अगर आप प्रॉपर्टी में निवेश करने का मन बना रहे हैं, तो दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे मेट्रो सिटीज अब आम आदमी के बजट से बाहर होते जा रहे हैं. इन महानगरों में आसमान छूती कीमतों और कम रेंटल यील्ड ने निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. लेकिन अगर आप निवेश का सोच रहे हैं तो कम बजट में निवेश के लिए भारत के टियर 2 शहर 'न्यू रियल एस्टेट हॉटस्पॉट' बनकर उभरे हैं.
इन शहरों में न केवल प्रॉपर्टी की कीमतें आपके बजट में होंगी, बल्कि आने वाले समय में यहां किराया और प्रॉपर्टी की वैल्यू दोनों में जबरदस्त उछाल देखने को मिलेगा.
PropEquity और Anarock जैसी दिग्गज संस्थाओं की 2026 की हालिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत की रियल एस्टेट ग्रोथ अब बड़े मेट्रो शहरों से शिफ्ट होकर उभरते हुए केंद्रों की ओर बढ़ रही है. जानते हैं उन 5 शहरों के बारे में जहां आपका निवेश सुरक्षित भी है और मुनाफे वाला भी.
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भारत का सबसे स्वच्छ शहर 'मिनी मुंबई' के नाम से जाना जाने वाला इंदौर अब रियल एस्टेट का पावरहाउस बन चुका है, इंदौर में सुपर कॉरिडोर और विजय नगर जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है. यहां आईटी कंपनियों और स्टार्टअप्स के आने से युवाओं की आबादी बढ़ी है. स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से यहां रेंटल डिमांड काफी ज्यादा है. कम बजट में प्लॉट या फ्लैट लेकर आप भविष्य में भारी कैपिटल एप्रिसिएशन की उम्मीद कर सकते हैं.
नवाबों का शहर लखनऊ अब एक्सप्रेसवे और मेट्रो कनेक्टिविटी के दम पर निवेशकों की पहली पसंद बन गया है. शहीद पथ कॉरिडोर और गोमती नगर विस्तार जैसे इलाके आज प्रीमियम रेजिडेंशियल हब बन चुके हैं. पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और आउटर रिंग रोड ने शहर की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है. लखनऊ में प्रॉपर्टी की कीमतें अभी भी दिल्ली-NCR की तुलना में काफी कम हैं, लेकिन यहां की रेंटल डिमांड में सालाना 8-10% की वृद्धि देखी जा रही है.
अहमदाबाद
गिफ्ट सिटी (GIFT City) के विकास ने अहमदाबाद के रियल एस्टेट मार्केट को पूरी तरह बदल दिया है. साबरमती रिवरफ्रंट और बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों के कारण यह शहर वैश्विक निवेश का केंद्र बन गया है. यहां की सड़कें और नागरिक सुविधाएं किसी भी मेट्रो शहर को टक्कर देती हैं. 2026 की मार्केट रिपोर्ट्स के अनुसार, अहमदाबाद में कमर्शियल और रेजिडेंशियल दोनों ही सेगमेंट में निवेश पर अच्छा रिटर्न मिल रहा है.
जयपुर
गुलाबी नगरी जयपुर अब केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (DME) ने इसे निवेश का सबसे बड़ा केंद्र बना दिया है. जगतपुरा और अजमेर रोड जैसे क्षेत्रों में प्लॉटेड डेवलपमेंट की काफी मांग है. यहां की कनेक्टिविटी और लाइफस्टाइल प्रवासियों को आकर्षित कर रही है. जयपुर में रेंटल इनकम का मुख्य स्रोत वर्किंग प्रोफेशनल्स और स्टूडेंट्स हैं, जिससे यहां प्रॉपर्टी खाली रहने की संभावना बहुत कम होती है.
कोयंबटूर
चेन्नई और बेंगलुरु के बजट से बाहर होने के बाद निवेशकों ने कोयंबटूर का रुख किया है. 'दक्षिण भारत का मैनचेस्टर' कहे जाने वाले इस शहर में मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ आईटी सेक्टर भी तेजी से पैर पसार रहा है. यहां की जलवायु और क्वालिटी ऑफ लाइफ इसे रिटायरमेंट होम और निवेश के लिए परफेक्ट बनाती है. कोयंबटूर में रेंटल यील्ड स्थिर है और यहां प्रॉपर्टी की कीमतों में स्थिरता के साथ-साथ लॉन्ग-टर्म ग्रोथ की पूरी गारंटी है.
निवेश से पहले ध्यान रखने योग्य बातें
हमेशा उन क्षेत्रों में निवेश करें जो प्रस्तावित मेट्रो स्टेशन, एक्सप्रेसवे या आईटी पार्क के करीब हों. ये सुनिश्चित करें कि प्रोजेक्ट RERA में रजिस्टर्ड हो ताकि आपका पैसा सुरक्षित रहे. निवेश से पहले उस क्षेत्र में पीजी (PG) या रेंटल फ्लैट्स की मांग का आंकलन जरूर करें.
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