों के लिए दिल्ली और चंडीगढ़ चले गए थे. धमकी वाला पत्र मिलने के समय वे भारत में ही मौजूद थे. इसलिए पुलिस ने उनसे जुड़ी सभी जानकारियों की भी गहराई से जांच की.

मामले को सुलझाने के लिए पुलिस ने स्पोर्ट्स क्लब के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. पत्र में इस्तेमाल की गई अंग्रेजी कर्सिव राइटिंग का भी विश्लेषण किया गया. शुरुआती तौर पर लगा कि नोट किसी ऐसे व्यक्ति ने लिखा है जिसे अंग्रेजी लिखने का अच्छा ज्ञान है. हालांकि पूछताछ और फुटेज से कोई ठोस सुराग नहीं मिला, जिससे जांच और जटिल हो गई.

जब पारंपरिक जांच से सफलता नहीं मिली तो पुलिस ने डिजिटल लॉकर बनाने वाली कंपनी के तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली. लॉकर के ओपन और क्लोज लॉग की जांच की गई. रिकॉर्ड से पता चला कि 24 मई 2026 को लॉकर करीब 10 से 12 बार खोला और बंद किया गया था. इसके बाद लॉकर दोबारा कभी इस्तेमाल नहीं हुआ. यही जानकारी जांच में निर्णायक साबित हुई.

डिजिटल लॉग मिलने के बाद पुलिस ने पता लगाया कि 24 मई को उस कमरे में कौन ठहरा हुआ था. जांच के दौरान सूरत के एक कारोबारी परिवार तक पुलिस पहुंची. यह परिवार क्लब में अपने रिश्तेदार की सिफारिश पर ठहरा था. परिवार से पूछताछ के दौरान पूरे घटनाक्रम की परतें खुलनी शुरू हुईं और पुलिस को असली तथ्य पता चल गया.

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पूछताछ के दौरान 12 वर्षीय बच्चे ने स्वीकार किया कि उसने फिल्म 'धुरंधर' देखने के बाद मजाक में यह नोट लिखा था. उसने बताया कि नोट लिखने के बाद लॉकर बंद हो गया और कोड भूल जाने की वजह से वह उसे निकाल नहीं पाया था. बच्चे के माता-पिता ने भी कहा कि उन्हें इस हरकत की कोई जानकारी नहीं थी. पुलिस ने फिलहाल पूरे मामले को एक शरारत माना है, हालांकि मामले से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि के लिए आगे भी जांच जारी है.

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