- आमतौर पर लोग निवेश वहीं करते हैं जहां फंड की सुरक्षा के साथ कम जोखिम होता है. ऐसी स्थिति में लोग रिटर्न पर ज्यादा जोर नहीं देते हैं. यही वजह है कि सरकार की लघु बचत योजना और बैंकों में सावधि जमा वरिष्ठ नागरिकों के लिए सबसे पसंदीदा विकल्प हैं.
हालांकि, ये सुरक्षित विकल्प औसत रिटर्न देते हैं जो केवल महंगाई में हो रही वृद्धि की भरपाई करता है. कहने का मतलब ये है कि जो रिटर्न मिलता है वो सिर्फ महंगाई की ग्रोथ रेट की मार को रोक पाता है. ऐसे में आपके पास बड़ा फंड तैयार नहीं हो पाता है. अगर आपको बड़ा फंड चाहिए तो थोड़ा रिस्क भी लेना होगा.
- बुढ़ापे में सुकून से रिटायरमेंट के लिए यह जरूरी है कि आप अभी से निवेश करना शुरू कर दें. जितनी कम उम्र में आप निवेश शुरू करेंगे आप पर बोझ कम पड़ेगा और रिटायरमेंट के बाद एक बड़ा फंड मिल जाएगा.
- औसतन भारत में महिला अपने पुरुष समकक्षों की तुलना में अधिक समय तक जीवित रहती हैं. उदाहरण के लिए 60 साल की उम्र में पुरुष की जीने की उम्मीद 17 साल की होती है, तो वहीं इसी उम्र में महिला को 19 साल तक जीने की उम्मीद होती है.
कहने का मतलब यह है कि अगर आपकी और जीवनसाथी के बीच उम्र का अंतर ज्यादा है तो बुढ़ापे में पत्नी से पहले आपकी मृत्यु होने की आशंका होगी. आपकी जीवनसाथी को अकेले रहना पड़ सकता है. ऐसे में जरूरी है कि जीवनसाथी के रिटायरमेंट की भी योजना पर गंभीरता से विचार किया जाए.
- आप सरकारी या किसी संगठित क्षेत्र के कर्मचारी हैं तो आपके पास EPF / EPS या NPS जैसे बचत के मजबूत माध्यम हैं. कुछ लोग पब्लिक प्रोविडेंट (पीपीएफ) के जरिए भी रिटायरमेंट फंड जुटाते हैं. इन निश्चित आय विकल्पों के अलावा, आप म्यूचुअल फंडों में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी के माध्यम से भी निवेश किया जा सकता है.लंबी अवधि के एसआईपी में निवेशको को हाई रिटर्न मिलता है.
- बुढ़ापे में पैसों की झंझट से मुक्ति के लिए जरूरी है कि आप लॉन्ग टर्म रिटायरमेंट फंड पर जोर दें. कहने का मतलब ये है कि सिर्फ 10-15 साल के लिए योजना बनाना पर्याप्त नहीं हो सकता है क्योंकि आपको एक ऐसे फंड के साथ तैयार रहना होगा जो आरामदायक जीवन जीने में मदद कर सके.