गुजरात में बड़ा खुलासा: बाबा सिद्दीकी हत्याकांड से जुड़ा म्यूल अकाउंट गैंग बेनकाब, 53.55 करोड़ की ठगी

गांधीनगर में साइबर सेंटर ऑफ एक्सलेंस की बड़ी कार्रवाई में ऑपरेशन म्यूल 2.0 के तहत 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. खास बात ये है कि मुंबई के चर्चित बाबा सिद्दीकी हत्याकांड से जुड़े म्यूल अकाउंट और करोड़ों की ठगी का खुलासा भी हुआ है. पढ़ें पूरी कहानी.

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पुलिस ने इस केस में 10 आरोपियों को पकड़ा है (फोटो-ITG) पुलिस ने इस केस में 10 आरोपियों को पकड़ा है (फोटो-ITG)

ब्रिजेश दोशी

  • गांधीनगर,
  • 06 मई 2026,
  • अपडेटेड 5:19 PM IST

गुजरात के गांधीनगर में एक बड़ा साइबर क्राइम नेटवर्क बेनकाब हुआ है, जिसका कनेक्शन हाई-प्रोफाइल बाबा सिद्दीकी हत्याकांड से भी जुड़ता नजर आ रहा है. साइबर सेंटर ऑफ एक्सलेंस ने ऑपरेशन म्यूल 2.0 के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. यह गिरोह न सिर्फ फर्जी खातों के जरिए ठगी करता था, बल्कि हत्या के आरोपियों को भी 'म्यूल अकाउंट' उपलब्ध कराता था. जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क ने 53.55 करोड़ रुपये की भारी भरकम धोखाधड़ी को अंजाम दिया. इस कार्रवाई को राज्य में बढ़ते साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है.

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साइबर सेंटर ऑफ एक्सलेंस के एसपी राजदीप सिंह झाला के नेतृत्व में चलाए गए अभियान ऑपरेशन म्यूल 2.0 के तहत यह कार्रवाई की गई. पुलिस ने आणंद में सक्रिय एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए उसके 10 सदस्यों को गिरफ्तार किया. इस ऑपरेशन के दौरान कुल 132 साइबर अपराध मामलों को सुलझाया गया, जो इस गिरोह की व्यापक गतिविधियों को दर्शाता है. पुलिस के अनुसार, यह गिरोह लंबे समय से डिजिटल ठगी के जरिए लोगों को निशाना बना रहा था. गिरोह के पास अत्याधुनिक तकनीकी नेटवर्क था, जिससे वे आसानी से लोगों को धोखा देते थे.

जांच में खुलासा हुआ कि इस गिरोह का नेटवर्क सिर्फ आणंद तक सीमित नहीं था, बल्कि अहमदाबाद समेत गुजरात के कई शहरों में फैला हुआ था. आरोपी अलग-अलग राज्यों के लोगों को निशाना बनाकर ठगी करते थे और पैसे को फर्जी खातों में जमा कर देते थे. इन खातों के जरिए कुल 53.55 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन किया गया, जो साइबर अपराध की बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है. पुलिस को शक है कि इस रकम का इस्तेमाल कई अन्य आपराधिक गतिविधियों में भी किया गया हो सकता है. अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है.

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इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा बाबा सिद्दीकी हत्याकांड से जुड़ा कनेक्शन है. गिरफ्तार आरोपियों में शामिल साहिल, शबीर, मिया मलिक ने इस हत्याकांड के आरोपियों को म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराया था. यह अकाउंट असल में ऐसा बैंक खाता होता है, जिसका इस्तेमाल अवैध लेन-देन के लिए किया जाता है. पुलिस के अनुसार, इस खाते के जरिए अपराधियों को पैसे ट्रांसफर करने और छुपाने में मदद मिली. इस खुलासे के बाद पुलिस ने इस एंगल से जांच और तेज कर दी है.

गिरोह का काम करने का तरीका बेहद तकनीकी और संगठित था. आरोपी डिजिटल पेमेंट सिस्टम, फर्जी बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल करते थे. खास तौर पर USDT (क्रिप्टोकरेंसी) के जरिए पैसों की हेराफेरी की जाती थी, जिससे ट्रांजेक्शन को ट्रेस करना मुश्किल हो जाता था. यही वजह थी कि इतने बड़े पैमाने पर ठगी के बावजूद लंबे समय तक यह गिरोह पकड़ में नहीं आया. पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े तकनीकी पहलुओं की भी जांच कर रही है.

गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका भी अलग-अलग थी, जिससे यह साफ होता है कि यह एक संगठित गैंग था. तीन मुख्य आरोपी ऐसे थे, जिनके नाम पर बैंक खाते खोले गए थे. वहीं तीन अन्य लोग इन खातों का प्रबंधन करते थे और लेन-देन को नियंत्रित करते थे. बाकी आरोपी क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पैसे को इधर-उधर करने और उसे साफ करने का काम संभालते थे. इस तरह पूरे गिरोह ने मिलकर 197 बैंक खातों का संचालन किया.

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पुलिस का कहना है कि इस गिरोह के खिलाफ मिली सफलता से राज्य में साइबर अपराध पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी. साथ ही, बाबा सिद्दीकी हत्याकांड से जुड़े इस कनेक्शन के बाद जांच एजेंसियां और भी सतर्क हो गई हैं. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क के तार और किन-किन राज्यों या अपराधों से जुड़े हुए हैं. आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है.

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