नोटबंदी: रिजर्व बैंक के नए नियम के मायने

नियम कहता है कि अकाउंट से निकासी रसीद भर कर खाताधारक एक हफ्ते में सिर्फ 24,000 रुपये तक निकाल सकता है. अब रिजर्व बैंक ने आम आदमी को राहत देने के लिए नए नियम का ऐलान किया है. यदि कोई खाताधारक बैंक में नई करेंसी डिपॉजिट करता है तो उसके लिए बैंक से पैसे निकालने की कोई सीमा नहीं होगी.

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बैंक से निकासी पर आरबीआई की नई पहल बैंक से निकासी पर आरबीआई की नई पहल

राहुल मिश्र

  • नई दिल्ली,
  • 29 नवंबर 2016,
  • अपडेटेड 3:26 PM IST

रिजर्व बैंक का नियम कहता है कि अकाउंट से निकासी रसीद भर कर खाताधारक एक हफ्ते में सिर्फ 24,000 रुपये तक निकाल सकता है. अब रिजर्व बैंक ने आम आदमी को राहत देने के लिए नए नियम का ऐलान किया है. यदि कोई खाताधारक बैंक में नई करेंसी डिपॉजिट करता है तो उसके लिए बैंक से पैसे निकालने की कोई सीमा नहीं होगी. यानी आप यदि बैंक में 50,000 रुपये की नई करेंसी जमा करते हैं तो आप 24,000 रुपये की सीमा को पार कर 50,000 रुपये की निकासी कर सकते हैं.

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से कुछ बाते बिलकुल साफ है. नोटबंदी की प्रक्रिया शुरू होने के बाद नई करेंसी की छपाई, नई करेंसी का सर्कुलेशन, बैंक से निकासी, बैंक में जमा हो रही रकम, एटीएम की हालत सबकुछ बुरी तरह बुरी तरह से प्रभावित हो चुका है.

आइए जानते हैं बातों से समझते हैं रिजर्व बैंक के नए नियम को-

1. सोमवार को रिजर्व बैंक ने माना कि देश में बैंकों के पास करेंसी की गंभीर समस्या पैदा हो चुकी है. बीते 20 दिनों की नोटबंदी के दौरान बैंकों से निकासी बढ़ चुकी है. आम आदमी के साथ-साथ कारोबारी जगत रिजर्व बैंक की निकासी सीमा पर अपने खाते से लगातार पैसे निकाल रहा है.

2. इस निकासी में सबसे ज्यादा इस्तेमाल 2000 रुपये की नई करेंसी का हो रहा है. इस करेंसी मुद्रण नोटबंदी लागू करने के दो महीने पहले से हो रहा है. वहीं 500 रुपये की नई नोट अभी भी बाजार में नहीं पहुंच पाई है. इसके मुद्रण का फैसला सरकार ने नोटबंदी से महज 1 हफ्ते पहले लिया था.

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3. नोटबंदी से पहले देश में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली करेंसी 500 रुपये की थी. नई 500 रुपये की करेंसी में देरी के चलते बैंकों से बदलवाने की प्रक्रिया में सबसे ज्यादा 100 रुपये और 2000 रुपये की नोट का इस्तेमाल किया गया. यह भी स्वाभाविक था कि 2000 रुपये की नोट के सर्कुलेशन में सबसे बड़ी चुनौती फुटकर की थी लिहाजा खरीदारी के लिए उसका ज्यादा उपयोग नहीं दिखाई दे रहा है.

4. बैंक से जारी 100 रुपये की करेंसी के साथ-साथ अर्थव्यवस्था में मौजूद पुरानी 100 रुपये की नोट लेनदेन के लिए सबसे महत्वपूर्ण हो गई. इन दोनों कारणों से 2000 रुपये की नोट जिसे मिली उसने संचय कर लिया. दरअसल, 100 रुपये की नोट खरीदारी और रीटेल के लिए सबसे अहम हो चुकी है. लिहाजा, दोनों ही करेंसी बैंकों में वापस पुहंचना बंद हो गई.

5. को 500 रुपये और 2000 रुपये की नई करेंसी के मुद्रण में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. यह बात आम आदमी को खबरों के माध्यम से समझ में आ रही है. वहीं देश में रीटेल सेक्टर सर्वाधिक कैश पर चलता है. नोटबंदी के पहले तक होलसेलर और रीटेलर कैश का सर्वाधिक आदान प्रदान करते थे. दिन के कारोबार के बाद शाम तक यह पैसा बैंकों में जमा हो जाता था. लेकिन मौजूदा दिक्कतों के बाद यहां छोटे नोटों का बैंक में पहुंचना रुक गया है. बैंक से निकासी की सीमा है, लंबी कतार है और रोज नए नियम आने का खतरा बरकरार है. लिहाजा, लोग अपनी सुविधा के लिए छोटी नकदी को बैंक में जमा कराने से कतरा रहे हैं.

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