सीरम इंस्टीट्यूट का दावा, दिसंबर तक तैयार हो जाएगी 30 करोड़ कोरोना वैक्सीन की खुराक

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) के कार्यकारी निदेशक डॉक्टर सुरेश जाधव ने उन्होंने SII के सीईओ अदार पूनावाला के बयान का हवाला देते हुए कहा कि सीरम एक साल में 70 से 80 करोड़ वैक्सीन खुराक का उत्पादन कर सकता है.

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भारत में 3 कोरोना वैक्सीन एडवांस स्तर पर (सांकेतिक-पीटीआई) भारत में 3 कोरोना वैक्सीन एडवांस स्तर पर (सांकेतिक-पीटीआई)

पंकज खेळकर

  • पुणे,
  • 18 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 2:40 PM IST
  • मार्च 2021 तक वैक्सीन का फाइनल टेस्टः SII
  • 'एक साल में 70 से 80 करोड़ उत्पादन की क्षमता'
  • 'इंस्टीट्यूट 5 अलग-अलग उत्पादों पर काम कर रहा'

कोरोना संकट को देखते हुए दुनियाभर में कोरोना वैक्सीन को लेकर रिसर्च जोरों पर चल रहा है और अकेले भारत में 3 वैक्सीन एडवांस स्तर पर हैं. इस बीच सीरम इंस्टीट्यूट के कार्यकारी निदेशक डॉक्टर सुरेश जाधव ने दावा किया है कि भारत में दिसंबर के अंत तक 20 से 30 करोड़ वैक्सीन की खुराक तैयार हो जाएगी और मार्च 2021 तक वैक्सीन का फाइनल टेस्ट हो जाएगा.

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HEAL फाउंडेशन द्वारा आयोजित फार्मा एक्सीलेंस ई समिट 2020 को संबोधित करते हुए सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) के कार्यकारी निदेशक डॉक्टर सुरेश जाधव ने SII के सीईओ अदार पूनावाला के बयान का हवाला देते हुए कहा कि सीरम एक साल में 70 से 80 करोड़ वैक्सीन खुराक का उत्पादन कर सकता है.

उन्होंने कहा कि सीरम वैक्सीन के उत्पादन को बढ़ा भी सकता है लेकिन इसमें कुछ समय लगेगा. डॉक्टर जाधव ने उल्लेख किया कि भारत भाग्यशाली है कि तीन फार्मा कंपनियां हैं जो कोरोना वैक्सीन के निर्माण में लगी हैं जिसमें से 2 का क्लीनिकल ट्रायल तीसरे स्टेज पर है जबकि तीसरी कंपनी का ट्रायल दूसरे स्टेज में है.

 

डॉक्टर सुरेश जाधव ने बताया कि तीसरे स्टेज के क्लीनिकल ट्रायल के परिणाम इस साल दिसंबर के दूसरे या ज्यादा से ज्यादा तीसरे हफ्ते में सीरम इंस्टीट्यूट को उपलब्ध होंगे. इसके साथ ही जानकारी को साझा किया जाएगा और इसे ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया यानी DCGI को लाइसेंस के लिए पेश किया जाएगा.

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यह तीसरा वैक्सीनः जाधव

सीरम इंस्टीट्यूट के कार्यकारी निदेशक जाधव ने कहा कि आमतौर पर कोई किसी भी वैक्सीन को बाजार में आने में 8 से 10 साल का समय लगता है. यह तीसरी बार है जब भारत को जल्द से जल्द इस तरह के वैक्सीन की आवश्यकता है. पहले यह H1N1 वैक्सीन के दौरान था. H1N1 फ्लू मैक्सिको में जून और जुलाई में 2009 में कहीं से आया था, और बहुराष्ट्रीय फार्मा कंपनियों ने वैक्सीन दिसंबर 2009 तक तैयार, लाइसेंस और लॉन्च किया गया था. दूसरी बार यह इबोला वैक्सीन के दौरान हुआ. यह तब था जब इबोला का प्रसार कांगो और अफ्रीका के कुछ अन्य हिस्सों में हुआ था. इबोला वैक्सीन तब लॉन्च कर दिया गया जब प्रोडक्ट का ट्रायल का दूसरा चरण चल रहा था.

डॉक्टर जाधव ने द फार्मा एक्सीलेंस ई समिट 2020 को संबोधित करते हुए कहा कि यह पहली बार है कि दुनिया को कोरोना वायरस के बारे में कुछ नहीं पता था, लेकिन सौभाग्य से इसके तौर-तरीके ठीक हैं. यह वायरस वुहान (चीन) से उत्पन्न हुआ था और बहुत कम समय में पूरी दुनिया में फैल गया. इस बारे में बहुत कम जानकारी थी कि यह मानव को कैसे प्रभावित करता है और कैसे फैलता है.

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हर महीने करीब 7 करोड़ खुराक

डॉक्टर जाधव ने भारत सरकार को धन्यवाद दिया कि फाइनल ट्रायल के पूरा होने से पहले ही थोक में इसे बनाने की अनुमति दे दी गई. अगर ट्रायल सफल होता है तो समय बचेगा और जनता के लिए उपलब्ध हो जाएगा. अगर हम सामान्य तरीके से जाते तो लाइसेंस मिलने के बाद बाजार में उत्पाद लाने में 7 से 8 महीने का वक्त लगता.

उन्होंने कहा कि दिसंबर के अंत तक भारत के पास 20 से 30 करोड़ कोविड वैक्सीन की खुराक तैयार होगी, इसलिए एक बार DCGI द्वारा लाइसेंस दिए जाने के बाद उत्पादन हर महीने करीब 6 से 7 करोड़ खुराक तक हो जाएगी. कोरोना वायरस के खतरे से निपटने के लिए सीरम इंस्टीट्यूट 5 अलग-अलग उत्पादों पर काम कर रहा है.

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