इंडिगो (IndiGo) को कोर्ट में एक 80 साल की बुजुर्ग महिला से करारी हार मिली है. कर्नाटक के राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एयरलाइंस को महिला के साथ फ्लाइट में अनुचित व्यवहार के लिए कड़ी फटकार लगाते हुए मुआवजा देने का फैसला सुनाया है. इसके चलते IndiGo को 13000 रुपये के आसपास की सीट के लिए 55000 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया गया है. ये पूरा मामला साल 2023 का है, जिसमें बुजुर्ज महिला को जीत मिली है.
क्या था पूरा मामला?
इंडिगो के लिए सिरदर्द साबित हुआ ये पूरा मामला साल 2023 के दिसंबर महीने का है, जब बेंगलुरु की रहने वाली करीब 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला अंशु ए अमीन ने Bengaluru से अहमदाबाद के लिए इंडिगो फ्लाइट बुक की थी. अपनी दो सर्जरी करवाने वाली इस महिला ने आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए खासतौर पर एक्स्ट्रा लेगरूम और व्हीलचेयर सर्विस वाली फ्रंट रो प्रीमियम सीट (1B) बुक की थी और इस प्रीमियम सीट और अतिरिक्त सेवाओं के लिए 13906 रुपये का पेमेंट किया था.
एक सीट के लिए इतना पेमेंट करने के बाद ये महिला जब विमान में चढ़ने लगी, तो अचानक उन्हें बताया गया कि उनकी आरक्षित सीट को बदलकर 28वीं रो में मिडिल सीट 28B कर दिया गया है. यही नहीं महिला ने अपनी शिकायत में ये भी बताया कि एयरलाइन कर्मचारियों ने कथित तौर पर उनसे कहा कि यदि विमान में चढ़ना है, तो उनके पास इस बदली हुई सीट पर यात्रा करने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं है. महिला ने आगे बताया कि नई सीट पर पैरों को फैलाने के लिए पर्याप्त जगह न होने के कारण उन्हें पूरी यात्रा के दौरान पीठ और पैरों में असहनीय दर्द का सामना करना पड़ा.
पहले 8 हजार, अब 55000 का पेमेंट
महिला की शिकायत पर बेंगलुरु जिला उपभोक्ता आयोग ने पहले इंडिगो की सेवा में खामी मिलने पर उसे 8,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश किया था, लेकिन अपील पर राज्य आयोग ने बुजुर्ग यात्री द्वारा झेली गई शारीरिक पीड़ा, असुविधा और मानसिक कष्ट को देखते हुए इस मुआवजा राशि को मामूली करार दिया.
राज्य आयोग के न्यायिक सदस्य रवि शंकर और सुनीता सी. बागेवाड़ी की पीठ ने अब इंडिगो को 30 दिनों के भीतर मुआवजे के तौर पर 50,000 रुपये और मुकदमेबाजी खर्च के लिए 5,000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया. भुगतान न करने की स्थिति में इस पर 6% सालाना ब्याज भी लागू किए जाने का फैसला सुनाया है.
इंडिगो ने मानी अपनी गलती
रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य आयोग के सामने इंडिगो ने अपनी गलती को स्वीकार किया और बताया कि महिला की प्रीमियम सीट में बदलाव किया गया था. एयरलाइन के मुताबिक, उस फ्लाइट में ऑडिट कर रहे कर्मचारियों के लिए आगे की रो में एक सीट आरक्षित करनी पड़ी थी, जिसके चलते महिला की 1B सीट को 28B पर चेंज किया गया.
हालांकि, एयरलाइन ने कहा कि महिला ने उस समय बिना किसी आपत्ति के यात्रा पूरी की थी और सर्विस में कोई कमी नहीं की गई थी. लेकिन एयरलाइन के बचाव को खारिज करते हुए आयोग ने पाया कि यात्री ने वास्तविक चिकित्सा जरूरतों के कारण प्रीमियम सीट बुक की थी, न कि सिर्फ सुविधा के लिए.
आजतक बिजनेस डेस्क