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कैसे पड़ा Air India नाम? 1946 के इस खत से खुलासा, इन चार नामों में हुई थी वोटिंग

aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 06 फरवरी 2022,
  • अपडेटेड 2:35 PM IST
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एअर इंडिया (Air India) एक बार फिर टाटा कंपनी हो चुकी है. पिछले महीने ही इसपर अंतिम मुहर लगी है. टाटा ग्रुप का कहना है कि एअर इंडिया को फिर से लोकप्रिय बनाना उसकी पहली प्राथमिकता है. Air India का मालिकाना हक मिलने के बाद अब टाटा ग्रुप को इसके नाम और लोगो (LOGO) अभी 5 साल तक संभाल कर रखना होगा. 

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टाटा ग्रुप ने 18000 करोड़ रुपये की सबसे ज्यादा बोली लगाकर एअर इंडिया को अपने नाम किया है. इस बीच रविवार को टाटा ग्रुप की ओर से एक खत सार्वजनिक किया है. जिससे खुलासा होता है कि आखिर में किस तरह से टाटा ग्रुप (Tata Group) ने अपने एयरलाइंस का नाम AIR INDIA रखा था. 
 

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Tata Group की ओर से ट्वीट में 1946 की एक चिट्ठी शेयर की गई है, ये आज से 78 साल पहले 1946 में टाटा की मंथली बुलेटिन (Tata Monthly Bulletin) में छपी थी. जिसमें बकायदा बताया गया कि AIR INDIA नाम पर मुहर के लिए कर्मचारियों के बीच एक वोटिंग की गई थी.

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दरअसल, टाटा कंपनी ने चार नाम तय किए थे. जो Indian Air Lines, Air-India, Pan-Indian Air Lines और Trans-Indian Air Lines थे. फिर इन चारों नामों में से एक फाइनल करने के लिए टाटा के कर्मचारियों के बीच वोटिंग की गई थी. जिसमें सबसे ज्यादा लोगों ने एअर इंडिया के नाम पर अपनी मुहर गई थी. 
 

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आजादी से पहले 1946 में एयरलाइंस के नाम को लेकर पहले राउंड की वोटिंग में 64 कर्मचारियों ने एअर-इंडिया, 51 कर्मचारियों ने  इंडियन एयर लाइन्स, 28 कर्मचारियों ने ट्रांस-इंडियन एअर लाइन्स और 19 कर्मचारियों पैन-इंडियन एयर लाइन्स के लिए वोट किए. 

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फाइनल राउंड में सबसे कम पसंदीदा दो नामों को हटा दिया गया. जिसके बाद एअर-इंडिया (Air India) को 72 वोट और इंडियन एयर लाइंस को 58 वोट मिले थे. इस तरह से टाटा कंपनी ने एयरलाइंस का नाम AIR INDIA रखने का फैसला किया था.  

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गौरतलब एअर इंडिया को सबसे पहले जेआरडी टाटा (JRD Tata) ने 1932 में टाटा एअरलाइंस के नाम से लॉन्च किया था. 1946 में इसका नाम बदल कर एअर इंडिया कर दिया गया. उसके बाद साल 1954 में सरकार ने टाटा से एअर इंडिया को खरीदकर उसका राष्ट्रीकरण कर दिया. 

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आजादी के वक्त देश में कुल 9 छोटी-बड़ी विमानन कंपनियां थीं. साल 1954 में इसका राष्ट्रीकरण कर दिया गया. सभी कंपनियों को मिलाकर दो कंपनियां बनाई गईं, घरेलू सेवा के लिए इंडियन एयरलाइंस, और विदेश के लिए एअर इंडिया. वर्ष 1953 तक एअर इंडिया का स्वामित्व टाटा समूह के पास था, और इसके चेयरमैन जेआरडी टाटा थे. 

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