स्टडी में दावा- टीकाकरण के बाद अस्पताल में भर्ती की संभावना 1 फीसदी से भी कम

अपोलो हॉस्पिटल ने कहा कि हमारे अध्ययन से पता चलता है कि 97.38 फीसदी लोगों को संक्रमण से सुरक्षा मिली जबकि अस्पताल में भर्ती होने की दर महज 0.06 फीसदी ही रही. इसके अलावा किसी को आईसीयू में नहीं जाना पड़ा और न ही किसी की मौत हुई.

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वैक्सीन लगवाने वाले लोगों के संक्रमित होने पर भर्ती होने की संभावना कम (सांकेतिक तस्वीर) वैक्सीन लगवाने वाले लोगों के संक्रमित होने पर भर्ती होने की संभावना कम (सांकेतिक तस्वीर)

मिलन शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 20 मई 2021,
  • अपडेटेड 11:02 PM IST
  • 97.38% लोगों को संक्रमण से सुरक्षा मिली
  • 3,235 स्वास्थ्यकर्मियों पर की गई स्टडी
  • महिलाएं ज्यादा प्रभावित हुईंः डॉक्टर अनुपम

दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल ने पिछले दिनों कोविड-19 के ब्रेक थ्रू इंफेक्शन (BTI) की फ्रीक्वेंसी का मूल्यांकन करने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों पर अवलोकन से जुड़ी स्टडी के परिणाम जारी कर दिए. रिसर्च में यह खुलासा हुआ कि टीकाकरण के बाद महज 0.06 फीसद लोगों को ही अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ी.

टीकाकरण अभियान के शुरुआती 100 दिनों के दौरान कोविशील्ड वैक्सीन का उपयोग करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों पर ऑब्जर्वेशन स्टडी की गई थी, जिन्होंने दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल को सिम्प्टोमैटिक कोविड-19 होने की सूचना दी थी. 

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बीटीआई उन लोगों को संदर्भित करता है जिन्होंने पूरी तरह से टीका लगवा रखा है जो अभी भी कोरोना से संक्रमित हैं. स्टडी के निष्कर्ष एक मेडिकल जर्नल में प्रकाशन के लिए विचाराधीन है.

अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप के मेडिकल डायरेक्टर और पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटरोलॉजी सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर अनुपम सिब्बल ने कहा कि भारत में हाल ही में चल रहे टीकाकरण अभियान के बीच, कोविड-19 की दूसरी लहर में नए केसों में भारी वृद्धि देखी गई है. टीकाकरण के बाद संक्रमण की खबरें आई हैं, जिन्हें 'ब्रेक थ्रू इंफेक्शन' के नाम से भी जाना जाता है. ये संक्रमण कुछ व्यक्तियों में आंशिक और पूर्ण टीकाकरण के बाद हो सकता है.

उन्होंने कहा कि हमारे अध्ययन से पता चलता है कि 97.38 फीसदी लोगों को संक्रमण से सुरक्षा मिली जबकि अस्पताल में भर्ती होने की दर महज 0.06 फीसदी ही रही. इसके अलावा किसी को आईसीयू में नहीं जाना पड़ा और न ही किसी की मौत हुई.

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डॉक्टर अनुपम सिब्बल ने बताया कि 3,235 स्वास्थ्यकर्मियों पर रिसर्च किया गया था. 3,235 स्वास्थ्यकर्मियों में से कुल 85 रिसर्च के दौरान कोरोना से संक्रमित हुए. इनमें से 65 (2.62 फीसदी) का पूरी तरह टीकाकरण किया गया था जबकि 20 को आंशिक रूप से कोरोना वैक्सीन की डोज दी गई थी.

इस रिसर्च से यह भी पता चला कि महिलाएं स्पष्ट रूप से ज्यादा प्रभावित हुईं और संक्रमण के मामले में उम्र का असर नहीं दिखा.

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