JP प्रॉपर्टी विवाद: अडानी के खिलाफ कोर्ट में वेदांता, SC ने कहा- NCLAT करे फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा कि यदि मॉनिटरिंग कमेटी इस दौरान कोई भी बड़ा 'नीतिगत फैसला' लेना चाहती है, तो उसे पहले NCLAT से अनुमति लेनी होगी.

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10 अप्रैल को NCLAT की सुनवाई होगी (Photo-ITG) 10 अप्रैल को NCLAT की सुनवाई होगी (Photo-ITG)

अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली,
  • 06 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:55 PM IST

जेपी इंफ्राटेक के अधिग्रहण को लेकर छिड़ी कॉर्पोरेट जंग देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच गई है. अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता (Vedanta) ने अडानी समूह द्वारा जेपी की संपत्तियों के अधिग्रहण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. वेदांता ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें अडानी ग्रुप (Adani Group) को रेजोल्यूशन प्लान के तहत जेपी की संपत्तियों को संभालने की मंजूरी दी गई थी.

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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वेदांता की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि उनकी कंपनी ने बड़ी बोली लगाई  थी. सिब्बल ने कहा, "हमारी बोली अडानी की तुलना में 3000 करोड़ रुपये अधिक थी. हमें बकायदा पत्र देकर बताया गया था कि हम सबसे ऊंचे बोलीदाता हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रक्रिया में विसंगतियां बरती गईं." वेदांता ने कोर्ट से गुहार लगाई कि जब तक इस मामले की पूरी सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक संपत्तियों का ट्रांसफर नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने विशेष रूप से फॉर्मूला 1 (F1) ट्रैक और कई अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स के अधिग्रहण पर चिंता जताई.

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प्रक्रिया पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान जेपी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील ए.एम. सिंघवी ने कहा कि रेजोल्यूशन प्रोफेशनल ने इस पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया कि किसकी योजना बेहतर है. वहीं, अडानी समूह का पक्ष रखते हुए मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया कि वेदांता ने शुरुआती स्तर पर योजना का विरोध नहीं किया था. जस्टिस बागची ने इस दौरान टिप्पणी की कि क्रेडिटर्स की समिति (COC) के किसी भी बड़े फैसले या कदम के लिए संबंधित अधिकारियों और ट्रिब्यूनल का अनुमोदन अनिवार्य है.

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सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT को सौंपी जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, क्योंकि यह मामला पहले से ही 10 अप्रैल को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के पास सुनवाई के लिए लगा हुआ है. कोर्ट ने NCLAT से अनुरोध किया कि वह तय तारीख (10 अप्रैल) पर ही इस मामले की सुनवाई करे. चूंकि अपील पर जल्द फैसला होने की उम्मीद है, इसलिए कोर्ट ने कोई नया स्टे ऑर्डर जारी नहीं किया.

क्या है पूरा विवाद?

यह पूरा मामला जेपी इंफ्राटेक की वित्तीय बदहाली और कर्जदाताओं का पैसा वसूलने से जुड़ा है. अडानी ग्रुप ने एक रेजोल्यूशन प्लान के जरिए इसकी संपत्तियों (जिसमें जमीन, रियल एस्टेट और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स शामिल हैं) के अधिग्रहण की बोली जीती थी. हालांकि, वेदांता का आरोप है कि उनकी ऊंची बोली को दरकिनार कर प्रक्रिया के साथ समझौता किया गया है. 

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