अपना एक प्लॉट होना हर किसी का सपना होता है, लेकिन जमीन-जायदाद के मामलों में एक छोटी सी लापरवाही आपकी जिंदगी भर की कमाई पर भारी पड़ सकती है. अक्सर लोग जल्दबाजी में या ब्रोकर के कहने पर पैसा लगा देते हैं, लेकिन बाद में कानूनी चक्करों में फंस जाते हैं. साल 2026 में जमीन खरीदने के नियम काफी बदल चुके हैं और अब डिजिटल सुरक्षा भी इसमें जुड़ गई है. इसलिए, जेब से पैसा निकालने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि जो जमीन आप खरीद रहे हैं, वह कानूनी रूप से बिल्कुल साफ-सुथरी हो. चलिए जानते हैं उन जरूरी कागजों के बारे में, जो आपकी इस डील को पक्की और सुरक्षित बनाएंगे.
सबसे पहले चेक करें मालिकाना हक
जमीन खरीदने की शुरुआत हमेशा सेल डीड से होती है. यह वह कागज है जो गारंटी देता है कि बेचने वाला व्यक्ति ही उस जमीन का असली मालिक है. ध्यान रखें, कभी भी सिर्फ फोटोकॉपी पर भरोसा न करें, हमेशा ओरिजिनल डॉक्यूमेंट देखने की मांग करें. इसके साथ ही यह भी देख लें कि बेचने वाले के पास उसे आगे बेचने का पूरा अधिकार है या नहीं. आज के दौर में आप राज्य सरकार की वेबसाइट पर जाकर खुद भी मालिक का नाम वेरिफाई कर सकते हैं.
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कर्ज और पुराने विवादों की जांच
कोई भी प्लॉट लेने से पहले यह जानना बहुत जरूरी है कि उस पर कोई पुराना लोन या कानूनी विवाद तो नहीं चल रहा. इसके लिए आपको भार प्रमाणपत्र यानी ईसी (Encumbrance Certificate) देखना चाहिए. यह सर्टिफिकेट उप-पंजीयक कार्यालय से मिलता है और एक निश्चित समय के लिए जारी किया जाता है. अगर जमीन पर कोई बैंक लोन होगा, तो उसकी जानकारी यहां मिल जाएगी. साथ ही, बैंक से भी एक स्टेटमेंट जरूर लें ताकि पारदर्शिता बनी रहे.
खेती की जमीन या रहने लायक?
एक बात का खास ख्याल रखें कि भारत में ज्यादातर जमीनें सरकारी रिकॉर्ड में खेती की जमीन (Agriculture Land) मानी जाती हैं. अब जाहिर है कि आप खेती की जमीन पर सीधे घर नहीं बना सकते. इसके लिए उस जमीन का NA (नॉन-एग्रीकल्चर) होना जरूरी है, यानी उसे खेती से अलग किसी दूसरे काम के लिए मंजूर कराया गया हो. लेकिन यहां भी एक पेंच है, नॉन-एग्रीकल्चर जमीन भी कई तरह की होती है, कोई गोदाम बनाने के लिए होती है तो कोई दुकान या ऑफिस के लिए. इसलिए, घर बनाने के लिए आपको पक्के तौर पर 'NA-Residential' का सर्टिफिकेट ही चेक करना चाहिए. अगर जमीन आवासीय (Residential) के लिए मंजूर नहीं है, तो वहां घर बनाना आगे चलकर कानूनी मुसीबत बन सकता है.
मदर डीड: जमीन का पूरा रिकॉर्ड
इसे आप जमीन की कुंडली या इतिहास की किताब कह सकते हैं. मदर डीड यह बताती है कि यह जमीन पिछले कई दशकों में किस-किस के पास रही. पहले मालिक से लेकर आज के बेचने वाले तक, मालिकाना हक की यह कड़ी (Chain) कहीं से भी टूटी नहीं होनी चाहिए. अगर बीच का कोई भी एक कागज गायब है, तो भविष्य में कोई भी उस जमीन पर अपना दावा ठोक सकता है. कोई भी बड़ा बैंक या वकील इस चेन के बिना आपकी डील को हरी झंडी नहीं देगा.
कानूनी राय और एनओसी
इतने सारे कागजों को खुद समझना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, इसलिए लीगल सर्च रिपोर्ट(LSR) बनवा लेना सबसे समझदारी भरा काम है. आपका वकील सभी कागजों की जांच करके यह रिपोर्ट लिखता है कि टाइटल क्लियर है या नहीं. इसके अलावा, घर बनाने के लिए आपको बिजली, सीवेज और प्रदूषण विभाग जैसे अलग-अलग ऑफिस से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) भी लेने होंगे.
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डिजिटल दौर की नई सुरक्षा
साल 2026 में सबसे बड़ा बदलाव है भू-आधार या ULPIN. यह जमीन का 14 अंकों का एक डिजिटल नंबर होता है, जो जीपीएस (GPS) लोकेशन पर आधारित है. जैसे हमारा आधार कार्ड होता है, वैसे ही अब हर प्लॉट का अपना डिजिटल आईडी है. इसे स्कैन करके आप तुरंत जान सकते हैं कि जमीन का असली मालिक कौन है. इससे धोखाधड़ी की गुंजाइश खत्म हो जाती है और बैंक से लोन मिलना भी बहुत आसान हो जाता है.
खाता प्रमाणपत्र और टैक्स रसीदें
अंत में, स्थानीय नगर निगम या अथॉरिटी से खाता प्रमाणपत्र जरूर देखें. यह साबित करता है कि प्रॉपर्टी का रिकॉर्ड सरकारी दफ्तर में दर्ज है. साथ ही, पिछले मालिक ने अब तक के सारे प्रॉपर्टी टैक्स भरे हैं या नहीं, इसकी रसीदें भी जरूर चेक कर लें, ताकि पुराने बकाये का बोझ आपके सिर न आए.
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