शेयर बाजार से पैसे बनते हैं. लेकिन शेयर बाजार पैसे बनाने की कोई मशीन नहीं है. इसलिए हमेशा लोगों को सोच-समझकर बाजार में निवेश की सलाह दी जाती है. लेकिन इस वक्त दुनिया के एक देश मेंलोग बाजार को लेकर इतने उत्साहित हैं, कि वो किसी की नहीं सुन रहे हैं. लोगों में बाजार को लेकर गजब का पागलपन है, जिसने बड़े-बड़े अर्थशास्त्रियों के होश उड़ा दिए हैं.
हम बात कर रहे हैं दक्षिण कोरिया (South Korea) की. आज की तारीख में दक्षिण कोरिया में हर जगह शेयर बाजार की चर्चा हो रही है, चाहे वो किसी का डाइनिंग रूम हो, कैफे हो, या फिर किसी बड़ी कंपनी का ऑफिस. आज कौन शेयर खरीदा और कौन-सा बेचा, यही चल रहा है.
घर से लेकर दफ्तर तक 'बाजार का बुखार'
हालत यह हो चुकी है कि इस बहती गंगा में हाथ धोने के लिए लोग बाजार से जुड़े जोखिम को नजरअंदाज कर रहे हैं. लोग अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई, जो उन्होंने बुढ़ापे या बच्चों की पढ़ाई के लिए बचाकर रखी थी, उसे निकालकर सीधे शेयर बाजार में झोंक रहे हैं. रिटायरमेंट फंड तक बाजार में लगा दे रहे हैं. यही नहीं, बैंकों से लोन लेकर निवेश किए जा रहे हैं.
हद तो तब हो गई जब लोग घर-गाड़ी बेचकर शेयर खरीद रहे हैं, यानी हर कोई इस रैली में शामिल होने के लिए अपनी गाढ़ी कमाई दांव पर लगा रहे हैं. युवाओं में तो ऐसा क्रेज है कि वो बाजार में सबकुछ दांव पर लगाने को तैयार हैं. खबरें ऐसी आ रही हैं कि युवा अपनी बाइक गिरवी रखकर उस पैसे जोखिम भरे शेयर खरीद रहे हैं.
दरअसल, फिलहाल पूरी दुनिया से अलग दक्षिण कोरिया की तस्वीर है. क्योंकि तमाम देशों के शेयर बाजारों को लेकर रोना-धोना मचा हुआ है, कहीं मंदी का डर है तो कहीं महंगाई की मार. चाहे अमेरिका हो, चीन हो, जापान हो या फिर भारतीय बाजार. यहां निवेशक बाजार में महीनों से तेजी का इंतजार कर रहे हैं. वहीं दक्षिण कोरिया का बाजार किसी रॉकेट की तरह आसमान चीरते हुए आगे बढ़ रहा है. यहीं नहीं, दक्षिण कोरिया में यूट्यूब पर शेयर मार्केट की जानकारी देने वालों की भी बाढ़-सी आ गई हैं, हर कोई खुद को एक्सपर्ट बता रहा है. क्योंकि बाजार में एकतरफा रैली है.
साउथ कोरिया के बाजार ने सबको चौंकाया
पिछले एक साल में दक्षिण कोरिया के बाजार ने लोगों को 200% से ज्यादा का रिटर्न दिया है. जिसकी उम्मीद कतई नहीं की जा सकती. वहीं इसकी की तुलना में अमेरिकी शेयर बाजार ने एक साल करीब 15 फीसदी, चीन ने 20 फीसदी, जापान के बाजार ने 50 फीसदी से ज्यादा और भारतीय बाजार ने एक साल में 5 फीसदी का निगेटिव रिटर्न दिया है.
दक्षिण कोरिया की मार्केट ने इस साल यानी साल-2026 में अब तक 70% से ज्यादा का रिटर्न दिया है. जबकि इस साल दुनिया के सामने तमाम आर्थिक चुनौतियां आई हैं. अमेरिकी टैरिफ के बाद मिडिल-ईस्ट के तनाव ने बाजार का मूड बिगाड़ने का काम किया है. लेकिन साउथ कोरिया का बाजार बेखबर है, खासकर यहां रिटेल निवेशक बाजार को पैसे छापने की मशीन सोचकर टूट पड़े हैं.
पिछले एक साल में ग्लोबल संकट के बीच दक्षिण कोरिया के बाजार ने जिस तरह के रिटर्न दिए हैं, उसे देखकर किस का भी ईमान डगमगा सकता है. दिन-प्रतिदिन बाजार को लेकर लोगों का लालच बढ़ता जा रहा है. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चे भी आंखें मूंदकर बाजार में पैसे लगा रहे हैं. हर किसी को लगता है कि कहीं मैं पीछे न छूट जाऊं. रिपोर्ट के मुताबिक मार्च तिमाही में 18 साल से कम उम्र के लोगों के नए डीमैट अकाउंट की संख्या एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले 10 गुनी ज्यादा रही.
इस जादुई तेजी के पीछे का 'गॉडफादर' कौन है?
कुछ तो कारण होगा, जिसके दम पर बाजार इतना भाग रहा है. इसका सीधा और जवाब है- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर (चिप) का खेल. फिलहाल पूरी दुनिया को चिप सप्लाई करने का सबसे बड़ा ठेका दक्षिण कोरिया की कंपनियों के पास है. सैमसंग और एसके हाइनिक्स (SK Hynix) जैसी दक्षिण कोरियाई कंपनियों ने चिप की दुनिया में ऐसी धाक जमाई है कि आज अमेरिकी कंपनियां भी इनके आगे लाइन लगाकर खड़ी हैं. कंपनियों को तगड़े ऑर्डर मिल रहे हैं, जिससे उनके मुनाफे का ग्राफ तेजी से ऊपर भागा है, और बाजार के लिए ये एक बूस्टर डोज का काम कर रहा है.
पैसा आया तो बदल गए मिजाज
जब बाजार ने लोगों पर नोटों की बारिश कर दी, तो भला लोग अपनी जेब में पैसा कैसे रोकते? कोरिया के आम लोगों के हाथ में जब यह अचानक आया हुआ 'रातो-रात का पैसा' लगा, तो वहां की सड़कों और बाजारों का नजारा ही बदल गया. लोग अब अपनी लाइफस्टाइल को बदलने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. कोरिया की सड़कों पर आजकल टेस्ला (Tesla) कारों की बाढ़ सी आ गई है. पिछले एक साल में कोरिया में टेस्ला कारों की बिक्री में भारी इजाफा हुआ है.
बाजार के मुनाफे से लोगों का शौक इस कदर बढ़ गया है कि रोलेक्स जैसी दुनिया की सबसे महंगी और लग्जरी घड़ियों की डिमांड तेजी से बढ़ी है. जिसने बाजार से पैसे बनाए, वो महंगे से महंगे स्मार्टफोन्स लेकर घूम रहे हैं.
इस कहानी में एक बहुत बड़ा ट्विस्ट है!
जहां एक तरफ कोरिया के आम लोग इस मुनाफे के नशे में चूर होकर महंगी गाड़ियां और घड़ियां खरीद रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पर्दे के पीछे धीरे-धीरे दुनिया भर के बड़े-बड़े विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) दक्षिण कोरिया के बाजार से पैसे निकाल रहे हैं. इसके दो कारण हैं, पहला तो यह कि एक साल में बाजार ने तूफानी रैली दिखाई है और जिससे वो अपना मुनाफा समेटने में लगे हैं. दूसरा कारण यह है कि उन्हें लग रहा है कि आम लोगों के इस पागलपन की वजह से बाजार में एक बहुत बड़ा 'बबल' बन चुका है, जो कभी भी एक छोटे से झटके से फूट सकता है.
बाजार के आंकड़ों का एक और डरावना वाला सच ये है कि जहां 1.4 करोड़ स्थानीय खुदरा निवेशक बाजार में 37.7 ट्रिलियन वॉन झोंक चुके हैं. वहीं विदेशी निवेशक तेजी से पैसे निकाल रहे हैं.
एक्सपर्ट ने किया अलर्ट
इतिहास गवाह है कि जब भी किसी देश में आम आदमी से लेकर दफ्तर के बाबू तक कर्ज लेकर या घर बेचकर शेयर बाजार में दांव लगाते हैं, तो वो किसी बड़ी अनहोनी का संकेत होता है. एनालिस्ट्स का कहना है कि दुनिया में पहले कभी किसी बाजार में ऐसी तेजी नहीं देखी गई है. कुछ का कहना है कि इस तेजी के पीछे बाजार में लगा उधार का पैसा है.
एआई और टेक्नोलॉजी का भविष्य बेशक शानदार है, इसमें कोई दो राय नहीं है. लेकिन दक्षिण कोरिया में जिस तरह लोग घर बेचकर, रिटायरमेंट फंड को बाजार में झोंक रहे हैं, यही डर का कारण है. क्योंकि रिटेल निवेशक इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं, 'जब पड़ोसी कमा रहा है तो मैं क्यों नहीं'. हर कोई अब शेयर बाजार की इस तेजी का लाभ उठाकर अमीर बनना चाह रहा है. एक अनुमान के मुताबिक दक्षिण कोरिया का हर दूसरा नागरिक अब 'डे ट्रेडर' बन चुका है. दक्षिण कोरिया के बेंचमार्क इंडेक्स कोस्पी (KOSPI) में जोरदार तेजी से ये दुनिया का 7वां सबसे बड़ा शेयर बाजार बन गया है. Samsung की मार्केट कैपिटलाइजेशन 1 ट्रिलियन डॉलर के पार हो गई है, जिससे यह एशिया की दूसरी सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई है.
अमित कुमार दुबे