कोरोनाः रूस की Sputnik Light को भारत में ट्रायल की मंजूरी, एक ही डोज से बन जाएगा काम

कोरोना को मात देने का दावा करने वाली रूस की सिंगल डोज वैक्सीन Sputnik Light को भारत में ट्रायल करने की मंजूरी मिल गई है. ड्रग्स कंट्रोलर ने स्पुतनिक को भारत में फेज-3 ट्रायल करने की मंजूरी दे दी है.

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स्पूतनिक लाइट की एफिकेसी कहीं ज्यादा है. (फाइल फोटो-PTI) स्पूतनिक लाइट की एफिकेसी कहीं ज्यादा है. (फाइल फोटो-PTI)

स्नेहा मोरदानी

  • नई दिल्ली,
  • 15 सितंबर 2021,
  • अपडेटेड 3:26 PM IST
  • स्पुतनिक लाइट का भारत में होगा ट्रायल
  • ड्रग्स कंट्रोलर ने फेज-3 ट्रायल की मंजूरी दी

भारत को बहुत जल्द कोरोना की एक और वैक्सीन (Covid Vaccine) मिल सकती है. ड्रग्स कंट्रोलर ने रूस की स्पुतनिक लाइट (Sputnik Light) को भारत में ट्रायल करने की मंजूरी दे दी है. ये सिंगल डोज वैक्सीन है. यानी इसमें सिर्फ एक ही डोज देकर कोरोना के खिलाफ लड़ा जा सकेगा.

ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने स्पुतनिक लाइट को भारतीय आबादी पर फेज-3 ट्रायल करने की मंजूरी दे दी है. कोरोना पर बनी सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी (SEC) ने स्पुतनिक लाइट को ट्रायल की मंजूरी देने की सिफारिश की थी. 

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इससे पहले जुलाई में SEC ने रूस की सिंगल डोज वैक्सीन को भारत में इमरजेंसी यूज की मंजूरी देनी की भी सिफारिश की थी, लेकिन भारत में ट्रायल नहीं होने के वजह से सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) ने इसे खारिज कर दिया था.

कमेटी का कहना था स्पुतनिक लाइट में भी वही कंपोनेंट है, जो स्पुतनिक-वी में है. इसलिए भारतीय आबादी पर इसके प्रोटेक्शन और एंटीबॉडी का डेटा पहले से तैयार है.

ये भी पढ़ें-- कोविशील्ड v/s कोवैक्सीन v/s स्पुतनिकः कौन सी वैक्सीन कितनी असरदार, क्या हैं साइड इफेक्ट्स?

हैदराबाद स्थित डॉ. रेड्डी लैबोरेट्रीज (Dr. Reddy Laboratories) ने पिछले साल रूस की स्पुतनिक-वी वैक्सीन का भारत में ट्रायल के लिए रूसी डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (RDIF) के साथ साझेदारी की थी. SEC ने डॉ. रेड्डी से रूस में स्पुतनिक की सिंगल डोज वैक्सीन के ट्रायल का डेटा मांगा था, ताकि इसे भारत में भी मंजूरी दी जा सके. 

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हाल ही में Lancet की एक स्टडी में सामने आया था कि कोरोना के खिलाफ स्पुतनिक लाइट की एफिकेसी 78.6% से 83.7% के बीच है, जो डबल डोज वैक्सीन से भी कहीं ज्यादा है. ये स्टडी अर्जेंटिना 40 हजार से ज्यादा उम्रदराज लोगों पर की गई थी. स्टडी में ये भी सामने आया था कि स्पुतनिक लाइट वैक्सीन से अस्पताल में भर्ती होने का खतरा भी 82.1% से 87.6% तक कम हो जाता है.

वहीं, RDIF ने बुधवार को बताया कि बेलारूस में हुई स्टडी में स्पतुनिक-वी की एफिकेसी 97.2% साबित हुई है. कंपनी का दावा है कि बेलारूस में जनवरी से जुलाई के बीच 8.60 लाख लोगों को वैक्सीन दी गई थी, उसके आधार पर ये डेटा सामने आया है.

 

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