घर पर खाना बनाना और थाली की लागत में बड़ी बढ़ोतरी हुई है. मई के दौरान टमाटर की बढ़ती कीमतों ने थाली के दाम बढ़ा दिए हैं. क्रिसिल इंटेलिजेंस नए रोटी राइस रेट (RRR) रिपोर्ट के अनुसार, शाकाहारी थाली की कीमत में पिछले साल की तुलना में 5% की बढ़ोतरी हुई, जबकि मांसाहारी थाली पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 7% महंगी हो गई.
यह बढ़ोतरी अप्रैल में हुई मामूली बढ़ोतरी के बाद हुई है, जो इस बात को उजागर करती है कि हाल के सप्ताह में खाने की महंगाई का दबाव कैसे बढ़ गया है, क्योंकि सब्जियों और खाना पकाने के गैस की कीमतें बढ़ गई हैं.
मई में टमाटर की कीमतें
टमाटर की कीमतों में मई में पिछले साल की तुलना में 57% की बढ़ोतरी देखी गई और यह पिछले साल के 23 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 36 रुपये प्रति किलो हो गया. उत्पादन में 3-4% की गिरावट, गर्मी के फसल के रकबे में कमी और प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में गर्मी से उपज को हुए नुकसान के कारण कीमतों में यह तेज बढ़ोतरी हुई है.
क्रिसिल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर पुष्पन शर्मा ने कहा कि टमाटर, वनस्पति तेल और LPG की बढ़ती कीमतों के कारण मई में घर पर पकाई जाने वाली शाकाहारी और मांसाहारी थालियों की लागत में 5% और 7% की सालाना बढ़ोतरी हुई है. टमाटर की कीमतों में भी महीने-दर-महीने 23% की बढोतरी हुई है, जिससे खाद्य और ऊर्जा की बढ़ी हुई लागतों से पहले से ही तनावग्रस्त घरेलू बजट पर और अधिक दबाव पड़ रहा है.
घरेलू खर्च में भी बढ़ोतरी
टमाटर के अलावा, वनस्पति तेल और खाना पकाने वाली गैस की बढ़ती कीमतों ने भी घर पर खाना बनाने की लागत को बढ़ा दिया है. ग्लोबल आपूर्ति में जारी रुकावट के कारण वनस्पति तेल की कीमतों में साल दर साल 8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि LPG की कीमतों में 7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.
रसोई में उपयोग होने वाली इन आवश्यक वस्तुओं ने मिलकर सब्जियों की बढ़ती कीमतों के प्रभाव को और बढ़ा दिया और अन्य खाद्य पदार्थों से मिलने वाली राहत को बेअसर कर दिया. परिवारों के लिए खान पकाने के ईंधन, खाद्य तेल और सब्जियों की बढ़ती लागत के कारण डेली फूड की लागत में बड़ी बढ़ोतरी हुई है.
आज टमाटर, कल प्याज और आलू हो सकते हैं महंगे
मई में थाली की कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण टमाटर थे, लेकिन उपभोक्ताओं को जल्द ही प्याज और आलू से एक और चुनौती का सामना करना पड़ सकता है. दिलचस्प बात यह है कि महीने के दौरान दोनों सब्जियों से कुछ राहत मिली. आलू की कीमतें पिछले साल की तुलना में 14% कम रहीं, जिसका कारण रबी की अधिक फसल और कोल्ड स्टोरेज में रखे स्टॉक का निपटान था. रबी की नई फसल आने के बाद प्याज की कीमतें भी पिछले साल की तुलना में 6% कम हो गईं.
रबी की कटाई का मौसम समाप्त होने के साथ ही, कोल्ड स्टोरेज में रखे गए महंगे आलू के स्टॉक के बाजार में आने की उम्मीद है, जिससे खुदरा कीमतों में उछाल आएगा. इस साल रबी उत्पादन में अनुमानित 5% की गिरावट के कारण प्याज की आपूर्ति कम होने से प्याज की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है. इस बीच, उत्तरी राज्यों में गर्मी के मौसम में कम बुवाई और गर्मी से संबंधित व्यवधानों के कारण जून-अगस्त तक टमाटर की कीमतें ऊंची रहने की उम्मीद है.
मांसाहारी थाली की कीमत
ब्रॉयलर चिकन की बढ़ती कीमतों के कारण मांसाहारी थाली की लागत में बढ़ोतरी और भी ज्यादा थी. मांसाहारी भोजन की कुल लागत का लगभग आधा हिस्सा चिकन पर खर्च होता है. क्रिसिल के अनुसार, भीषण गर्मी के कारण पक्षियों की मृत्यु दर में वृद्धि हुई, जिससे पोल्ट्री की आपूर्ति कम हो गई और ब्रॉयलर मुर्गियों की कीमतों में सालाना लगभग 9% की वृद्धि हुई. टमाटर, वनस्पति तेल और एलपीजी की बढ़ती कीमतों के साथ मिलकर, इस वृद्धि ने मांसाहारी भोजन की लागत को काफी बढ़ा दिया.
आजतक बिजनेस डेस्क