जवानी में चली गोली, बुढ़ापे में आया फैसला, 34 साल पुराने केस में बुजुर्ग दोषी, 5 आरोपी थे, 4 की हो चुकी मौत

बिहार के वैशाली जिले में 34 साल पुराने जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. 1992 में दर्ज केस में एक बुजुर्ग आरोपी को दोषी करार दिया गया है. मामले के अन्य चार आरोपी सुनवाई के दौरान ही मौत के कारण बाहर हो गए. दोषी की सजा का ऐलान 2 जून को किया जाएगा.

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बुजुर्ग दीप राय उर्फ जिसा राय दोषी पाए गए.  (Photo: Screengrab) बुजुर्ग दीप राय उर्फ जिसा राय दोषी पाए गए. (Photo: Screengrab)

aajtak.in

  • वैशाली ,
  • 01 जून 2026,
  • अपडेटेड 7:42 PM IST

बिहार के वैशाली जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. तस्वीर में एक बुजुर्ग अदालत परिसर से बाहर निकलता दिखाई दे रहा है. उम्र का असर इतना है कि उन्हें उठने-बैठने और चलने के लिए भी दो लोगों का सहारा लेना पड़ रहा है. लेकिन 34 साल पुराने एक मामले में अदालत का फैसला आने के बाद अब उन्हें कानून का सामना करना पड़ रहा है. मामला वैशाली जिले के राघोपुर प्रखंड क्षेत्र के जुड़ावनपुर गांव का है. यहां वर्ष 1992 में हुए एक जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने फैसला सुनाते हुए एक वृद्ध आरोपी को दोषी करार दिया है.

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जानकारी के अनुसार, 10 मई 1992 को अदालत राय नाम के शख्स ने शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत में कहा गया था कि वह अपनी पत्नी के साथ घर के दरवाजे पर बैठे थे, तभी एक ही परिवार के पांच लोग हथियार लेकर पहुंचे और उन पर हमला कर दिया. इस दौरान फायरिंग और जानलेवा हमला किए जाने का आरोप लगाया गया था.

घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच की और वर्ष 1993 में अदालत में चार्जशीट दाखिल की. इसके बाद केस की सुनवाई शुरू हुई. हालांकि लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के दौरान आरोपित पांच लोगों में से चार की मौत हो गई.

दीप राय उर्फ जिसा राय दोषी पाए गए

मामले में सिर्फ एक आरोपी दीप राय उर्फ जिसा राय जीवित बचे. अब 34 साल बाद अदालत ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया है. अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी की अदालत ने दीप राय को भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148 और 307 के साथ-साथ आर्म्स एक्ट की धारा 134 के तहत दोषी पाया है.

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अदालत ने फिलहाल दोष सिद्ध होने का फैसला सुनाया है, जबकि सजा का ऐलान 2 जून को किया जाएगा. इसके बाद तय होगा कि दोषी को कितनी सजा मिलेगी. यह मामला एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि कानून की प्रक्रिया भले लंबी हो, लेकिन मामलों का निपटारा अंततः होता है.

1993 में दाखिल हुई थी चार्जशीट

34 साल पुराने इस केस में आए फैसले ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीर भी इसी वजह से चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसमें उम्र के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका एक व्यक्ति अदालत के फैसले के बाद न्यायालय परिसर से बाहर निकलता दिखाई दे रहा है.
 

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रिपोर्ट- विकास कुमार

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