घर खरीदने की रेस में युवाओं का दबदबा, 90% से ज्यादा खरीदार मिलेनियल्स-जेन Z

भारत के हाउसिंग मार्केट में अब युवाओं का राज है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, 90-95% खरीदार अब मिलेनियल्स और जेन-जेड हैं, जो बैंक जाने के बजाय डिजिटल लोन और डिजीलॉकर पर भरोसा कर रहे हैं. आखिर कैसे युवाओं ने बदली रियल एस्टेट की चाल और क्यों छोटे शहर महानगरों को पीछे छोड़ रहे हैं? यहां जानें सबकुछ...

Advertisement
मिलेनियल्स और जेन-जेड ने संभाली प्रॉपर्टी बाजार की कमान (Photo: ITG) मिलेनियल्स और जेन-जेड ने संभाली प्रॉपर्टी बाजार की कमान (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 17 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:25 PM IST

अब वो जमाना बीत गया जब लोग रिटायरमेंट के करीब पहुंचकर घर खरीदने की प्लानिंग करते थे, आज के दौर में तो 25 की उम्र पार करते ही अपनी छत का सपना युवाओं की आंखों में सजने लगता है. भारत के प्रॉपर्टी बाजार की कमान अब पूरी तरह से युवाओं के हाथ में है. 'बेसिक होम लोन' की ताजा रिपोर्ट 'हाउ इंडिया फाइनेंस इट्स हाउसिंग ड्रीम्स' में एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में आवासीय संपत्तियों की कुल खरीद में करीब 90-95% हिस्सेदारी अब मिलेनियल्स और जेन-जेड (Gen Z) पीढ़ी की है.

Advertisement

यह रिपोर्ट 7,400 से अधिक मौजूदा और भावी घर खरीदारों के फीडबैक पर आधारित है. इसमें सबसे दिलचस्प बात यह है कि ये युवा बैंक की लंबी लाइनों में लगने के बजाय, अपने स्मार्टफोन के एक क्लिक पर घर के मालिक बन रहे हैं.

आज के दौर में 40 साल से कम उम्र वाले युवाओं के लिए ऑनलाइन होम लोन लेना अब कोई मजबूरी नहीं, बल्कि उनकी पहली पसंद बन गया है. रिपोर्ट बताती है कि इस आयु वर्ग के करीब 72% लोग बैंक की शाखा जाने के बजाय डिजिटल तरीके से आवेदन करना ज्यादा सुरक्षित और आसान समझते हैं.

यह भी पढ़ें: देश के सबसे महंगे घर मुंबई में, क्या है इस शहर की लग्जरी ताकत?

डिजीलॉकर बना नए जमाने का हीरो

इस पूरे बदलाव में अगर किसी ने सुपरहीरो की तरह एंट्री मारी है, तो वो है डिजीलॉकर. रिपोर्ट की मानें तो, होम लोन के लिए डिजीलॉकर का सहारा लेने वाले करीब 80% यूजर्स की उम्र 35 साल या उससे भी कम है. सच तो यह है कि कागजी कार्रवाई का झंझट खत्म होने और लोन की फटाफट मंजूरी मिलने से अब अपना घर खरीदने का सपना न सिर्फ तनावमुक्त हुआ है, बल्कि इसमें पारदर्शिता भी आई है. बेसिक होम लोन के सीईओ अतुल मोंगा का भी यही मानना है कि युवाओं की यह डिजिटल पसंद पूरे बैंकिंग और हाउसिंग इकोसिस्टम को एक नया और आधुनिक आकार दे रही है.

Advertisement

महानगरों को मात दे रहे हैं छोटे शहर

अक्सर हमें लगता है कि घर खरीदने की यह होड़ सिर्फ दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े महानगरों तक ही सीमित है, लेकिन सच तो यह है कि अब टियर-2 और टियर-3 यानी छोटे शहर इस रेस में सबको पीछे छोड़ रहे हैं. बेहतर इंटरनेट और शानदार डिजिटल सुविधाओं ने छोटे शहरों के युवाओं को भी बड़े सपने देखने की हिम्मत और हौसला दिया है. इन इलाकों में खासकर 11 से 20 लाख रुपये के बजट वाले घरों की डिमांड सबसे ज्यादा बढ़ी है, जहां होम लोन की पहुंच लगभग 74% तक देखी जा रही है.

यह भी पढ़ें: नया प्लॉट खरीदने जा रहे हैं? जेब ढीली करने से पहले चेक कर लें ये दस्तावेज

बजट और भरोसे की बड़ी चुनौती

डिजिटल तरक्की के बावजूद कुछ बातें आज भी खरीदारों को परेशान करती हैं. सर्वे में शामिल करीब 76% लोगों का मानना है कि जरूरत से ज्यादा कागजी कार्रवाई और गलत तरीके से की जाने वाली बिक्री आज भी बड़ी समस्या हैं. बजट की बात करें तो, कम आय वाले परिवार अपनी कमाई का करीब 25% हिस्सा ही ईएमआई (EMI) में देना सही समझते हैं, ताकि उनकी बाकी जरूरतों पर असर न पड़े. वहीं, बड़े शहरों के खरीदार अपनी कमाई का 40% तक हिस्सा ईएमआई में देने का जोखिम उठाने को तैयार रहते हैं. जबकि कुछ युवा आज भी लंबी वित्तीय जिम्मेदारी और डाउन पेमेंट की भारी रकम की वजह से घर खरीदने से थोड़ा हिचकिचाते हैं.
 

---- समाप्त ----

TOPICS:
Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement