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NPS और EPF में हुए 10 बदलाव... आपके रिटायरमेंट फंड पर होगा असर, जानिए डिटेल

आजतक बिजनेस डेस्क
  • नई दिल्‍ली,
  • 14 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:00 PM IST
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भारत में रिटायरमेंट फंड जुटाने के लिए नॉन-गवर्ननमेंट कर्मचारियों का सबसे खास तरीका NPS और EPF माना जाता है. ज्‍यादातर लोग इन्‍हीं दो विकल्‍पों के जरिए अपने बुढ़ापे की प्‍लानिंग करते हैं, क्‍योंकि इसमें पैसा डूबने का खतरा बहुत कम होता है और यह केंद्र सरकार द्वारा संचालित योजनाएं हैं. 

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इसी कारण इन योजनाओं में समय-समय पर कई बदलाव भी होते है. हाल ही में एनपीएस और EPF के तहत कई बड़े बदलाव किए गए हैं, जो आपके रिटारमेंट फंड को प्रभावित करते हैं. आइए जानते हैं NPS  और ईपीएफ से जुड़े नियमों में क्‍या बदलाव हुए हैं. 

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NPS विड्रॉल नियम: एनपीएस विड्रॉल नियमों में सबसे बड़ा बदलाव हुआ है. पहले एनपीएस होल्‍डर्स को अपनी बचत का 40 फीसदी हिस्‍सा पेंशन योजना खरीदने के लिए इस्‍तेमाल करना पड़ता था.  अब यह आवश्‍यकता घटाकर 20 प्र‍तिशत कर दी गई है. इसका सीधा मतलब है कि रिटायरमेंट लोग अपनी डिपॉजिट अमाउंट का 80 फीसदी तक एकमुश्‍त निकाल सकते हैं. इस बदलाव से कई रिटायरमेंट लोगों से दबाव कम होगा.

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पूरी रकम निकाल सकेंगे:  एनपीएस में कम बचत वाले लोगों को नए नियमों से बड़ी राहत मिली है. अगर 8 लाख किसी के एनपीएस अकाउंट में डिपॉजिट है तो वे अब पूरी राशि एक बार में निकाल सकता है, उसे पेंशन योजना खरीदने की जरूरत नहीं होगी.

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रिटायरमेंट अवधि में भी बदलाव: अगर कोई एनपीएस में निवेश करता है, तो वे अब योजना में 15 वर्ष पूरे करने के बाद निवेश से बाहर निकल सकते हैं. अगर कोई 85 साल तक निवेश करना चाहता है, तो भी वह इसमें निवेश जारी रह सकता है. 60 साल की आयु से पहले, आंशिक निकासी अब तीन के बजाय चार बार की जा सकती है. निकासी के बीच न्यूनतम चार वर्ष का अंतराल अभी भी लागू है. 

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NPS  में एक और खास बदलाव: एनपीएस में एक और खास बदलाव हुआ है, जो इक्विटी निवेश से संबंधित है. अक्टूबर 2025 से, गैर-सरकारी खाताधारक अपनी जमा पूंजी का 100 प्रतिशत तक इक्विटी में निवेश कर सकते हैं. पहले, इक्विटी की अधिकतम सीमा 75 फीसदी थी.

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EPF विड्रॉल नियम: EPFO 3.0 के तहत नियमों को भी सरल बनाया गया है. विड्रॉल के 13 अलग-अलग कारण थे, जिसे अब 3 स्‍पष्‍ट कैटेगरी में बांटा गया है. इनमें आवश्यक जरूरतें, आवास संबंधी जरूरतें और विशेष परिस्थितियां शामिल हैं. सभी कैटेगरी के लिए विड्रॉल आवश्‍यक मिनिमम सर्विस अवधि को घटाकर 12 महीने कर दिया गया है. 

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नियोक्‍ता की आवश्‍यकता खत्‍म: ईपीएफ ट्रांसफर और विड्रॉल के लिए नियोक्‍ता के अप्रूवल की एक पुरानी समस्‍या थी. इस प्रक्रिया के कारण अक्‍सर देरी होती थी. खासकर जब कर्मचारी नौकरी बदलते थे. नए सिस्‍टम के तहत नियोक्‍ता के अप्रूवल की अब आमतौर पर आवश्‍यकता नहीं होती है.

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विड्रॉल नियम: अब 5 लाख रुपये तक के दावों का निपटान मैन्‍युअल जांच के बिना ऑटोमैटिक किया जा सकता है. इससे पूरी प्रक्रिया में तेजी आती है और गलतियां कम होती हैं. सुरक्षा बढ़ाने के लिए, उमंग ऐप के माध्यम से चेहरे की पहचान शुरू की गई है. डिजिटल प्रक्रिया ने ईपीएफ दावों को तेज और अधिक विश्वसनीय बना दिया है. नौकरी छूटने के बाद पूरे EPF निकालने का वेटिंग पीरियड दो महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दिया गया है. 

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न्यूनतम बैलेंस का नियम: सदस्य अपने कुल निवेश बैलेंस का 100% तक निकाल सकते हैं, लेकिन ब्याज कमाते रहने और रिटायरमेंट बेस के तौर पर अकाउंट में कुल रकम का कम से कम 25% रहना जरूरी है. 

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कितनी बार निकाल सकते हैं: सदस्य शिक्षा के लिए 10 बार तक और शादी के लिए पांच बार तक पैसे निकाल सकते हैं, जो पिछली संयुक्त सीमा तीन से काफी ज्‍यादा है. इसके लिए कम दस्‍तावेजों की आवश्‍यकता होगी, कई क्लेम के लिए सेल्फ-डिक्लेरेशन की अनुमति है, जिससे कागजी काम कम हो जाएगा. 

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