सरकारी योजनाओं की असली तस्वीर अक्सर फाइलों से नहीं, बल्कि जमीन पर उतरकर ही दिखाई देती है. बिहार के कटिहार में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने किसी औपचारिक कार्यक्रम या पूर्व निर्धारित निरीक्षण के बजाय अचानक एक सरकारी स्कूल पहुंचकर बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर मिड डे मील खाया. उनका यह कदम केवल भोजन चखने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों के भरोसे, शिक्षा और सरकारी व्यवस्था को करीब से समझने की एक संवेदनशील पहल बन गया.
दरअसल, जिलाधिकारी मनिहारी अनुमंडल के कांटाकोश इलाके में आयोजित सहयोग शिविर का निरीक्षण करने पहुंचे थे. शिविर समाप्त होने के बाद वे बाढ़ पूर्व तैयारियों और कम्युनिटी किचन की व्यवस्था देखने निकले. इसी दौरान उन्हें पास स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय कांटाकोश के बारे में जानकारी मिली. बिना किसी पूर्व सूचना के वे सीधे स्कूल पहुंच गए. संयोग से उस समय बच्चों के मिड डे मील का समय था.
इस दौरान जिलाधिकारी ने किसी विशेष व्यवस्था की मांग नहीं की. उन्होंने खुद एक थाली मंगवाई और बच्चों को परोसे जा रहे चावल और सब्जी ही अपनी थाली में लेकर उन्हीं के बीच जमीन पर बैठ गए. भोजन करते हुए उन्होंने बच्चों से पढ़ाई, स्कूल की सुविधाओं और रोज मिलने वाले भोजन के बारे में बातचीत की. साथ ही शिक्षकों से भी शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी ली.
निरीक्षण के दौरान डीएम ने बच्चों से सुना 17 और 19 का पहाड़ा
निरीक्षण के दौरान उन्होंने कक्षा दो के बच्चों से पहाड़ा भी सुना. बच्चों ने 17 और 19 का पहाड़ा बिना रुके सुनाया, जिससे जिलाधिकारी संतुष्ट नजर आए. उन्होंने कहा कि यह दौरा पूरी तरह अनप्लान्ड था. स्कूल को पहले से निरीक्षण की कोई जानकारी नहीं थी, इसलिए जो व्यवस्था उन्हें देखने को मिली, वह वास्तविक स्थिति को दर्शाती है.
जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने कहा कि मिड डे मील की गुणवत्ता संतोषजनक मिली. बच्चों ने भी बताया कि उन्हें नियमित रूप से भोजन और निर्धारित दिनों में फल उपलब्ध कराए जाते हैं. उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा केवल योजनाएं चलाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण भोजन, बेहतर शिक्षा और सभी सुविधाएं समय पर पहुंचें.
कटिहार के इस स्कूल से सामने आई यह तस्वीर बताती है कि जब अधिकारी कुर्सी छोड़कर बच्चों के बीच बैठते हैं, तो निरीक्षण सिर्फ औपचारिकता नहीं रह जाता, बल्कि व्यवस्था में भरोसा और जवाबदेही दोनों मजबूत होते हैं.
बिपुल राहुल