इकबाल मिर्ची नेटवर्क के खिलाफ ED का बड़ा एक्शन, 700 करोड़ की संपत्ति अटैच

मुंबई में ED ने अंडरवर्ल्ड डॉन इकबाल मिर्ची और उसके परिवार से जुड़ी भारत और दुबई की करीब 700 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की हैं. कार्रवाई फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट और PMLA के तहत की गई. पढ़ें पूरी कहानी.

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ये केस मुंबई पुलिस की FIR के आधार पर शुरू हुआ था (फोटो-ITG) ये केस मुंबई पुलिस की FIR के आधार पर शुरू हुआ था (फोटो-ITG)

मुनीष पांडे

  • मुंबई,
  • 18 मई 2026,
  • अपडेटेड 7:18 PM IST

मुंबई में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अंडरवर्ल्ड से जुड़े दिवंगत इकबाल मिर्ची और उसके परिवार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. ED ने फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट (FEOA) 2018 के तहत करीब 700.27 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच की हैं. एजेंसी के मुताबिक ये संपत्ति मनी लॉन्ड्रिंग और अपराध से अर्जित पैसों से खरीदी गई थीं. इस कार्रवाई को मिर्ची नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कानूनी कार्रवाई माना जा रहा है.

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ED के अनुसार अटैच की गई संपत्तियों में मुंबई के वर्ली इलाके की तीन बेहद कीमती प्रॉपर्टी शामिल हैं. इनमें राबिया मेंशन, मारियम लॉज और सी व्यू नाम की इमारतें शामिल हैं. इन तीनों संपत्तियों की कुल कीमत लगभग 497 करोड़ रुपये बताई गई है. इसके अलावा दुबई में मौजूद करीब 203.27 करोड़ रुपये की विदेशी संपत्ति भी अटैच की गई हैं.

जांच एजेंसी ने बताया कि यह मामला मुंबई पुलिस की कई FIR के आधार पर शुरू हुआ था. इकबाल मोहम्मद मेमन उर्फ इकबाल मिर्ची के खिलाफ MRA मार्ग पुलिस स्टेशन, येलोगेट पुलिस स्टेशन, भायखला पुलिस स्टेशन, एंटी नारकोटिक्स सेल और DCB-CID में केस दर्ज थे. इन मामलों में IPC, आर्म्स एक्ट, TADA और NDPS एक्ट की धाराएं लगाई गई थीं. इन मामलों के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी.

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ED की जांच में दावा किया गया कि इकबाल मिर्ची संगठित अपराधों में शामिल था. एजेंसी के मुताबिक वह ड्रग तस्करी, वसूली और अवैध हथियारों के कारोबार से जुड़ा हुआ था. इन अपराधों से कमाए गए पैसों को भारत और विदेशों में संपत्तियां खरीदकर सफेद किया गया. जांच में यह भी सामने आया कि कई संपत्तियां परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के नाम पर खरीदी गई थीं.

जांच एजेंसी के अनुसार वर्ली की जिन संपत्तियों को अटैच किया गया है, वे मूल रूप से सर मोहम्मद यूसुफ ट्रस्ट की थीं. दावा किया गया कि साल 1986 में इन्हेंमेसर्स रॉकसाइड एंटरप्राइजेज के जरिए मात्र 6.50 लाख रुपये में खरीदा गया था. हालांकि सरकारी रिकॉर्ड में मालिकाना हक ट्रस्ट के नाम पर बना रहा, लेकिन ED का कहना है कि इन संपत्तियों का असली नियंत्रण इकबाल मिर्ची और उसके परिवार के पास था.

ED ने यह भी आरोप लगाया कि ट्रस्ट ने इकबाल मिर्ची के साथ मिलकर अदालत में गलत जानकारी पेश की थी. एजेंसी का दावा है कि पहले की अटैचमेंट कार्रवाई से संपत्ति को छुड़ाने के लिए महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया गया. जांचकर्ताओं के मुताबिक इस साजिश के जरिए संपत्तियों पर कब्जा बनाए रखने की कोशिश की गई. अब ED इस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है.

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जांच में यह भी सामने आया कि अपराध से कमाए गए पैसों को विदेशों में संपत्तियां खरीदने में इस्तेमाल किया गया. दुबई में होटल मिडवेस्ट अपार्टमेंट और कॉर्पोरेट बे और डेक टावर्स में मौजूद 14 रियल एस्टेट यूनिट्स को जांच के दायरे में लिया गया है. ED का आरोप है कि ये संपत्ति आसिफ इकबाल मेमन और उसके परिवार के नाम पर खरीदी गई थीं. एजेंसी अब इन विदेशी संपत्ति के लेन-देन की भी जांच कर रही है.

ED ने बताया कि इस मामले में मुंबई की विशेष PMLA कोर्ट में पहले ही प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट और सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की जा चुकी है. इन मामलों में आसिफ इकबाल मेमन, जुनैद इकबाल मेमन, हाजरा इकबाल मेमन समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया है. उन पर मनी लॉन्ड्रिंग और अपराध की कमाई को छिपाने के आरोप लगाए गए हैं. कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जारी है.

इस केस में एक बड़ा मोड़ तब आया जब 26 फरवरी 2021 को मुंबई की विशेष PMLA कोर्ट ने आसिफ इकबाल मेमन, जुनैद इकबाल मेमन और हाजरा इकबाल मेमन को फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स घोषित कर दिया. यह आदेश फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट 2018 के तहत दिया गया था. इसके बाद ED को उनकी संपत्ति को जब्त करने और अटैच करने का अधिकार मिल गया.

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ED का कहना है कि यह कार्रवाई मिर्ची नेटवर्क से जुड़े अपराध की कमाई का पता लगाने और उसे जब्त करने की दिशा में बड़ा कदम है. एजेंसी अब देश और विदेश में मौजूद अन्य संपत्तियों की भी जांच कर रही है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं. ED की यह कार्रवाई संगठित अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ सरकार की सख्त नीति को भी दर्शाती है.

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