लिफ्ट बंद, बिजली गुल, मुंबई की बारिश से करोड़ों के घर में 'बंधक' बने लोग!

मुंबई के बोरिवली, गोरेगांव, अंधेरी, बांद्रा और साउथ मुंबई जैसे बेहद पॉश इलाकों में भी इस बार भारी जलभराव देखा गया है, जहां घरों की कीमतें 50,000 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये प्रति वर्ग फुट से भी अधिक हैं.

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करोड़ों खर्च करके भी बिजली-पानी को तरसे लोगकरोड़ों खर्च करके भी बिजली-पानी को तरसे लोग (Photo-PTI) करोड़ों खर्च करके भी बिजली-पानी को तरसे लोगकरोड़ों खर्च करके भी बिजली-पानी को तरसे लोग (Photo-PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:47 AM IST

मुंबई में जारी मूसलाधार बारिश ने यह साबित कर दिया है कि करोड़ों रुपये का आलीशान घर भी शहर की मॉनसूनी आफत से सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकता. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे एक्स और रेडिट पर ऐसे वीडियो और पोस्ट की बाढ़ आ गई है, जिनमें शहर के बेहद महंगे और प्रीमियम रिहायशी प्रोजेक्ट्स में पानी रिसने, बेसमेंट डूबने और जलभराव की गंभीर स्थिति दिखाई दे रही है. 

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एक शख्स ने एक्स पर आलीशान इमारतों में रहने वाले लोगों की बेबसी और शहर के कमजोर बुनियादी ढांचे पर गहरा दुख जताया है. उन्होंने लिखा कि ' एक 21 मंजिला ऊंची इमारत में पिछले 24 घंटे से भी ज्यादा समय से जनरेटर खराब है और लिफ्ट काम नहीं कर रही हैं.'  वे सवाल उठाते हैं कि ऐसी गगनचुंबी इमारतों का आखिर क्या फायदा, जहां लोग करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी बिजली, पीने के साफ पानी, सड़कों के जानलेवा गड्ढों और जलभराव जैसी बेहद बुनियादी समस्याओं के लिए तरस रहे हैं और सिस्टम से लड़ रहे हैं.

लोगों की शिकायत है कि  चारों तरफ सिर्फ ऊंची-ऊंची इमारतें दिखाई देती हैं, लेकिन सड़कों पर घुटनों तक पानी भरा हुआ है और लोग रेलवे स्टेशन जाने के लिए ऑटो-रिक्शा की लंबी-लंबी कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं. आम जनता की जिंदगी से जुड़ी ये बेहद बुनियादी समस्याएं आज तक हल नहीं हो पाई हैं, लेकिन इसके बावजूद मुंबई में करोड़ों रुपये के घर बिना किसी बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर के देखे धड़ल्ले से बिक रहे हैं.

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बारिश से बेहाल लोग

एक यूजर ने लिखा है- अब वह समय आ गया है जब हमें इस बात की पूरी पारदर्शिता चाहिए कि आखिर इन सड़कों और बुनियादी सुविधाओं को बनाने का ठेका किसे मिला था और इसे किसने बनाया है. जब एक आम आदमी अपना इनकम टैक्स रिटर्न भरता है, तो सरकार उससे एक-एक पैसे का हिसाब और हर छोटी-बड़ी जानकारी मांगती है, लेकिन दूसरी तरफ करोड़ों रुपये के ये सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स और काम पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिए जाते हैं और इनकी कोई जवाबदेही नहीं होती. '


यह स्थिति साफ तौर पर दर्शाती है कि मुंबई की मूसलाधार बारिश का असर सिर्फ झुग्गियों या आम इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि करोड़ों के फ्लैटों में रहने वाले अमीर लोग भी इसकी चपेट में हैं. जब ऊंची सोसायटियों में लिफ्ट बंद हो जाती है, तो ऊपरी मंजिलों पर रहने वाले बुजुर्ग और बीमार लोग अपने ही घरों में कैद होकर रह जाते हैं. 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि मॉनसून का यह समय संभावित खरीदारों के लिए किसी भी प्रॉपर्टी की असली गुणवत्ता परखने का सबसे सबसे अच्छा मौका होता है. साल के बाकी दिनों में जो कमियां छिपी रहती हैं, वे भारी बारिश के दौरान जलभराव, सीपेज, खराब ड्रेनेज, खिड़कियों से पानी टपकने और लिफ्ट के बंद होने जैसी समस्याओं के रूप में खुलकर सामने आ जाती हैं.

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यही वजह है कि एक्सपर्ट्स खरीदारों को सलाह देते हैं कि वे इस मौसम में न केवल अपार्टमेंट बल्कि पूरी बिल्डिंग के इंफ्रास्ट्रक्चर और मेंटेनेंस का बारीकी से निरीक्षण करें. इसके लिए भारी बारिश के दौरान या तुरंत बाद साइट पर जाना चाहिए ताकि पार्किंग, बेसमेंट और कॉमन एरिया में पानी के जमाव की स्थिति देखी जा सके.
 
मुंबई की इस स्थिति ने स्पष्ट कर दिया है कि सिर्फ लोकेशन या ऊंची कीमत देखकर नहीं, बल्कि मॉनसून में प्रॉपर्टी के प्रदर्शन को देखकर ही उसकी मजबूती और दीर्घकालिक उपयोगिता का सही आंकलन किया जा सकता है.

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