जहां इस दौर में AI को लेकर क्रेज बढ़ा हुआ है और कंपनियां एआई पर ज्यादा फोकस कर रही हैं , जिस कारण कर्मचारियों की बड़े पैमाने पर नौकरी जा रही है. वहीं दूसरी ओर, एक युवा ने एआई इंजीनियरिंग जैसे हाई डिमांड जॉब छोड़कर खेती शुरू की और ना सिर्फ खेती कर रहा है, बल्कि 28 साल के यह युवा हर हफ्ते 30 हजार रुपये कमा भी रहा है.
28 साल के पुष्पक साहू मुंबई के रहने वाले हैं और ये PWC में एआई इंजीनियर रह चुके हैं, लेकिन उन्होंने जॉब छोड़कर छत्तीसगढ़ में अपने पैतृक गांव लौट आए, ताकि वे एक बिल्कुल अलग सपने को पूरा कर सकें. आज वो आर्किड की खेती करके हर हफ्ते 30,000 रुपये की कमाई कर रहे हैं.
खेती का काम उन्होंने शौक के तौर पर शुरू किया था, लेकिन अब एक डेवलप बिजनेस में बदल गया. शहरी नियोजन में मास्टर डिग्री और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में डिप्लोमा प्राप्त साहू ने मुंबई में दो साल काम किया. हालांकि, उन्हें इस काम के दौरान कई बार लगा कि उन्हें कुछ अलग करना चाहिए और अब उन्होंने आर्किड की खेती शुरू की है.
आर्किड की खोज
साहू की आर्किड के प्रति रुचि कोविड-19 महामारी के दौरान और भी बढ़ गई, जब उन्होंने बागवानी और पौधों की देखभाल के बारे में अधिक जानने में समय बिताया. ज्यादातर फूल वाले पौधों से उलट, आर्किड अपनी अनूठी विकास शैली के लिए जाने जाते हैं. आर्किड अपने आकर्षक, लंबे समय तक फ्रेश रहने वाले और महंगे बिकने वाले फूलों के लिए जानी जाती है. इसके पौधों को सामान्य मिट्टी की बजाय नारियल के छिलके या लकड़ी के कोयले के माध्यम से उगाया जाता है.
सामने आई कई चुनौतियां
आईटी करियर से सीधे खेती के क्षेत्र में एंट्री लेना आसान नहीं था. आर्किड की खेती में तापमान, धूप और जलवायु की सावधान तरीके से निगरानी बहुत जरूरी होती है. सही इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और पौधों के व्यवहार को समझने में समय और निवेश लगा. शुरुआत में जब उत्पादन और बिक्री अभी डेवलप हो रही थी, तब कई बार उतार-चढ़ाव आए. हालांकि, समय पर सही कदम उठाने के बाद स्थिति में फिर से सुधार आया.
फिर मिली सफलता
आज साहू का आर्किड उगाने का व्यवसाय एक बड़ा कारोबार बन चुका है. उनकी नर्सरी बागवानी के शौकीनों, पौधों के कलेक्शन और प्रीमियम सजावटी पौधों की तलाश करने वाले गृहस्वामियों की जरूरतों को पूरा करती है. इनडोर गार्डनिंग और विदेशी पौधों की बढ़ती लोकप्रियता ने उनके उत्पादों के लिए एक मजबूत बाजार बनाने में मदद की है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फार्म फिलहाल हर हफ्ते लगभग 1,000 फूलों की बालियां उगाता है और कोलकाता, भुवनेश्वर, कटक, नागपुर और रायपुर के बाजारों में इनकी आपूर्ति करता है. यह व्यवसाय अब हर हफ्ते लगभग ₹30,000 की आय अर्जित करता है, जो भारत में एक अलग एग्रीकल्चर की क्षमता को दिखाता है.
आजतक बिजनेस डेस्क