राउरकेला में 19 साल की युवती के नक्सली सरेंडर पर विवाद, परिवार बोला- साजिश या सिस्टम का खेल?

राउरकेला में 19 साल की युवती के नक्सली सरेंडर को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. परिवार ने इसे साजिश करार दिया है, जबकि पुलिस अपने दावों पर कायम है. क्या है ये पूरा मामला, जानने के लिए पढ़ें ये कहानी.

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इस मामले को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है (फोटो-ITG) इस मामले को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है (फोटो-ITG)

सत्यजीत कुमार

  • रांची,
  • 02 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:14 PM IST

ओडिशा के राउरकेला में 19 साल की एक युवती के कथित नक्सली सरेंडर ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. मंगरी होंहागा उर्फ मुगड़ी होंहागा के मामले ने अब पुलिस कार्रवाई से आगे बढ़कर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. यह मामला सिर्फ एक ऑपरेशन तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि इसमें एक बेटी की इज्जत, पुलिस की कार्यप्रणाली और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं. जहां पुलिस उसे नक्सली गतिविधियों में शामिल बता रही है, वहीं परिवार इसे एक सोची-समझी साजिश करार दे रहा है. इस पूरे घटनाक्रम ने इलाके में हलचल मचा दी है.

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मंगरी के पिता मंगल होंहागा, जो छोटानागरा थाना क्षेत्र के लेपटापी गांव के निवासी हैं, का आरोप है कि उनकी बेटी को फरवरी महीने में गांव के ही एक युवक ने नौकरी का झांसा देकर घर से बाहर ले गया था. इसके बाद से परिवार का उससे कोई संपर्क नहीं हो पाया. अचानक अब खबर आई कि वही बेटी नक्सली के रूप में पुलिस के सामने सरेंडर कर चुकी है. इस घटनाक्रम ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है और वे इसे पूरी तरह से एक साजिश बता रहे हैं.

पुलिस का दावा है कि मंगरी जनवरी 2026 में कुमडी इलाके में हुए एक मुठभेड़ में शामिल थी और केबलांग थाना क्षेत्र के बैंको में हुए विस्फोटक लूट कांड में भी उसकी भूमिका रही है. हालांकि इन दावों की पारदर्शिता और सच्चाई पर सवाल उठने लगे हैं. परिवार का कहना है कि जिस समय मुठभेड़ की बात कही जा रही है, उस समय मंगरी अपनी बड़ी बहन के घर मरांगपोंगा में रह रही थी. अगर यह दावा सही है, तो पुलिस की कहानी में बड़ा विरोधाभास सामने आता है.

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परिवार का आरोप है कि उनकी बेटी को झूठे मामले में फंसाकर उसकी पहचान को बदनाम किया गया है और उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाई गई है. इस मामले में अब सिर्फ एक आरोप-प्रत्यारोप नहीं बल्कि एक युवती के भविष्य और उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा का सवाल जुड़ गया है. साथ ही यह भी सवाल उठता है कि क्या बिना निष्पक्ष जांच के किसी को नक्सली घोषित करना उचित है? और क्या इस मामले में मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ है?

मंगरी उर्फ मुगड़ी का परिवार

इस पूरे मामले ने प्रशासन और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. परिवार ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए. साथ ही उन्होंने अपनी बेटी की सुरक्षित वापसी की अपील की है और उसे बहला-फुसलाकर ले जाने वाले युवक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. यह मामला अब बेहद संवेदनशील हो चुका है और सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं.

दूसरी ओर, राउरकेला के एसपी नितेश वाधवानी ने पुलिस की कार्रवाई का बचाव किया है. उनका कहना है कि मुगड़ी ने डर के कारण अपने परिवार को अपनी नक्सली पहचान के बारे में नहीं बताया होगा. पुलिस ने पुख्ता जानकारी और जांच के आधार पर ही उसका सरेंडर सुनिश्चित किया है. उन्होंने यह भी कहा कि ओडिशा की बेहतर सरेंडर नीति के चलते झारखंड के नक्सली भी अब सरेंडर के लिए आगे आ रहे हैं.

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फिलहाल, यह मामला सच और दावों के बीच उलझा हुआ है. एक तरफ पुलिस अपनी जांच और कार्रवाई को सही बता रही है, तो दूसरी तरफ परिवार इसे साजिश करार दे रहा है. ऐसे में जरूरी है कि निष्पक्ष जांच के जरिए सच्चाई सामने आए, ताकि न केवल एक बेटी की इज्जत बहाल हो सके, बल्कि पुलिस व्यवस्था पर जनता का भरोसा भी कायम रह सके. यह मामला आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है.

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