क्यों हो रहा तूतीकोरिन के वेदांता कॉपर प्लांट में संग्राम, जानें 6 खास बातें

थूथूकुडी में कानून-व्यवस्था की स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई और लगभग 30 लोग घायल जख्मी हो गए. आखिर क्यों बीते 100 दिनों ने तूतीकोरिन में चल रहा है प्रदर्शन और क्यों मामला इतना गंभीर हो गया कि पुलिस को गोली चलना के विकल्प चुनना पड़ा.

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तूतीकोरिन में संग्राम तूतीकोरिन में संग्राम

राहुल मिश्र

  • तूतीकोरिन,
  • 23 मई 2018,
  • अपडेटेड 10:52 AM IST

बीते 100 दिनों से तमिलनाडु के थूथूकुडी में वेदांता स्टरलाइट की कॉपर प्लांट को बंद करने को लेकर चल रहा प्रदर्शन हिंसात्मक हो गया है. प्रदर्शनकारियों की मंगलवार शाम पुलिस से टकराव की स्थिति पैदा हो गई और कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया. थूथूकुडी में कानून-व्यवस्था की स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई और लगभग 30 लोग घायल जख्मी हो गए. आखिर क्यों बीते 100 दिनों ने तूतीकोरिन में चल रहा है प्रदर्शन और क्यों मामला इतना गंभीर हो गया कि पुलिस को गोली चलना के विकल्प चुनना पड़ा.

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कॉपर प्लांट

यहां स्थिति वेदांता स्टरलाइट की कॉपर प्लांट से प्रतिवर्ष लगभग 4 लाख टन कॉपर कैथोड का उत्पादन किया जाता है. इस प्लांट का संचालन लंदन में लिस्टेड वेदांता लिमिटेड की इकाई वेदांता लिमिटेड द्वारा किया जाता है. इस कॉपर प्लांट को 27 मार्च को 15 दिनों तक मेंटेनेंस के लिए बंद कर दिया गया था. दरअसल वेदांता इस प्लांट की क्षमता में इजाफा करते हुए इससे लगभग 8 लाख टन कॉपर कैथोड का उत्पादन करना चाहती है.

पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड

27 मार्च को प्लांट से उत्पादन बंद होने के बाद तमिलनाडु पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने अप्रैल से प्लांट को दोबारा शुरू करने के लाइसेंस को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि वेदांता ने पर्यावरण बचाव के क्षेत्रीय कानून का उल्लंघन किया है. हालांकि पॉल्यूशन बोर्ड के इस फैसले को स्टरलाइट की तरफ से चुनौती दी गई है. जिसके बाद पॉल्यूशन बोर्ड ने मामले की अगली सुनवाई 6 जून तक टाल दी है.

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गौरतलब है कि बोर्ड ने स्टरलाइट कंपनी पर आरोप लगाया है कि स्टरलाइट ने प्लांट से निकलने वाले कॉपर स्लैग को नदी में बहा दिया और ग्राउंड वॉटर पर पड़ने वाले प्रभाव पर रिपोर्ट जारी नहीं किया. यह पहला मौका नहीं है जब इस कॉपर प्लांट को बंद किया गया है. इससे पहले 2013 में भी प्लांट को कई हफ्तों के लिए तब बंद किया गया था जब नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में इसके खिलाफ पर्यावरण को नुकसान पहुंचना का मामला चल रहा था.

क्यों हो रहा प्लांट का विरोध

तूतीकोरीन में क्षेच्रीय लोग बीते 100 दिनों से कॉपर प्लांट को बंद करने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं. इस प्रदर्शन के दौरान उन्होंने मंगलवार को तूतीकोरिन के कलक्टर ऑफिस में धरना देने का ऐलान किया था. तूतीकोरिन जिले में बीते कुछ महीनों से अलग-अलग जगह इस प्लांट के विरोध में धरना-प्रदर्शन जारी है. क्षेत्रीय लोग इस प्लांट की क्षमता बढ़ाए जाने का विरोध कर रहे हैं.

इसके अलावा प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस प्लांट के चलते पूरे क्षेत्र में ग्राउंड वॉटर में प्रदूषण का स्तर बढ़ चुका है. कुछ प्रदर्शनकारियों ने दावा किया है कि पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने वेदांता को छोटी चिमनी के साथ प्लांट चलाने की अनुमति दी है जिसके चलते प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है. छोटी चिमनी के चलते कंपनी को खर्च बचाने में मदद मिल रही है और इसकी कीमत लोगों को जल श्रोत के खराब स्तर के तौर पर उठानी पड़ रही है.

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वेदांता की सफाई

स्टरलाइट कॉपर के सीईओ पी रामनाथ ने दावा किया है कि प्लांट ने पर्यावरण संस्थान नीरी और सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई सभी शर्तों का पालन किया है. इसके साथ ही रामनाथ ने कहा कि अब उनकी कंपनी इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन द्वारा तय किए गए बेंचमार्क को पूरा करने जा रही है. कंपनी ने दावा किया है कि उनके प्लांट से पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंच रहा है.

स्टरलाइट के सीईओ ने कहा कि वह अपने प्लांट को जांच एजेंसियों के लिए खोलने को तैयार है जिससे उसके खिलाफ प्रदूषण की उड़ाई गई अफवाहें पूरी तरह से निराधार साबित हो सके. हालांकि प्रदर्शनकारियों ने कंपनी के इस प्रस्ताव को यह कहते हुए ठुकरा दिया है कि समस्या कॉपर प्लांट के अंदर नहीं है बल्कि प्लांट से जल श्रोत और पर्यावरण को हो रहा नुकसान है.

प्लांट को बंद करने का ये कर रहे विरोध

तूतीकोरिन के चिदंबरानार पोर्ट ट्रस्ट पर कर्मचारियों की तूतीकोरिन स्टीवडोर्स एसोसिएशन ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है कि जल्द से जल्द प्लांट पर कॉपर उत्पादन को शुरू किया जाए. इस एसोसिएशन का दावा है कि प्लांट को बंद किए जाने से हजारों की संख्या में पोर्ट पर काम करने वाले मजदूरों के सामने बेरोजगारी की समस्या खड़ी हो गई है.

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एसोसिएशन के मुताबिक इस पोर्ट पर अपना माल भेजने वाली कंपनियों में वेदांता कॉपर प्लांट सबसे अहम है. इसके साथ ही एसोसिएशन का दावा है कि वेदांता प्लांट बंद हो जाने की स्थिति में कॉपर से संबंधित कई छोटी फैक्ट्रियां प्रभावित होंगी. उनके ठप पड़ने से फैक्ट्रियों में काम कर रहे लोगों के सामने रोजगार का सवाल खड़ा हो जाएगा.

प्लांट बंद होने से कॉपर की कीमत में इजाफा

वेदांता का प्लांट बंद हो जाने के बाद मेटल मार्केट में कॉपर की कीमतों में इजाफा दर्ज हो रहा है. वेदांता के इस प्लांट की प्रति वर्ष 4 लाख टन उत्पादन की क्षमता है. इस उत्पादन क्षमता के साथ कॉपर मार्केट में लगभग 35 फीसदी कारोबार पर इस कंपनी की पकड़ है. इसके अलावा इस कंपनी से ही खाड़ी देशों समेत कई एशियाई देशो में कॉपर का निर्यात किया जाता है. वहीं देश में कॉपर की खपत बीते कुछ वर्षों से लगातार बढ़ रही है.

निर्यात होगा बंद, आयात पर निर्भर हो जाएगा देश

आंकड़ों के मुताबिक देश में कॉपर की मांग में प्रति वर्ष लगभग 7 से 8 फीसदी की इजाफा देखने को मिलता है. वहीं इकरा की अप्रैल में आई रिपोर्ट के मुताबिक जहां भारत अभी कॉपर का निर्यात कर रहा है, यदि वेदांता के इस प्लांट को बंद किया जाता है तो निर्यात बुरी तरह प्रभावित होगा. इसके साथ-साथ देश को अपनी जरूरत का कॉपर आयात के जरिए लेने की मजबूरी हो जाएगी. 

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