Global Recession: कट-कॉपी-पेस्‍ट... 2008 जैसी महामंदी की स्क्रिप्‍ट लिख रहे ट्रंप?

जिस हिसाब से तेल की कीमतें ऊपर जा रही हैं, अर्थव्‍यवस्‍थाओं में मंदी का खतरा बढ़ता जा रहा है. अब एक्‍सपर्ट्स ने दावा किया है कि अगर अगस्‍त तक होर्मुज बंद रहता है तो महामंदी आ सकती है.

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2008 वाली मंदी आने का खतरा. (Photo: AI Generated) 2008 वाली मंदी आने का खतरा. (Photo: AI Generated)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 22 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:55 AM IST

साल 2008 में जिस तरह से महामंदी आई थी, ठीक वैसा ही कुछ अब हो रहा है और इसके पीछे की बड़ी वजह होर्मुज का बंद होना बताया जा रहा है. रैपिडन एनर्जी ग्रुप का कहना है कि अगस्त तक होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने से 2008 की महामंदी के समान आर्थिक संकट का खतरा बढ़ जाता है. 

एडवाइजरी फर्म ने कहा कि उनके अनुमान के अनुसार, यह रास्‍ता जुलाई में फिर से खुल जाएगा, जिससे तेल की औसत मांग में हर दिन 2.6 मिलियन बैरल की कमी आएगी और बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की फ्यूचर मार्केट वैल्‍यू गर्मियों में लगभग 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाएगा. 

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रैपिडन ने कहा कि जुलाई के बाद भी रुकावट जारी रहने की स्थिति में अगस्त और सितंबर के दौरान आपूर्ति में आए झटके की भरपाई के लिए मांग में और भी अधिक गिरावट की आवश्यकता होगी, जो संभावित रूप से 2026 में वैश्विक तेल खपत में सालाना गिरावट को ट्रिगर करने के लिए पर्याप्त हो सकती है. 

दोनों देशों के बीच अच्‍छी बातचीत? 
यह चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब गुरुवार को अमेरिका और ईरान ने तेहरान के यूरेनियम भंडार और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर अपने विपरीत रुख को बरकरार रखा, हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि बातचीत में कुछ अच्छे संकेत मिले हैं. 

इसमें यह भी कहा गया है कि कई एक्‍सपर्ट्स को इस साल ग्‍लोबल मांग में एक असामान्‍य गिरावट की आशंका है. अमेरिका, इजरयल और ईरान के बीच जंग ने ग्‍लोबल मार्केट को अस्‍त-व्‍यस्‍त कर दिया है और महंगाई में बढ़ोतरी और विकास में मंदी की आशंका को बढ़ा दिया है, जिसके चलते फरवरी के अंत से तेल की कीमतें करीब दोगुनी हो गई हैं. 

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2008 जैसी मंदी की ओर 
एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि उस समय में भी ऐसे ही तेल की कीमतें ऊपर जा रही थीं. हालांकि, अभी तेल की कीमतें मैक्रोइकॉनॉमिक नजरिए से 1970 के दशक या 2007-08 की तुलना में कम है. रैपिडन के एक्‍सपर्ट्स ने अपने एक नोट में लिखा कि भले ही अभी तेल की कीमतें अपने रिकॉर्ड हाई से काफी नीचे है, लेकिन इससे रिस्‍क खत्‍म नहीं होता है. तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि से वित्तीय और मैक्रोइकॉनॉमिक कमजोरियां और बढ़ सकती हैं. 

ट्रंप लिख रहे स्क्रिप्‍ट? 
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि अमेरिका आखिरी में ईरान के यूरेनियम के भंडार को फिर से हासिल कर लेगा. नहीं तो ईरान इसका उपयोग परमाणु हथियार बनाने के लिए करेगा. हालांकि तेहरान का कहना है कि उसका उद्देश्य पूरी तरह से शांतिपूर्ण बनाए रखना है, इसलिए वह परमाणु हथियार बनाना चाहता है. ऐसे में दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है, जिस कारण कभी तेल की कीमतें ऊपर चढ़ जाती हैं, तो कभी तेल की कीमतें नीचे आ जाती हैं. 

 गुरुवार को अस्थिर कारोबारी सत्र में तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला, युद्ध के समाधान की अनिश्चित संभावनाओं के कारण कीमतें पहले गिरकर 102 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं, लेकिन फिर यह चढ़कर 105 डॉलर के करीब पहुंच गईं. 

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ट्रंप ने कहा है कि अगर उन्हें ईरान की ओर से सही जवाब नहीं मिलते हैं, तो वह ईरान पर हमले फिर से शुरू करने के लिए तैयार हैं. अमेरिका और उसके सहयोगी इजरायल ने फरवरी के अंत में ये हमले शुरू किए थे. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि नए हमलों से ईरान के क्षेत्र से बाहर भी जवाबी कार्रवाई होगी.

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