दिल्ली के O-Zone में बुलडोजर! क्या आपकी प्रॉपर्टी भी खतरे में, चेक करें अपना जोन

जब भी हम दिल्ली-एनसीआर में अपने सपनों का घर खरीदते हैं, तो अक्सर कीमत, लोकेशन और मेट्रो कनेक्टिविटी ही देखते हैं. लेकिन यमुना के 'O-Zone' में हाल ही में चले प्रशासन के बुलडोजर ने यह साबित कर दिया है कि घर खरीदने से पहले सबसे जरूरी चीज़ है जोन की जानकारी.

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ओ-जोन में कार्रवाई के बीच समझें दिल्ली का जोनल विभाजन (Photo-Pexles) ओ-जोन में कार्रवाई के बीच समझें दिल्ली का जोनल विभाजन (Photo-Pexles)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 03 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:53 AM IST

दिल्ली के O-Zone जोन इलाकों में बुलडोजर एक्शन चल रहा है. दिल्ली हाई कोर्ट के कड़े रुख के बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण और प्रशासन ने यमुना नदी के डूब क्षेत्र यानी 'O-Zone' में आने वाले मजनू का टीला, वजीराबाद, जगतपुर और मोनेस्ट्री मार्केट जैसे इलाकों में अवैध निर्माणों पर बड़ा बुलडोजर एक्शन लिया है.  इस एक्शन के बाद लोगों में यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है कि आखिर दिल्ली को विकास और मास्टर प्लान के लिहाज से कितने जोनों में बांटा गया है और उनका खुद का इलाका किस जोन में आता है.

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डीडीए के मास्टर प्लान के मुताबिक, दिल्ली के सुनियोजित विकास के लिए पूरी राजधानी को कुल 15 प्लानिंग जोनों में बांटा किया गया है, जो A से P तक, (I को छोड़कर) से पहचाना जाता है. इसमें सबसे पहला Zone A पुरानी दिल्ली और चारदीवारी के भीतर के हिस्सों जैसे चांदनी चौक, जामा मस्जिद, कश्मीरी गेट, पहाड़गंज और सदर बाजार को कवर करता है,  इसके ठीक बगल में Zone B आता है, जो पुरानी दिल्ली का विस्तार है और इसके तहत करोल बाग, पटेल नगर, आनंद पर्वत और सराय रोहिल्ला जैसे मुख्य क्षेत्र शामिल हैं. उत्तरी दिल्ली की बात करें तो Zone C के अंतर्गत आजादपुर, सिविल लाइंस, कमला नगर, दिल्ली यूनिवर्सिटी नॉर्थ कैंपस, मॉडल टाउन और अशोक विहार जैसे इलाके आते हैं.

देश की सत्ता के केंद्र और वीवीआईपी हिस्से को Zone D में रखा गया है, जिसमें पूरी लुटियंस दिल्ली, कनॉट प्लेस, चाणक्यपुरी, खान मार्केट और लोधी रोड शामिल हैं।.वहीं, यमुना पार के पूरे क्षेत्र यानी पूर्वी दिल्ली को Zone E कहा जाता है, जिसमें शाहदरा, मयूर विहार, लक्ष्मी नगर, प्रीत विहार और आनंद विहार जैसे घनी आबादी वाले इलाके आते हैं.

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दक्षिण दिल्ली के प्रमुख और विकसित हिस्सों को Zone F में शामिल किया गया है, जिसके तहत साकेत, वसंत कुंज, ग्रेटर कैलाश, ग्रीन पार्क, हौज खास और नेहरू प्लेस आते हैं. पश्चिमी दिल्ली का मुख्य हिस्सा Zone G कहलाता है, जिसमें राजौरी गार्डन, पंजाबी बाग, जनकपुरी, विकासपुरी और उत्तम नगर जैसे बड़े रिहायशी और कमर्शियल इलाके शामिल हैं. 

उत्तर-पश्चिम दिल्ली के सुनियोजित विकास के तहत Zone H में रोहिणी फेज 1 और 2, पीतमपुरा, शालीमार बाग और सरस्वती विहार को रखा गया है. इसके विपरीत, दक्षिण दिल्ली के बाहरी और ग्रामीण व अर्बन विलेज इलाकों जैसे महरौली, छतरपुर, सैनिक फार्म्स और घिटोरनी को Zone J के अंतर्गत रखा गया है. दक्षिण-पश्चिम दिल्ली का एक बड़ा हिस्सा Zone K में आता है, जिसमें पूरी द्वारका सब-सिटी, नजफगढ़, पालम और इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट का क्षेत्र शामिल है. सुदूर पश्चिमी ग्रामीण बॉर्डर और टिकरी कलां और नजफगढ़ जैसे इलाकों को Zone L में रखा गया है. 

रोहिणी फेज 3, 4, 5, मंगोलपुरी और सुल्तानपुरी को Zone M में शामिल किया गया है. इसके और आगे हरियाणा बॉर्डर से सटे बाहरी ग्रामीण हिस्सों जैसे बवाना, कंझावला और अलीपुर को Zone N के तहत रखा गया है. इसके बाद आता है सबसे चर्चित Zone O, जो पूरी तरह से यमुना नदी का डूब क्षेत्र है.  इसी जोन में मजनू का टीला, जगतपुर और मदनपुर खादर का कछार आता है जहां हाल ही में बुलडोजर चला है. आखिरी हिस्सा Zone P है, जिसे P-I और P-II में बांटा गया है और इसके अंतर्गत नरेला सब-सिटी, अलीपुर और बुराड़ी जैसे उत्तरी दिल्ली के इलाके आते हैं. 

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