पिछले तीन साल में घटता गया ​भारत में चीन का FDI, संसद को मोदी सरकार ने बताया 

देश में चीन विरोधी माहौल के बीच चीनी निवेश पर सवाल उठाये जाते रहे हैं, ऐसे में यह आंकड़ा महत्वपूर्ण है. लोकसभा सदस्य एस. जगतरक्षकण और ए.के.पी चिनराज ने इस बारे में जानकारी मांग थी, जिसके जवाब में वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने निवेश के बारे में ब्योरा दिया.

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चीन से भारत आ रहे FDI में कमी चीन से भारत आ रहे FDI में कमी

कमलजीत संधू

  • नई दिल्ली,
  • 14 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 2:52 PM IST
  • चीन से तनातनी के बीच निवेश पर उठे सवाल
  • वित्त राज्य मंत्री ने आंकड़ों को किया स्पष्ट
  • तीन साल में चीन से FDI में लगातार आई कमी

मोदी सरकार ने संसद को जानकारी दी है कि पिछले तीन साल में भारत में चीन का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) लगातार घटा है. देश में चीन विरोधी माहौल के बीच चीनी निवेश पर सवाल उठाये जाते रहे हैं, ऐसे में यह आंकड़ा महत्वपूर्ण है. 

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक साल 2017-18 में भारत में कुल 35.02 करोड़ डॉलर का चीनी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश( FDI) आया था. इसके बाद साल 2018-19 में चीन से आने वाला एफडीआई 22.9 करोड़ डॉलर रहा. साल 2019-20 में यह निवेश और घटकर महज 16.7 करोड़ डॉलर का रह गया. 

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इन सांसदों ने पूछे थे सवाल 

लोकसभा सदस्य एस. जगतरक्षकण और ए.के.पी चिनराज ने इस बारे में जानकारी मांग थी, जिसके जवाब में वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने निवेश के बारे में लिखित ब्योरा दिया.  गौरतलब है कि चीन से सीमा पर जारी तनाव के बीच सरकार चीनी कारोबार और निवेश पर लगातार अंकुश लगाने की कोशिश कर रही है. 

वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि चीन में भारतीय कंपनियों द्वारा किया जाने वाला निवेश भी घटा है. साल 2017 में भारतीय कंपनियों ने चीन में 4.91 करोड़ डॉलर का निवेश किया था. इसके बाद 2018 में यह निवेश घटकर 1.2 करोड़ डॉलर रह गया. साल 2019 में चीन में भारतीय कंपनियों का निवेश 2.57 करोड़ डॉलर और साल 2020 में अब तक यह 2.06 करोड़ डॉलर है. 

आंकड़ों के मुताबिक, भारत में जो विदेशी निवेश यानी FDI आता है उसमें चीन का सिर्फ 0.5 फीसदी का ही हिस्सा है. इतना ही नहीं चीन उन टॉप दस देशों की लिस्ट में भी शामिल नहीं है, जहां से सबसे अधिक FDI भारत में आती है.

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भारत सरकार ने की थी सख्ती 

गौरतलब है कि भारत सरकार ने हाल में एफडीआई नियमों में बदलाव करते हुए कहा था कि भारत के साथ जमीन सीमा साझा करने वाले देशों की किसी भी कंपनी या व्यक्ति को भारत में किसी भी सेक्टर में निवेश से पहले सरकार की मंजूरी लेनी होगी. इस फैसले से चीन जैसे देशों से होने वाले विदेशी निवेश पर असर पड़ेगा.

सरकार का यह फैसला बेहद अहम है. यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि कोविड-19 की वजह से उत्पन्न नाजुक परिस्थितियों का फायदा उठाकर पड़ोसी देशों की विदेशी कंपनियां घरेलू कंपनियों का अधिग्रहण न कर लें.

 

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